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कौन हैं स्टीफन हबर्ड? पुतिन से ट्रंप ने बस इतनी सी बात कही, रूस की कैद से रिहा हो गया 70 साल का अमेरिकी नागरिक

ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी के चलते भले ही कुछ लोग उनपर भरोसा न कर पाते हों, लेकिन विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से जिस दोस्ती का दम वो भरते हैं, वो सोने की तरह खरी और 16 आना सच होती है. पुतिन या जिनपिंग बिना किसी लागलपेट के सीधे मुद्दे पर आने वाले ट्रंप ने जिस तरह स्टीफन हबर्ड को रिहा कराया, ये उसकी ताजा मिसाल है.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 22, 2026, 08:24 AM IST | Updated: Oct 22, 2026, 10:53 AM IST
Image Credit: पुतिन-ट्रंप (AI)
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यूक्रेन की तरफ से रूस के खिलाफ जंग लड़ने के आरोप में कई सालों से जेल में बंद एक सीनियर सिटिजन अमेरिकी नागरिक स्टीफन हबर्ड की बिना शर्त मॉस्को की जेल से रिहाई की खबर सुर्खियों में है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बदले रूस-अमेरिका के बीच कैदियों की अदलाबदली या कोई और डील नहीं हुई, बस ट्रंप ने अपना फोन उठाकर पुतिन का नंबर डायल किया और हेलो माई डियर फ्रेंड पुतिन कहकर अपना दो साल से अटका काम दो मिनट में करा लिया. व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित एक मीटिंग में ट्रंप ने बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच हबर्ड की रिहाई का रास्ता कैसे निकला.

पुतिन से फोन कॉल का दिलचस्प किस्सा

ट्रंप ने अपनी फोन पर हुई चर्चा की जानकारी देते हुए बताया कि पुतिन से बातचीत में उन्होंने रिहाई का मुद्दा उठाया था, महज मेरे कहने भर से ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी नागरिक को रिहा कर दिया. बताते चलें कि हबर्ड को रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव में हिरासत में लिया था और वह लंबे समय से रूस की कैद में थे.

डेमोक्रेट्स को कोसा

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हबर्ड के परिवार को टेलीविजन पर उनकी रिहाई की गुहार लगाते देखा था. मैंने रिहाई के बाद हबर्ड से सीधे बात भी की थी. हबर्ड की हालत ठीक है और वो घर वापसी को लेकर बेहद खुश हैं. ड्रेमोकेट बाइडेन के प्रशासन के दौरान एक अच्छे इंसान को रूस में बंधक बना लिया गया था. हमें तब भी लगता था कि वो एक अच्छे इंसान हैं और निर्दोष हैं.'

कौन हैं स्टीफन हबर्ड?

ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ फोन पर हुई बातचीत इस मामले में निर्णायक साबित हुई. उन्होंने रूसी राष्ट्रपति से बड़ी विनम्रता से हबर्ड को रिहा करने का अनुरोध किया और पुतिन इसके लिए फौरन मान गए.

स्टीफन हबर्ड अंग्रेजी भाषा के प्रकांड विद्वान और रिटायर्ड शिक्षक हैं और आज की तारीख में उनकी उम्र 70 साल से ज्यादा है. अक्टूबर 2024 में एक बंद कमरे में चली सुनवाई के बाद उन्हें करीब सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी. उन पर यूक्रेन की तरफ से लड़ते हुए 'भाड़े के सैनिक' के तौर पर काम करने का आरोप लगा था. हालांकि, उन्होंने ऐसे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए चुनौती दी थी.

ट्रंप-पुतिन की केमिस्ट्री

हबर्ड की रिहाई की शर्तों के बारे में बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका ने इसके बदले रूस को कुछ भी नहीं दिया. स्टीफन की रिहाई हमारी पर्सनल केमेस्ट्री है, कैदियों की अदला-बदली जैसी गणित नहीं. यह एक असामान्य घटनाक्रम है.' 

ट्रंप ने यह भी कहा, 'मैं इस मिशन से जुड़े लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. लोगों को लगता था कि स्टीफन 20-25 साल तक बाहर नहीं आ पाएंगे. खुशी है कि मेरी कोशिशें रंग लाईं. हमने बदले में कुछ नहीं दिया, जो बहुत कम देखने को मिलता है.'

रिहाई की इनसाइड स्टोरी

ट्रंप प्रशासन ने इस बीच रूस की कैद से 110 से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की रिहाई का दावा किया है. हबर्ड का केस ट्रंप खुद देख रहे थे. जिसे उनकी भरोसेमंद टीम लीड कर रही थी. ट्रंप के खास दूत विटकॉफ रूस गए थे.

विटकॉफ ने पुतिन से कई मुद्दों पर बातचीत के दौरान ट्रंप की फोन कॉल का जिक्र किया. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया, 'सेंट पीटर्सबर्ग' में हबर्ड से मुलाकात हुई. राष्ट्रपति ट्रंप ने फोन पर उनका हालचाल लेकर भरोसा दिलाया कि ट्रंप प्रशासन गलत तरीके से हिरासत में रखे गए सभी अमेरिकी नागरिकों की वापसी की कोशिशें और तेज करेगी.

विटकॉफ ने ये भी बताया, 'हबर्ड उन 110 से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों में शामिल हैं, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद रिहा कराया गया है. इनमें रॉबर्ट गिलमैन, केसेनिया कारेलिना और मार्क फोगेल के नाम भी शामिल हैं.

विटकॉफ ने रिहाई के लिए पुतिन का आभार जताया. उन्होंने हबर्ड की घर वापसी की मुहिम में सीधे तौर से जुड़े अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जेरेड कुशनर, सीआईए डायरेक्टर से लेकर पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों की सराहना की.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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