200 साल में पहली महिला को फांसी देने की तैयारी: दो डोज के बाद सांसें थमने की जगह लेने लगी खर्राटे! ले जाना पड़ा अस्पताल
अमेरिका के टेनेसी राज्य में एक महिला कैदी को फांसी की सजा सुनाई गई. महिला को इसके लिए खतरनाक और जानलेवा इंजेक्शन देकर फांसी देने की कोशिश की गई. लेकिन, जब दो डोज के बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं. इस घटना के बाद हड़कंप मच गया.
किसी ने सच ही कहा है कि मौत और जिंदगी का फैसला इंसान के हाथ में नहीं होता है. एक बार फिर से यह बात सच साबित हुई है अमेरिका में. जहां टेनेसी राज्य में कुछ ऐसा हुआ, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. यहां दो सदियों यानी लगभग 200 सालों में पहली बार किसी महिला को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई. महिला को जहरीला इंजेक्शन देने की योजना थी, लेकिन एग्जीक्यूशन रूम के अंदर कुछ ऐसा हुआ, जिसने जिसने जेल प्रशासन से लेकर सरकार तक के होश उड़ा दिए. जहरीला इंजेक्शन देने के बाद भी जब महिला की सांसें चलती रहीं और कुछ समय बाद जब वह खर्राटे लेने लगी, तो आनन-फानन जेल प्रशासन ने महिला को लेकर अस्पताल पहुंचा. इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
बुधवार को अमेरिका के टेनिसी राज्य में क्रिस्टा पाइक नाम की महिला को घातक इंजेक्शन देकर फांसी देने की कोशिश नाकाम हो गई. अधिकारियों ने उन्हें इंजेक्शन देने के बाद अस्पताल पहुंचाया. उनके वकीलों और वहां मौजूद मीडिया के लोगों के अनुसार, इंजेक्शन दिए जाने के 40 मिनट से ज्यादा समय बाद भी पाइक होश में थीं, उनकी सांस चल रही थी और उन्हें खर्राटे लेते हुए सुना गया.
पाइक को खतरनाक इंजेक्शन देने की प्रक्रिया उस समय शुरू हुई, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी फांसी पर रोक लगाने वाले निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया. इसके बाद टेनिसी में उन्हें फांसी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई.
दो बार दिया गया पेंटोबार्बिटल
मीडिया के लोगों के अनुसार, अधिकारियों ने पाइक को पेंटोबार्बिटल, जो कि एक खतरनाक और जानलेवा इंजेक्शन है, इसकी दो खुराक दीं. इसके बाद वह काफी देर तक होश में थी. मौके पर मौजूद एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टर किम चैंडलर ने बताया कि एक समय पाइक ने जेल अधिकारियों की ओर देखकर पूछा था कि क्या उन्हें ऐसा ही महसूस होना था.
इसके बाद उनका मुंह कुछ देर बाद खुला और वह तेज आवाज में खर्राटे लेने लगी. चैंडलर के अनुसार, फांसी वाले कमरे का पर्दा आखिरी बार करीब रात 8:06 बजे बंद हुआ. करीब 8:53 बजे मीडिया गवाहों को वहां से बाहर जाने के लिए कहा गया. उस समय भी पाइक की तेज खर्राटों की आवाज सुनाई दे रही थी.
वकीलों ने लगाई आपात अपील
पाइक के वकीलों ने इसके बाद टेनिसी की एक संघीय कोर्ट में इमरजेंसी याचिका दाखिल कर फांसी की प्रक्रिया रोकने की मांग की. याचिका में कहा गया कि पाइक बेहोश नहीं हुई थीं और उनकी धड़कन चल रही थी.
बाद में राज्य के अधिकारियों ने कोर्ट में बताया कि पाइक को एक अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. लेकिन, अधिकारियों ने उनकी हालत या अस्पताल का नाम नहीं बताया.
वहीं पाइक के वकीलों ने आरोप लगाया कि फांसी की प्रक्रिया में उनकी नस तक पहुंच बनाने में परेशानी हुई और दवा को लेकर भी सवाल उठे. दूसरी तरफ, टेनिसी की एक सरकारी एजेंसी ने कहा कि अधिकारियों ने राज्य में तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सभी कदम उठाए और इस्तेमाल किए गए घातक इंजेक्शन की दवा पहले भी प्रभावी रही है.
गवर्नर ने जांच के आदेश दिए
टेनिसी के गवर्नर बिल ली ने इस घटना की विस्तृत जांच के लिए तीसरे पक्ष की रिव्यू का आदेश दिया है. उन्होंने इस साल राज्य में होने वाली बाकी निर्धारित फांसी को भी कैंसिल कर दिया है. ली ने कहा कि किसी कानूनी सजा को लागू करना राज्य की गंभीर जिम्मेदारियों में से एक है और लोगों को उम्मीद है कि इसे कानूनी और संवैधानिक तरीके से प्रभावी ढंग से पूरा किया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह जांच पूरी होने में लगभग 1 साल का समय लग सकता है. ऐसे में टेनिसी की फांसी भी जांच पूरे होने तक टल गई है. यानी टेनिसी की मौत एक साल बढ़ गई है.
कौन हैं क्रिस्टा पाइक?
क्रिस्टा पाइक पिछले 30 साल यानी 1995 से जेल में बंद हैं. उन्हें अपने ही एक क्लासमेट की बेरहमी से हत्या करने के जुर्म में 1996 में सजा-ए-मौत सुनाई गई थी. उस वक्त वह सिर्फ 20 साल की थीं. उनके वकीलों और मानवाधिकार संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि बचपन में झेले गए भयंकर मानसिक दबाव और शोषण के चलते क्रिस्टा मानसिक बीमारियों से जूझती रही हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल से लौटने के बाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में क्या नया मोड़ आता है.
(ये भी पढ़ेंः चारों तरफ समंदर...6 भीमकाय व्हेलों ने पलट दी नाव, 17 घंटे तक मौत के जबड़े में फंसे 4 नाविक; कैसे बची जान?)
200 साल में टेनिसी में पहली महिला को फांसी
पाइक को टेनिसी में करीब 200 साल में फांसी पाने वाली पहली महिला बनाया जाना था. वह लंबे समय तक राज्य की डेथ रो पर अकेली महिला भी रही थीं. पाइक के वकीलों ने अदालतों में यह दलील दी थी कि उनके बचपन में यौन शोषण, उपेक्षा और मानसिक परेशानियों का उनके मूल मुकदमे में पर्याप्त तरीके से जिक्र नहीं किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अपराध के समय पाइक कुछ महीने छोटी होतीं, तो टेनिसी में उन्हें मौत की सजा के लिए योग्य नहीं माना जाता.
पाइक ने फांसी से पहले लिखे एक पत्र में कहा था कि उन्हें मौत से डर नहीं लगता, बल्कि वह इस प्रक्रिया को लेकर परेशान थीं. उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपने फैसले के नतीजे को लेकर शांत थीं.
(ये भी पढ़ेंः Flydubai Flight Incident: क्या UAE में रची जा रही थी 9/11 जैसी साजिश? फ्लाईदुबई फ्लाइट की टेरर एंगल से जांच शुरू)
क्या Pike को दोबारा दी जा सकती है मौत की सजा?
अब लोगों के मन में यही सवाल आ रहा है कि क्या जिंदा बचने के बाद Pike को फिर से मौत की सजा देने की कोशिश की जा सकती है? तो इसका जवाब है हां. अमेरिका में ऐसा पहले भी हो चुका है कि मौत की सजा पाने वाला कोई कैदी पहली कोशिश के बाद जिंदा बच गया. करीब 80 साल पहले Louisiana में 16 साल के Willie Francis को इलेक्ट्रिक चेयर से मौत देने की कोशिश की गई थी. मशीन में खराबी के कारण वह बच गया था.
Francis ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा था कि दोबारा मौत की सजा देना संविधान के तहत गलत होगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और बाद में उन्हें दूसरी बार इलेक्ट्रिक चेयर से मौत दी गई.
लेकिन क्रिस्टा पाइक का मामला बिल्कुल अलग है, क्योंकि इस बार जानलेवा दवाइयां उनके शरीर के अंदर पहुंच चुकी थीं. अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या कानूनी रूप से उन्हें एक बार फिर सजा देने की कोशिश की जाएगी या नहीं. फिलहाल इस पूरे मामले पर सस्पेंस बना हुआ है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अगला कदम साफ हो पाएगा.