SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

पाकिस्तान में खत्म होगी तोहफों की लूट? शहबाज सरकार ने बदले तोशाखाना के नियम, अब होगी खुली नीलामी

पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने तोशाखाना से तोहफे अपने पास रखने के नियम बदल दिए हैं. सरकार ने नए निमय बनाकर दावा किया है कि अब सबकुछ पारदर्शी तरीके से होगा.

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 26, 2026, 08:33 PM IST | Updated: Oct 26, 2026, 08:46 PM IST
Image Credit: Ai की मदद से बनाई गई तस्वीर
Join

पाकिस्तान सरकार ने तोशाखाना से जुड़े नियमों को थोड़ा और सख्त कर दिया है. नए नियमों के तहत अब सरकारी अफसर 300 डॉलर तक के तोहफों की अंदाजन कीमत चुकाकर भी अपने पास नहीं रख पाएंगे. जबकि पहले ऐसा था कि अगर किसी अफसर को कोई तोहफा पसंद आता था, तो वह उसकी अनुमानित बाजार कीमत चुकाकर अपने पास रख लेता था, लेकिन अब ऐसा भी नहीं हो पाएगा.

अब सभी तोहफों को नीलामी होगी और वहां सबसे ऊंची कीमत लगाने वाले को वो तोहफा दिया जाएगा. हालांकि, नए नियमों में एक ऐसा पहलू भी रखा है जो चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल एक कमेटी को यह हक दिया गया है कि वो यह तय करे कि किन तोहफों को कूटनीतिक तौर पर सार्वजनिक नीलामी से छूट दी जा सकती है.

जियो न्यूज ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि तोशाखाना की 2023 की नीति और तोशाखाना (प्रबंधन एवं नियमन) नियम 2026 की तुलना से पता चलता है कि पुरानी नीति के तहत 300 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले तोहफे राज्य की संपत्ति बन जाते थे.

नए नियमों के तहत ऐसे तोहफों को तोशाखाना में जमा कराना जरूरी है, जिन्हें कूटनीतिक या सांस्कृतिक वजहों से लेने से इनकार नहीं किया जा सकता. नए नियमों में उन तोहफों की खुली नीलामी का भी प्रावधान है, जिन्हें बेचा जा सकता है.

यह भी पढ़ें: एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान

कुछ तोहफों को नीलामी से दी गई है छूट

सबसे अहम प्रावधान उन तोहफों को लेकर है, जिनकी नीलामी नहीं की जाएगी. 2026 के नियमों के तहत प्राचीन वस्तुओं और सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व की चीजों को नीलामी से छूट दी गई है. इसके अलावा, कीमती और कूटनीतिक या अंतरराष्ट्रीय लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले तोहफों को भी नीलामी से छूट दी जा सकती है. इसका फैसला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक कमेटी करेगी. इस कमेटी में वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, कानून मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के सीनियर अफसर शामिल होंगे.

इस प्रावधान की वजह से नीलाम किए जाने वाले तोहफों और नीलामी से बाहर रखे जाने वाले तोहफों के बीच अंतर पैदा हो गया है. हालांकि, किसी तोहफे को नीलामी से छूट मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसे पाने वाला अधिकारी उसे निजी तौर पर अपने पास रख सकता है. फिर भी, समिति का यह फैसला अहम हो गया है कि किस कीमती तोहफे के साथ क्या किया जाएगा.

2023 की नीति में भी 300 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले तोहफों को निजी तौर पर अपने पास रखने पर रोक थी और उन्हें राज्य की संपत्ति माना जाता था. इस नीति में प्राचीन वस्तुओं और वास्तविक ऐतिहासिक महत्व वाले तोहफों को भी निजी तौर पर रखने की छूट से बाहर रखा गया था. पुरानी नीति के मुताबिक, ऐसे तोहफे जिन्हें अपने पास रखना, दान करना या प्रदर्शनी में रखना उचित नहीं माना जाता था, उन्हें समय-समय पर आयोजित सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचा जाना था.

 

कैसे तय होगी तोहफों की कीमत

2026 के नए नियमों में तोहफों की कीमत तय करने के लिए नई व्यवस्था अपनाई गई है. अब किसी तोहफे की कीमत सरकारी विभाग FBR और एक निजी विशेषज्ञ मिलकर तय करेंगे. अगर दोनों की बताई कीमत में 25 फीसदी से ज्यादा का अंतर होगा, तो तीसरे विशेषज्ञ से भी कीमत का आकलन कराया जाएगा. इसका मकसद यह है कि किसी तोहफे की कीमत जानबूझकर कम न बताई जा सके.

यह भी पढ़ें: तालिबान के खिलाफ पुरानी चाल पर लौटा पाकिस्तान, अब 'आग से बुझाएगा आग', सुलग सकती है पश्चिमी सीमा?

नीलामी के लिए तोहफे की जो कम से कम कीमत तय होगी, वह उसकी अनुमानित बाजार कीमत से कम नहीं हो सकती. इसके अलावा, तीन महीने से पुराने मूल्यांकन की बुनियाद पर नीलामी की शुरुआती कीमत तय नहीं की जा सकेगी. यानी अगर किसी तोहफे की कीमत तीन महीने पहले तय की गई थी, तो नीलामी से पहले उसकी कीमत का नया आकलन कराना होगा.

नीलामी की मीडिया कवरेज होगी

नए नियमों के तहत तोहफों की खुली नीलामी करना जरूरी होगा. सरकारी अधिकारी और उनके परिवार के लोग इसमें बोली नहीं लगा सकेंगे. नीलामी की मीडिया कवरेज भी की जाएगी, ताकि लोग देख सकें कि तोहफे कैसे बेचे जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है.

सरकार तोहफों का रिकॉर्ड एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी डालेगी. इसमें बताया जाएगा कि किसी तोहफे की अनुमानित कीमत कितनी थी, नीलामी के लिए उसकी शुरुआती कीमत क्या रखी गई और वह आखिर में कितने रुपये में बिका. इस पोर्टल को हर महीने अपडेट किया जाएगा. हालांकि, तोहफा देने वाले विदेशी नेताओं के नाम और उनके देशों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी.

लड़कियों की शिक्षा पर खर्च होगा पैसा

नए नियमों के तहत हर साल एक स्वतंत्र एजेंसी तोशाखाना के रिकॉर्ड की जांच करेगी. यानी यह देखा जाएगा कि सरकारी अधिकारियों को मिले तोहफों का सही हिसाब रखा गया या नहीं और उन्हें बेचने में किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई. नीलामी से मिलने वाला पैसा एक अलग खाते में जमा किया जाएगा. इस रकम का इस्तेमाल पाकिस्तान के पिछड़े इलाकों में लड़कियों की शुरुआती शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES