पुतिन की नई धमकी: यूरोप से पुरानी अदावत, बाल्टिक पर तनातनी; पूछा- क्या होर्मुज बनाना चाहते हैं?
रूस और यूरोप के बीच सदियों से 36 का आंकड़ा रहा है. 19वीं सदी से लेकर 21 वीं सदी तक दोनों कई बार टकरा चुके हैं. क्रीमिया की जंग में रूस के खिलाफ ब्रिटेन फ्रांस और अन्य देश थे, जंग की लपटें तब भी बाल्टिक सागर तक पहुंची थीं. पुतिन आज जिस क्षेत्र को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, वो पहले भी रूस और यूरोपीय ताकतों के बीच टकराव का हिस्सा रह चुका है.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप को दो टूक चेतावनी देते हुए आगाह किया कि वो जंग नहीं चाहता, लेकिन फिर भी अगर युद्ध होता है तो वो उसके लिए पूरी तरह से तैयार है. पुतिन ने यह भी कहा, 'अचानक युद्ध छिड़ने पर भले ही किसी को एकतरफा जीत न मिले, लेकिन हमारा बैकअप प्लान तैयार है. पुतिन ने बाल्टिक सागर में पाबंदी लगाने की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बार फिर कहा, 'रूस युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार है.' पुतिन ने स्पष्ट तौर पर यह कहा कि रूस, बाल्टिक सागर में समुद्री रास्तों पर रोक लगाने के खिलाफ है. अगर जहाजों की आवाजाही में बाधा डाली गई तो यहां भी वैसी स्थिति बन सकती है, जैसी होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास देखने को मिली है.'
हम तैयार हैं: पुतिन
मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने सवाल किया, 'क्या कोई चाहता है कि बाल्टिक सागर में भी खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हालात बन जाएं?' इसके जवाब में पुतिन ने कहा- ' नहीं! हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन किसी भी चुनौती का जवाब देंगे. हम पूरी तरह तैयार हैं.'
टकराव बढ़ा तो महंगी पड़ेगी बाजी!
पुतिन का यह बयान अफ्रीकी देशों के नेताओं के साथ शिखर सम्मेलन की मेजबानी के बाद आया है. इस दौरान फिनलैंड और नॉर्वे के साथ हाल में हुई राजनयिक बातचीत पर भी चर्चा हुई. पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों के साथ रूस के रिश्तों में तनाव बढ़ने के बावजूद मॉस्को यूरोपीय देशों के साथ संबंध सुधारने की पहल के लिए तैयार है.
रूसी राष्ट्रपति ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनका देश यूरोप के साथ युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है, लेकिन वह ऐसा कोई संघर्ष नहीं चाहता. जो देश टकराव का रास्ता अपनाना चाहते हैं, उन्हें इसके नतीजे भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए.
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पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर का भी बचाव किया. दरअसल दोनों नेताओं ने इसी हफ्ते पुतिन से फोन पर बात की थी. मॉस्को के साथ बातचीत करने के उनके फैसले की यूरोपियन यूनियन के कुछ राजनीतिक हलकों में आलोचना हुई थी. इसी संदर्भ में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि संबंधों को फिर से बेहतर बनाने के लिए बातचीत जारी रखना जरूरी है.'
रूस-यूरोप के बीच 36 का आंकड़ा
रूस-यूरोप की अदावत सदियों पुरानी है. इतिहास के पन्नों को पलटने से पता चलता है कि दोनों पहले भी कई बार एक-दूसरे से लोहा ले चुके हैं. अब एक बार फिर से ये टकराव अंदर ही अंदर सुलगने की खबरें आ रही हैं.
पुतिन के बयान को गहराई से समझें तो यूरोप और रूस के बीच बढ़ती तल्खी के बीच बाल्टिक सागर दोनों के बीच टकराव का नया केंद्र बनता दिख रहा है. समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह की रोक-टोक/ब्लॉकेज को लेकर रूस ने कड़ा रुख अपनाया है. पुतिन के हालिया बयान से साफ है कि वो पश्चिमी देशों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहता है, लेकिन अगर कोई दबाव बनाने की कोशिश करेगा तो जैसे को तैसा जवाब दिया जाएगा.
19वीं सदी की बात करें तो 1950 के दशक में क्रीमिया की जंग में रूस के खिलाफ ब्रिटेन, फ्रांस, ऑटोमन साम्राज्य और अन्य सेनाएं आमने-सामने थीं. इसके अलावा भी दोनों कई बार एक दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं.
बाल्टिक सागर से आवाजाही रूस के लिए क्यों जरूरी
ये समुद्री क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक रूप से रूस की लाइफ लाइन है.
बीते करीब 468 सालों में कई बार टकराव देखने को मिल चुका है. 1558 में लिवोनिया का युद्ध, 1605 का रूस-पोलैंड युद्ध, 1700 का ग्रेट नॉर्थ वॉर, 1852 में क्रीमिया का युद्ध, 20वीं सदी के विश्व युद्ध से लेकर 2026 तक यूरोप और रूस के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ है.