ट्रंप हार से सिकुड़े, पुतिन का सीना हुआ चौड़ा: खाड़ी में मास्को की एंट्री? ईरान बनेगा रूसी गैस का नया ‘गेटवे
मॉस्को में पुतिन और ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई की बातचीत ऐसे समय हुई है, जब तेहरान और वॉशिंगटन में बैठे अफसरों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं. वार्ता में युद्ध के बाद मध्य-पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था के साथ रूस-ईरान ऊर्जा सहयोग पर भी जोर रहा.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नेता मेहसिन रेजाई ने मॉस्को जाकर पुतिन से मुलाकात की तो मानो डूबके को तिनके का नहीं, बल्कि सुपरसहारा मिल गया. रूस में मिले प्यार और मदद के आश्वासन से गदगद रेजाई ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करके खुशी हुई. रेजाई ने इस मुलाकात के बाद मीडिया को दिए बयान में बताया कि रूस और ईरान के बीच रश्त-अस्तारा कॉरिडोर को लेकर चर्चा हुई, जिसे सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मंजूरी दे दी है; दोनों देशों के मंत्रालय बहुत जल्द इसे लागू करने के लिए होने वाले समझौते पर साइन करेंगे.
कारोबार से सुरक्षा तक चर्चा
ईरानी न्यूज एजेंसी इरना से बातचीत में रेजाई ने कहा, 'रूस से ईरान तक गैस पाइपलाइन बिछाने पर भी बातचीत हुई, जिससे न केवल ईरान अपनी गैस की कमी को दूर कर सकेगा, बल्कि हम ईरान के पड़ोसी देशों को भी रूस की गैस बेच सकेंगे.' इस तरह से अमेरिका और इजरायल के हमलों में बर्बादी और कर्ज के दलदल में धंस चुके ईरान को बड़ी राहत मिली है. ईरान की सेना के सर्वोच्च नेताओं में से एक रेजाई ने कहा कि उनका देश दुश्मनों को ऐसा सबक सिखाएगा, जिसकी लोग मिसालें देंगे.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने क्रेमलिन में क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद की स्थिति और ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत की.
मोजतबा का सीक्रेट मैसेज
बैठक के बाद रजाई ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने खुद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का एक संदेश पुतिन तक पहुंचाया है. खामेनेई चाहते थे कि यह संदेश जल्द से जल्द रूसी राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाए. इसलिए उन्हें ये यात्रा करनी पड़ी. वहीं मोजतबा के खत के जवाब में पुतिन ने भी ईरान के सर्वोच्च नेता को अपनी शुभकामनाएं भेजीं.
ट्रंप के घरेलू मोर्चे पर कमजोर पड़ने के बाद मुलाकात
हाल ही में अमेरिका के मिड टर्म इलेक्शन में ट्रंप की पार्टी की करारी हार और डेमोक्रेटट्स की मजबूती ने ईरान को सदमा देने वाले ट्रंप के तेवर कुछ नरम नजर आ रहे हैं. ऐसे में मौके की नजाकत को समझते हुए ईरान और रूस ने एक बार फिर पहले की तरह 'खुला खेल फर्रुखाबादी' खेलते हुए अपनी रणनीति को धार दी है.
आपको बताते चलें ईरान की कुछ न्यूक्लियर साइट्स रूस की देखरेख में चल रही थीं. रूस के कई वैज्ञानिक और अन्य स्टाफ तेहरान और आस-पास में था. जब इसी साल फरवरी और मार्च में ईरान पर घातक हमलों की इंतेहा हुई थी तब रूस के वहां से अपने लोगों को निकालने के लिए सेफ पैसेज की मांग की की खबरें आई थीं.