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'ना दिल्ली, ना ढाका!' बांग्लादेश में फिर भारत विरोधी हुंकार, नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान को भी ललकारा

बांग्लादेश की पार्टी NCP के नेता नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और भारत कई गंभीर आरोप लगा हैं. साथ ही उन्होंने दिसंबर में खत्म होने वाली भारत-बांग्लादेश जल संधि को लेकर अपने पीएम को चेतावनी दी है.

'ना दिल्ली, ना ढाका!' बांग्लादेश में फिर भारत विरोधी हुंकार, नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान को भी ललकारा
Image Credit: Ai की मदद से बनाई गई तस्वीर

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बार फिर विरोध के सुर तेज होने लगे हैं. नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने इस बार बांग्लादेश की सरकार समेत भारत पर भी तरह-तरह के आरोप लगाए हैं. हजारों की तादाद में शुक्रवार को इकट्ठा हुए लोगों इस बार महंगाई, बेराजगारी, बिजली संकट, गैस की किल्लत जैसी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हुए गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. साथ ही 'ना दिल्ली ना ढाका' के नारे भी लगाए. इस आंदोलन में एनसीपी के कट्टरपंथी सांसद हसनत अब्दुल्ला भी शामिल हुए , जिन्होंने पिछले साल भारत की सात बहनों से संबंध तोड़ने की धमकी दी थी और भारत की नाराजगी मोल ली थी.

राजधानी ढाका में हुई इस रैली में भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन यह सिर्फ घरेलू मुद्दों तक सीमित नहीं थी. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एनसीपी नेता 'दिल्ली ना ढाका' का नारा लगाते नजर आ रहे हैं, जिसके जवाब में रैली में जमा हजारों लोग 'ढाका, ढाका' के नारे लगा रहे हैं. यह पहली बार नहीं है, जब नाहिद इस्लाम अपने समर्थकों के बीच भारत विरोधी लहर को जन्म दे रहे हैं, वो इससे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके हैं. इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश चुनावों से पहले सभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ बयानबाजी की है.

भारत के साथ संबंधों पर नाहिद ने कहा कि तारिक रहमान की सरकार सीमा पर होने वाली हत्याओं, पहाड़ियों में अशांति, असम और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के कथित उत्पीड़न जैसे मुद्दों को हल करने में विफल रही है. नाहिद ने चेतावनी दी कि अगर दिसंबर में गंगा जल बंटवारे की संधि को मुनासिब शर्तों पर रिन्यू नहीं किया गया, तो लोग फिर से सड़कों पर उतरेंगे. उन्होंने कहा,'इस बार हम गंगा संधि के तहत अपने उचित हिस्से का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे.'

क्या है भारत-बांग्लादेश की जल संधि

भारत और बांग्लादेश के बीच 30 साल पुरानी संधि इस साल दिसंबर में खत्म हो रही है. दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच यह एक अहम मुद्दा बन गया है. बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने 12 दिसंबर तक नई संधि को अंतिम रूप देने की मांग की है. इस संधि के तहत तय होगा कि 1 जनवरी से 31 मई के बीच कम पानी के मौसम में भारत के फरक्का बैराज से गंगा का पानी भारत और बांग्लादेश के बीच कैसे बांटा जाएगा.

ढाका में गंगा नदी को पद्मा के नाम से जाना जाता है, जो बांग्लादेश की जीवनरेखा है. देश की लगभग एक तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए इस नदी पर निर्भर है. यही वजह है कि यह संधि बांग्लादेश के लिए इतनी महत्वपूर्ण है.

नई तानाशाही का उदय हो रहा है- नाहिद

ढाका के शाहबाग में मौजूद राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने आयोजित की गई इस सभा में नाहिद इस्लाम ने शेख हसीना को हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा,'पिछली तानाशाही को हटाने के बाद देश में एक "नई तानाशाही" का उदय हो रहा है.' उन्होंने आगे कहा,'हमने एक तानाशाह को सत्ता से बेदखल कर दिया, लेकिन अब हम एक नई तानाशाही का उदय देख रहे हैं. हालांकि, हमने जनता से वादा किया है कि हम बेदखल तानाशाह और इस नए तानाशाह दोनों को परास्त करेंगे.'

नाहिद ने कहा कि बढ़ती महंगाई, लूटपाट, बिजली और गैस की कमी, सरकारी संस्थाओं का राजनीतिकरण और बिगड़ती कानून व्यवस्था ने लोगों का जीवन दयनीय बना दिया है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार जन सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रही है. उन्होंने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद को नाकामियों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की.

इस्तीफा नहीं देने पर देशभर में होंगे प्रदर्शन

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वे इस्तीफा नहीं देते हैं, तो हम देशभर में जुलूस निकालेंगे. हम उन जुलूसों को तारिक रहमान तक ले जाएंगे और उन्हें हमारी मांगें मानने के लिए मजबूर करेंगे. नाहिद ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा,'तारिक रहमान लंदन से ढाका इस योजना के साथ आए थे कि देश में भ्रष्टाचार, लूटपाट, जबरन वसूली, आतंकवाद और कब्जा कैसे स्थापित किया जाए.'

गंगा नदी पर कितना निर्भर है बांग्लादेश

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About the Author

Tahir Kamran

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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