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पोप को लंग कैंसर: कितना खतरनाक है पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा? कैसे पहचानें लक्षण

Pulmonary Adenocarcinoma Cancer: वैटिकन कैथोलिक चर्च के चीफ पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टि की है. बताया जा रहा है कि उनमें पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा नाम के कैंसर का पता चला है. आखिर यह कैंसर कैसे होता है?

Written By Shruti Kaul
Published: Oct 14, 2026, 10:07 AM IST | Updated: Oct 14, 2026, 10:22 AM IST
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Pope Leo Cancer: कैथोलिक चर्च के चीफ पोप लियो XIV को फेफड़ों का कैंसर हो गया है. इसकी पुष्टि वैटिकन की ओर से की गई. वैटिकन ने पोप के कार्यकाल की शुरुआत से ही उनकी सेहत को लेकर चिंता जाहिर की थी. वहीं अब मंगलवार ( 13 सितंबर 2026) को डॉक्टरों ने पोप XIV में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा नाम के लंग कैंसर को डिटैक्ट किया है. यह फेफड़ों के कैंसर का एक प्रकार है.  

'वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, वैटिकन ने बताया कि पोप के फेफड़े का एक हिस्सा निकालने के लिए उनकी सर्जरी की गई. अमेरिका में फेफड़ों का कैंसर आम है. यह वहां कैंसर से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों का एक मुख्य कारण है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर इसका पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो इसका इलाज संभव है.      

क्या है पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा? 


एडेनोकार्सिनोमा फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है, जो शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है. अक्सर धूम्रपान करने वालों में यह कैंसर पाया जाता है, लेकिन कई मामलों में स्मोकिंग न करने वाले लोगों को भी यह अपना शिकार बना सकता है. खासतौर से सेकंड-हैंड स्मोक यानी दूसरों के धूम्रपान के धुएं से भी इसका खतरा अधिक रहता है. लंग कैंसर में मरीज को लगातार खांसी, खांसी के साथ खून या बलगम आना, सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द शामिल हो सकते हैं. हालांकि, कई बार कैंसर बिना किसी लक्षण के भी हो सकता है.

पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा का इलाज कैसे किया जाता है?


'वॉशिंगटन पोस्ट' ने अपनी रिपोर्ट में न्यूयॉर्क में माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम के थोरेसिक सर्जरी डिपार्टमेंट के चेयरमैन राजा फ्लोरेस के हवाले से बताया कि शुरुआती स्टेज में पता चलने पर फेफड़ों के कैंसर के ट्यूमर को सर्जरी से हटाया जा सकता है और इस बीमारी में लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना अच्छी होती है. इसमें डॉक्टर लंग का एक हिस्सा हटा सकते हैं. फ्लोरेस ने कहा कि अगर मरीज की सेहत अच्छी है, तो फेफड़े की सर्जरी के बाद भी वे एक्सरसाइज कर सकते हैं और नॉर्मल जीवन जी सकते हैं.

फ्लोरेस ने कहा कि कैंसर के दोबारा होने की संभावना हमेशा बनी रहती है, इसलिए सर्जरी के बाद मरीजों का आम तौर पर हर 6 महीने में CT स्कैन किया जाता है. कैंसर के दोबारा होने की संभावना ट्यूमर के साइज और इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर कितनी जल्दी डिटैक्ट हुआ. फ्लोरेस के मुताबिक,  सर्जरी से पहले कैंसर को छोटा करने या ऑपरेशन के बाद बचे हुए कैंसर को खत्म करने के लिए इम्यूनोथेरेपी या कीमोथेरेपी जैसे इलाज का इस्तेमाल किया जा सकता है और अगर कैंसर शरीर में बेहद ज्यादा फैल गया हो, तो सर्जरी के विकल्प की उम्मीद कम होती है.

कैंसर से बचने के लिए क्या करें? 


रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंग कैंसर से बचने के लिए धूम्रपान छोड़ना और कैंसर की स्क्रीनिंग करवाते रहना सबसे जरूरी है. 50- 80 साल की उम्र के वे सभी लोग, जो स्मोकिंग करते हैं उन्हें भी स्क्रीनिंग करवाते रहना चाहिए. इसके अलावा मरीजों को कैंसर के किसी भी लक्षण या परिवार में कैंसर के इतिहास के बारे में भी अपने डॉक्टरों से बात करनी चाहिए. 

 एस्बेस्टस और रेडॉन जैसे जहरीले केमिकल्स से खुद को बचाएं, हुक्का न फूंकें, वायु प्रदूषण से बचें और हेल्दी डाइट के साथ लगातार अपना हेल्थ चेकअप करवाते रहें. 

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About the Author

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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