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US आर्मी में 30 पार के सैनिकों पर नई तैयारी, समझिए पेंटागन के हार्मोन टेस्ट की गाइडलाइंस की पूरी कहानी

पेंटागन ने चेतावनी दी है कि इस हार्मोन का इस्तेमाल केवल किसी बीमारी या सर्टिफाइड मेडिकल कमी के इलाज के लिए होगा. युद्ध के मैदान में अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए इसका शॉर्टकट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

US आर्मी में 30 पार के सैनिकों पर नई तैयारी, समझिए पेंटागन के हार्मोन टेस्ट की गाइडलाइंस की पूरी कहानी

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने अपने सैनिकों के लिए बड़ा कदम उठाया है. 30 साल या उससे ज्यादा उम्र के सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच लागू करने के लिए नई क्लिनिकल गाइडलाइंस जारी की गई हैं. साथ ही, इलाज के लिए सीमाएं तय की हैं और सिर्फ परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए इस हार्मोन का इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी दी है.

रॉयटर्स के मुताबिक, डिफेंस हेल्थ एजेंसी ने 17 सितंबर को गाइडेंस जारी की. यह जुलाई के उस आदेश के तहत पुरुष सर्विस सदस्यों के लिए एक जैसी स्क्रीनिंग और इलाज की प्रक्रिया तय करती है, जिसमें एक्टिव-ड्यूटी और रिजर्व कर्मचारी शामिल हैं. 30 साल से कम उम्र के लोग स्क्रीनिंग के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं.

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन ने इस पहल को जंग के लिए तैयार रहने की क्षमता से जोड़ा है. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता ने कहा,'विभाग एक ऐसी तैयार और घातक लड़ाकू सेना बनाने और बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है, जो जंग के मैदान में दबदबा बनाने और ताकत के दम पर शांति हासिल करने के लिए तैयार हो.'

हालांकि, क्लिनिकल दस्तावेज में पुष्टि की गई कमी के इलाज और जंग के मैदान में बेहतर परफॉर्मेंस के लिए टेस्टोस्टेरोन देने के बीच साफ अंतर बताया गया है.

बयान में कहा गया है, 'मौजूदा सबूतों के आधार पर किसी बीमारी या कमी के इलाज के बजाय प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर आधारित गाइडेंस का समर्थन नहीं किया जा सकता है.'

गाइडलाइंस में क्या लिखा है?

गाइडलाइन के मुताबिक, स्क्रीनिंग की शुरुआत लक्षणों और जोखिम वाले फैक्टर्स के सिस्टेमैटिक इवैल्यूएशन से होती है. अगर यह इवैल्यूएशन पॉजिटिव आता है या कोई जोखिम कारक मौजूद होता है, तो इसके बाद ब्लड टेस्ट किया जाता है. स्क्रीनिंग की जरूरत का मतलब यह नहीं है कि हर सर्विस मेंबर को अपने आप हार्मोन ट्रीटमेंट मिल जाएगा.

डायग्नोसिस के लिए लगातार कम टेस्टोस्टेरोन लेवल और उससे जुड़े लक्षणों का होना जरूरी है. केवल लैब में कम रीडिंग आना या केवल लक्षण होना ही काफी नहीं है.

गाइडलाइन में अलग-अलग दिनों में खाली पेट सुबह के समय दो ब्लड सैंपल लेने की बात कही गई है. इसमें आगे की टेस्टिंग का भी प्रावधान है. अगर टोटल टेस्टोस्टेरोन रीडिंग नॉर्मल रेंज में होने के बावजूद लक्षण बने रहते हैं.
लक्षणों में सेक्स की इच्छा में कमी, ऊर्जा में कमी, फोकस करने में परेशानी, मांसपेशियों के मसल मास में कमी और उदास मन-स्थिति शामिल हो सकते हैं.

डॉक्युमेंट में क्या दी गई चेतावनी?

डॉक्यूमेंट में चेतावनी दी गई है कि ये लक्षण नींद की कमी, मानसिक तनाव, अपर्याप्त कैलोरी सेवन और मिलिट्री सर्विस में आम अन्य स्थितियों से भी जुड़े हो सकते हैं. गाइडलाइन में बताए गए मिलिट्री सर्विलांस रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2018 और 2025 के बीच हर साल 1 प्रतिशत से भी कम पुरुष सर्विस मेंबर में एक्टिव क्लिनिकल डायग्नोसिस पाया गया.

डॉक्यूमेंट में कहा गया कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से सेक्सुअल फंक्शन, शरीर की बनावट और बोन मिनरल डेंसिटी में फायदे देखे गए हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि ऊर्जा, जीवन-शक्ति, शारीरिक कार्यक्षमता या सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निशन) को बेहतर बनाने के लिए इसके इस्तेमाल का समर्थन करने वाले सबूत नहीं हैं.

इलाज कराना होगा विकल्प

साथ में दी गई मरीजों के लिए जानकारी वाली शीट से यह साफ होता है कि इलाज करवाना एक विकल्प है. डॉक्यूमेंट में कहा गया है, 'जांच या इलाज न करवाने पर कर्मचारी को किसी तरह के बुरे नतीजे का सामना नहीं करना पड़ेगा.'

थेरेपी से जिनकी हालत स्थिर है, उन्हें आम तौर पर बिना किसी विशेष छूट (वेवर) के तैनाती के लिए भेजा जा सकता है, बशर्ते दवा का प्रकार ऐसा हो. इलाज करने वालों को तैनाती की अवधि और उसके बाद के 90 दिनों के लिए पर्याप्त दवा का इंतजाम करना होगा, या फिर दोबारा दवा सप्लाई करने की योजना का रिकॉर्ड रखना होगा. खास तरह की ड्यूटी के लिए अलग नियम लागू रहेंगे.

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About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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