30 लाख ग्राहकों के पैसे अटके और राष्ट्रपति को होना पड़ा नजरबंद... आखिर पराग्वे में अचानक ऐसा क्या हो गया?
पराग्वे के बड़े डिजिटल बैंक 'उएनो बैंक' (Ueno Bank) के डूबने से देश में भारी आर्थिक और राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में इन दिनों बवाल मचा हुआ है. बवाल की वजह है एक बड़े डिजिटल बैंक का डूबना. जिसके चलते पूरे देश में गहरा आर्थिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. ये वही बैंक है, जो देश की लगभग आधी आबादी को सेवा दे रहा था, अब हालात ये हैं कि 65 लाख की कुल आबादी वाले देश में करीब 30 लाख ग्राहक अपनी जमा पूंजी नहीं निकाल पा रहे हैं. इस संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाने के साथ ही करोड़ों डॉलर के सरकारी धन को भी खतरे में डाल दिया है.
मामला तूल पकड़ते ही पराग्वे की सीनेट ने राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पर कदाचार के आरोप में महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटा दिया है. महाभियोग के कुछ ही मिनटों बाद उन्हें हिरासत में लेकर हाउस अरेस्ट कर दिया गया, जबकि पेड्रो अलियाना ने नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. सैंटियागो पेना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF के पूर्व अर्थशास्त्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी रहे हैं. आइए जानते हैं...
पराग्वे में जिस बैंक के डूबने से भारी बवाल मचा हुआ है, वह उएनो बैंक (Ueno Bank) है. यह देश का सबसे बड़ा डिजिटल बैंक था, जो नवंबर 2026 में दिवालिया होने के कारण पूरी तरह बंद हो चुका है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
पराग्वे में कैसे खड़ा हुआ Ueno Bank का साम्राज्य?
पराग्वे ब्राजील, अर्जेंटीना और बोलीविया से घिरा हुआ है. इस देश की इकोनॉमी मुख्य रूप से खेती (कृषि निर्यात) और हाइड्रोपावर पर टिकी है. इस पूरे संकट के सेंटर में 'उएनो बैंक' (Ueno Bank) है, जो एक डिजिटल बैंक था और 'ग्रुपो वाज्क्वेज' (Grupo Vazquez) बिजनेस ग्रुप के कंट्रोल में चलता था.
बैंक की 2023 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुपो वाज्क्वेज ने 2021 में 'फाइनेंशिएरा एल कॉमर्सियो' को खरीदकर उसे 'फाइनेंशिएरा उएनो' का नाम दिया. इसके बाद फरवरी 2022 में अपना डिजिटल बैंकिंग ब्रांड लॉन्च किया. फिर 2024 में इसने 'विजन बैंको' (Vision Banco) को भी खरीद लिया, जिससे इसके ग्राहकों की संख्या और बिजनेस का दायरा काफी तेजी से बढ़ गया.
आखिर क्यों डूबा Ueno Bank?
अब सवाल है कि आखिर ये बैंक क्यों डूबा? बैंक के डूबने की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह इसकी खराब होती फाइनेंशियल हालत थी, खासकर कैपिटल एडिक्वेसी और लोन देने की क्वालिटी में आई भारी गिरावट. एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, पराग्वे के सेंट्रल बैंक ने जांच में पाया कि बैंक की संपत्तियां कमजोर हो चुकी हैं, लेनदेन के डॉक्यूमेंट्स में भारी गड़बड़ी है और ग्रुपो वाज्क्वेज से जुड़ी कंपनियों को ही बड़े पैमाने पर लोन बांटे गए हैं. इन्हीं गंभीर कमियों को पकड़ने के बाद सेंट्रल बैंक ने इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की.
कैसे पकड़ी गई बैंक की गड़बड़ी?
- AP की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल बैंक के जांच अधिकारियों ने जून में ही इस खतरनाक 'इनसाइडर लेंडिंग' (अंदरूनी लोगों को लोन देने) को पकड़ लिया था. आरोप है कि बैंक ने अपने ही मालिकों से जुड़ी कंपनियों को कानूनी लिमिट से ज्यादा और बिना किसी पक्की गारंटी (कोलैटरल) के बड़े-बड़े लोन बांट दिए थे.
- जब रेगुलेटर्स ने उएनो बैंक के खातों का हिसाब-किताब दुरुस्त किया, तो पता चला कि बैंक की पूंजी कानूनी रूप से जरूरी न्यूनतम लेवल के आधे से भी कम बची है.
- इसके बाद 3 नवंबर को सेंट्रल बैंक ने उएनो को अपने कंट्रोल में ले लिया और ग्राहकों के जमा पैसे व रिकवर होने लायक संपत्तियों को दूसरे बैंकों में ट्रांसफर करने का प्रोसेस शुरू किया.
- सेंट्रल बैंक के इस एक्शन से बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं और लाखों लोग अपने ही पैसे निकालने या पेमेंट करने में नाकाम हो गए.
लाखों लोगों का पैसा फंसा, सरकार ने क्या किया?
AP के अनुसार, सरकारी पेंशन और हेल्थकेयर फंड के करीब 38 करोड़ डॉलर भी उएनो बैंक में जमा और निवेश किए गए थे, जिससे इस बैंक के जरिए पेंशन पाने वाले लगभग 32,000 रिटायर्ड लोगों पर भी सीधा असर पड़ा. हालात बिगड़ते देख सरकार ने एक स्टेट गारंटी फंड के जरिए 5 वर्किंग डेज के भीतर फंसे हुए ग्राहकों को पैसा लौटाने का कानून पास किया. रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे खाताधारकों को शुरुआती पेमेंट मिलना 5 नवंबर से शुरू भी हो गया है.
बैंक के मालिकों और अधिकारियों पर क्या एक्शन हुआ?
इस पूरे घोटाले में अब क्रिमिनल एक्शन भी शुरू हो चुका है. AP की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकीलों ने बैंक के 27 अधिकारियों और उनके साथियों पर विश्वासघात और फ्रॉड की कोशिश के गंभीर आरोप लगाए हैं. कोर्ट ने बैंक के फाउंडर मिगुएल वाज्क्वेज और प्रेसिडेंट जुआन मैनुअल गुस्टाले समेत 6 बड़े अधिकारियों को ट्रायल पूरा होने तक जेल भेजने का आदेश दिया है, जबकि दो अन्य लोगों को हाउस अरेस्ट (नजरबंद) किया गया है.
राष्ट्रपति पेना का बैंक से क्या कनेक्शन था?
यह बैंकिंग संकट इसलिए भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया, क्योंकि राष्ट्रपति सैंटियागो पेना के ग्रुपो वाज्क्वेज से पुराने रिश्ते रहे हैं. AP के मुताबिक, पेना खुद एक इकोनॉमिस्ट और पूर्व वित्त मंत्री हैं, जो पहले IMF में भी काम कर चुके हैं और अगस्त 2023 में पराग्वे के राष्ट्रपति बने थे.
रॉयटर्स और AP की रिपोर्ट्स की मानें तो पेना के पास पहले ग्रुपो वाज्क्वेज में हिस्सेदारी भी थी. हालांकि, राष्ट्रपति पेना का कहना है कि उन्होंने मार्च 2025 में ही अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी और उन्होंने बैंक में किसी भी तरह के सीधे निवेश से साफ इनकार किया है.
इस मामले में एक और विवादित कड़ी कार्लोस कार्वालो से जुड़ी है. कार्वालो पहले 'फाइनेंशिएरा उएनो' के हेड थे, लेकिन बाद में राष्ट्रपति पेना ने उन्हें पराग्वे के सेंट्रल बैंक का चीफ बना दिया था. उएनो बैंक की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोपों और भारी आलोचना के बाद, कार्वालो ने 3 नवंबर को राष्ट्रपति के कहने पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
सड़कों पर उतरे लोग, क्या खतरे में है राष्ट्रपति की कुर्सी?
रॉयटर्स के मुताबिक, बैंक डूबने के बाद राजधानी असुनसियन की सड़कों पर जमाकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा. अपने फंसे हुए पैसे वापस पाने के लिए लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए, जिनमें रिटायर्ड लोग, मजदूर और खुद बैंक के कर्मचारी भी शामिल थे.
दूसरी तरफ, देश का सियासी पारा भी चढ़ गया है. 4 नवंबर को विपक्षी सांसदों ने राष्ट्रपति पेना के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश कर दिया, जिसे पूर्व राष्ट्रपति और कोलोराडो पार्टी के दिग्गज नेता होरासियो कार्टेस का भी सपोर्ट मिला है.
इस्तीफा नामंजूर, क्यों अड़ा है विपक्ष महाभियोग पर?
5 नवंबर को राष्ट्रपति पेना ने टीवी पर देश को संबोधित करते हुए देश में स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थानों को बचाने का हवाला देकर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया, लेकिन सांसदों ने इसे मंजूर नहीं किया. रॉयटर्स के मुताबिक, पेना की कोलोराडो पार्टी के सांसदों के वॉकआउट करने से संसद के जॉइंट सेशन का कोरम पूरा नहीं हो सका. इसके बाद निचले सदन ने 78-0 के वोट से उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही को आगे बढ़ा दिया.
AP की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी सीनेटरों का साफ तर्क था कि अगर पेना का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता, तो उन्हें आजीवन सीनेटर का दर्जा मिल जाता. इससे उन्हें किसी भी कानूनी मुकदमे से सुरक्षा (इम्युनिटी) मिल सकती थी, जबकि महाभियोग चलने पर उनसे यह खास अधिकार छिन जाएगा.
पेड्रो अलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली
बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के अनुसार, 6 नवंबर को पराग्वे की सीनेट ने सर्वसम्मति से महाभियोग चलाकर सैंटियागो पेना को राष्ट्रपति पद से हटा दिया. इसके बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली और अब वे अगस्त 2028 तक बचा हुआ कार्यकाल संभालेंगे.
पेना से क्या पूछताछ हो रही है?
पद से हटाए जाने के कुछ ही घंटों बाद पेना को पूछताछ के लिए हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया गया. जांच एजेंसियां प्रभाव के गलत इस्तेमाल, विश्वासघात और निजी फायदे के लिए सरकारी पद का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर मामलों की जांच कर रही हैं. हालांकि, पेना ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. दूसरी तरफ, AP के मुताबिक पूर्व सेंट्रल बैंक चीफ कार्लोस कार्वालो की गिरफ्तारी का भी आदेश जारी हो गया है. वहीं, नए राष्ट्रपति पेड्रो अलियाना भी बैंक से कथित संबंधों को लेकर जांच के दायरे में हैं, हालांकि उन्होंने भी किसी तरह की गड़बड़ी से साफ इनकार किया है.
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