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देश में कंगाली और भुखमरी की मार, फिर भी सिंधु जल समझौते पर Hague Court में भारत का बिल भी भर रहा पाकिस्तान

कंगाली और भुखमरी से जूझ रहे पाकिस्तान को सिंधु जल समझौते पर हेग स्थित 'स्थायी मध्यस्थता न्यायालय' (PCA) में भारत के हिस्से का कानूनी बिल भी क्यों भरना पड़ा?

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Oct 10, 2026, 11:25 AM IST | Updated: Oct 10, 2026, 11:30 AM IST
Image Credit: पाकिस्तान की आर्थिक तंगी के बीच भारत से मुकदमेबाजी पर खर्च, सिंधु जल विवाद में कितने रुपये लगा रहा इस्लामाबाद?
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच सरकार ने खर्च घटाने के लिए कई कदम उठाए हैं. सरकारी गाड़ियों के ईंधन में कटौती की गई है और नए सामान की खरीद पर रोक लगाई गई है. लेकिन दूसरी ओर, भारत के साथ सिंधु जल विवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में चल रही कार्यवाही पर पाकिस्तान बड़ी रकम खर्च कर रहा है. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान के जल संसाधन विभाग के बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा सिंधु जल से जुड़े मामलों के लिए रखा गया है. इस खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आर्थिक दबाव झेल रहे देश में सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं.

जल संसाधन विभाग के बजट का बड़ा हिस्सा मुकदमे के लिए पाकिस्तान के जल संसाधन विभाग के बजट दस्तावेजों के अनुसार, विभाग के करीब 4.24 अरब पाकिस्तानी रुपये के बजट में से लगभग 2.18 अरब रुपये 'पाकिस्तान मिशन फॉर इंडस वाटर्स' के लिए आवंटित किए गए हैं. यह रकम विभाग के कुल बजट के आधे से ज्यादा है. वहीं इसके उलट, बाढ़ नियंत्रण के लिए करीब 12 लाख डॉलर का प्रावधान होने का दावा किया गया है.

बाढ़ और जल प्रबंधन लंबे समय से चुनौती

पाकिस्तान में बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्याएं लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं. ऐसे में मुकदमेबाजी पर होने वाले खर्च और बाढ़ नियंत्रण के लिए उपलब्ध रकम के बीच अंतर पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि बजट में अलग-अलग मदों के लिए आवंटित राशि और वास्तविक खर्च एक ही चीज नहीं हैं.

किशनगंगा और रतले परियोजनाओं को लेकर विवाद

भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद जम्मू-कश्मीर में स्थित किशनगंगा और रतले पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ा है. पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं को लेकर हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत में आपत्ति दर्ज कराई है. भारत इस मध्यस्थता प्रक्रिया को स्वीकार नहीं करता और इसमें हिस्सा नहीं लेता. पाकिस्तान की ओर से मामले की पैरवी जारी रखने के कारण मुकदमे के खर्च का मुद्दा भी चर्चा में है.

पाकिस्तान ने कोर्ट प्रोसीडिंग के लिए 50 करोड़ रुपए रखे

इन डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अदालत की कार्यवाही के लिए करीब 50 करोड़ रुपये जमा किए हैं. इसमें भारत के हिस्से से जुड़ी फीस भी शामिल होने का दावा किया गया है. इसके अलावा, न्यूट्रल एक्सपर्ट की कार्यवाही पर पाकिस्तान के 19.4 लाख डॉलर खर्च होने की बात कही गई है. भारत की गैरमौजूदगी में इस प्रक्रिया पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठते रहे हैं. हालांकि, मुकदमे की कुल लागत और अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए भुगतान का पूरा आकलन करने के लिए आधिकारिक वित्तीय विवरण जरूरी हैं.

विदेशी वकीलों की फीस भी बड़ा खर्च

इस विवाद में पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ वकीलों और तकनीकी सलाहकारों की मदद ली जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें लंदन की Twenty Essex और 3 Verulam Buildings जैसी कानूनी संस्थाओं से जुड़े वकील शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के मामलों में अनुभवी वकीलों की फीस काफी अधिक हो सकती है. लेकिन पाकिस्तान ने इस मुकदमे में वकीलों और सलाहकारों पर अब तक कुल कितनी रकम खर्च की है, इसका स्पष्ट ब्योरा उपलब्ध नहीं है.

पाकिस्तान में घटाए गए थे सरकारी खर्च

पाकिस्तान सरकार ने 17 सितंबर को खर्च कम करने के लिए नए उपायों की घोषणा की थी. इनमें सरकारी गाड़ियों के ईंधन में 50 प्रतिशत तक कटौती, नई गाड़ियों और सामान की खरीद पर रोक, मंत्रियों और अधिकारियों के विदेश दौरों पर पाबंदी तथा सरकारी दावतों पर नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं. सरकार ने विकास परियोजनाओं के बजट में कटौती भी की है. इन उपायों का उद्देश्य सरकारी खर्च कम करना है. ऐसे में सिंधु जल विवाद से जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर होने वाला खर्च सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर बहस का विषय बन गया है.

पाकिस्तान के जल संकट में प्रबंधन की भूमिका

पाकिस्तान में पानी की कमी और बाढ़ दोनों बड़ी समस्याएं हैं. इन चुनौतियों के पीछे जल भंडारण, सिंचाई व्यवस्था, बढ़ती मांग और पानी के प्रबंधन से जुड़े कई कारण हैं. देश के बांधों की भंडारण क्षमता में कमी को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है. हालांकि, पाकिस्तान के जल संकट को केवल भारत के साथ विवाद या केवल घरेलू कुप्रबंधन से जोड़कर देखना सही नहीं होगा. इसके लिए जल भंडारण के आंकड़ों, बांधों की मौजूदा क्षमता और पानी की मांग से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों का अध्ययन जरूरी है.

सिंधु जल समझौते पर विवाद के बाद बढ़ा तनाव

2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने का फैसला किया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद और गहरा गया. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाना जारी रखा है, जबकि भारत मध्यस्थता की मौजूदा प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ है. दिए गए विवरण के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को स्थायी मध्यस्थता अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा था कि मुकदमे के खर्च का फैसला अंतिम निर्णय के समय किया जाएगा. इसका मतलब है कि खर्च के बंटवारे पर अंतिम स्थिति आने तक विवाद जारी रह सकता है.

पाकिस्तान के लिए यह मामला केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि भारत के साथ जल बंटवारे से जुड़े व्यापक विवाद का हिस्सा है. वहीं, देश के आर्थिक हालात को देखते हुए इस कार्यवाही पर होने वाले खर्च और उसके नतीजों को लेकर सवाल बने हुए हैं.

यह भी पढ़ेंः 'ईस्टर संडे बम धमाका' मामले में घिरे पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे, गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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