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कर्ज के दलदल में धंसा पाकिस्तान: कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में हो रहा खत्म, 135 अरब डॉलर के पार पहुंचा लोन

पाकिस्तान कर्ज के ऐसे दलदल में फंसता जा रहा है, जिससे बाहर निकल पाना उसके लिए शायद ही आसान होगा. वर्ष 2025 तक उस पर विदेशी कर्ज बढ़कर 135 अरब डॉलर हो गया, जो कि वर्ष 2015 में महज 68 अरब डॉलर था.

Written By Devinder Kumar
Published: Nov 06, 2026, 04:46 PM IST | Updated: Nov 06, 2026, 04:50 PM IST
Image Credit: विदेशी कर्ज के गहरे दलदल में फंस गया है पाकिस्तान (प्रतीकात्मक फोटो)
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कर्ज के जंजाल में बुरी तर फंस चुके पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का बाहरी कर्ज पिछले 10 साल में लगभग 135.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इस कर्ज में सबसे बड़े हिस्सेदारी चीन की है. अहम बात ये है कि पाकिस्तान के पास इस कर्ज को चुकाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है. पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने के पाकिस्तान के हुक्मरान नया कर्ज लेते हैं, जिससे कर्ज का यह दुष्चक्र लगातार बढ़ता जा रहा है.

पाकिस्तान पर 135.107 अरब डॉलर का कर्ज

पाकिस्तानी न्यूजपेपर 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 में पाकिस्तान का बाहरी कर्ज 68.673 अरब डॉलर था. इसके बाद 10 साल में यह बढ़कर वर्ष 2025 में 135.107 अरब डॉलर हो गया. अगर व्यक्तिगत ऋणदाताओं की बात करें तो पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा बकाया चीन का है. वर्ष 2025 तक उसका पाकिस्तान पर 22.4 अरब डॉलर का बकाया था. इसके बाद विश्व बैंक का नंबर आता है, जिसके 19.2 अरब डॉलर बकाया हैं. पाकिस्तान ने एशियाई विकास बैंक (ADB) से भी 16.83 अरब डॉलर का कर्ज ले रखा है. इनके अलावा, निजी लेनदारों से भी पाकिस्तान ने 7.8 अरब डॉलर का लोन ले रखा है.

कर्ज की वजह से पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसके चलते पाकिस्तान की कुल कमाई (GNI) के मुकाबले उसके कर्ज का अनुपात 26.7% से बढ़कर 29.4% हो गया है. दूसरे शब्दों में कहें तो देश की अर्थव्यवस्था के मुकाबले उस पर कर्ज का बोझ काफी तेजी से बढ़ रहा है.

ऊंची ब्याज दरों ने निकाला पाकिस्तान का दिवाला

हालांकि, पाकिस्तान अकेला ऐसा देश नहीं है,जो कर्ज के जाल में फंसा हुआ है. वर्ष 2025 में दुनिया के गरीब और विकासशील देशों का कुल बाहरी कर्ज 5.5% बढ़कर 9.4 ट्रिलियन डॉलर हो गया. कमजोर अमेरिकी डॉलर और प्राइवेट निवेशकों की वजह से इन देशों को कर्ज मिलना तो आसान हुआ, लेकिन इसकी कीमत उन्हें बहुत भारी पड़ी है.

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खासकर सबसे गरीब देशों को इतिहास की सबसे ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ रहा है. ऐसा करने उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में जा रहा है. इसके चलते वे कर्ज के ऐसे गहरे दलदल में फंस गए हैं, जिससे बाहर निकलने का रास्ता उन्हें सूझ नहीं रहा है. पाकिस्तान भी समस्या से अछूता नहीं है. वहां के हालात दिनोंदिन इतने खराब होते जा रहे हैं कि अब उसे कर्ज देने वाली संस्थाएं भी नया लोन देने में ठिठकने लगी हैं.

लगातार बढ़ता जा रहा है कर्ज का भार

हालांकि, उसकी गुहार के बाद वर्ष 2025 में उसे कर्ज भुगतान में थोड़ी राहत मिली. चीन ने अपने 2.3 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने की समयावधि (मैच्योरिटी) आगे बढ़ा दी. जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 2.3 अरब डॉलर की नई वित्तीय मदद दी. लेकिन इससे भी उसकी समस्या कम होती नजर नहीं आ रही है. असल में उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा लिए गए कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाता है. इसलिए वह चाहकर भी मूलधन नहीं चुका पा रहा है. जिसके चलते उस पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है.
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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