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भारत से बैर पड़ा महंगा, पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का झटका! अब जमकर आंसू बहा रहा 'जिन्नालैंड'

भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा आतंकी हमले की घटना के बाद से ही कारोबार बंद है. भारत-पाक बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा है कि इससे पाकिस्तान को 4000 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है.

भारत से बैर पड़ा महंगा, पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का झटका! अब जमकर आंसू बहा रहा 'जिन्नालैंड'
Image Credit: पाकिस्तान को लगा जोर का झटका.

पुलवामा आतंकी हमले के बाद बढ़े तनाव के कारण भारत के साथ व्यापार बंद होने से पाकिस्तान को लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है. यह जानकारी सोमवार को एक बिजनेस एडवोकेसी ग्रुप के प्रमुख ने दी है.

पाक-भारत बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन नूर मुहम्मद कसूरी ने दोनों पड़ोसी देशों से व्यापारिक संबंध फिर से बहाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि इससे दोनों तरफ के व्यवसायों को फायदा होगा, और निवेश, पर्यटन के अलावा क्षेत्रीय सहयोग के अवसर पैदा होंगे.

भारत से मिलता था कच्चा माल

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल उद्योग भारत से मिलने वाले कच्चे माल पर निर्भर था. अगर भारत से आयात फिर शुरू हो जाए, तो इससे सालाना दो से तीन अरब अमेरिकी डॉलर की बचत हो सकती है.

उन्होंने कहा कि इस बीच, घरेलू स्तर पर कपास का उत्पादन घटने से टेक्सटाइल सेक्टर को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ा. टेक्सटाइल मिलों को ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका से कपास मंगाना पड़ा, जिससे लगभग पांच अरब अमेरिकी डॉलर का एक्स्ट्रा खर्च आया.

अब दूर-दराज से करना पड़ रहा इंपोर्ट

कसूरी ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में भारत की भारी उत्पादन क्षमता होने के बावजूद, पाकिस्तान चीनी, खाद, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और स्टील, सब्जियां और भारी मशीनरी जैसी चीजें दूर-दराज के बाजारों से इंपोर्ट कर रहा है. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार फिर से शुरू होने से परिवहन लागत कम और समय पर सप्लाई तय हो सकती है. उन्होंने बताया कि भारतीय तेल रिफाइनरियां भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के करीब हैं, जिससे वहां से पेट्रोलियम का आयात सस्ता और तेज हो सकता है. 

'पूरी इकोनॉमी पर पड़ रहा बुरा असर'

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय कृषि और औद्योगिक उत्पादों तक पहुंच मिलने से पाकिस्तानी व्यवसायों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम करने में मदद मिल सकती है। कपास की खेती के तहत घटते क्षेत्र पर चिंता जताते हुए, कसूरी ने कहा कि पारंपरिक कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसान अब गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका बुरा असर देश के कपड़ा उद्योग और पूरी इकोनॉमी पर पड़ रहा है.

उन्होंने घरेलू कपास उत्पादन को फिर से बहाल करने के लिए बेहतर कृषि नीतियों की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि व्यापार बहाल होने से दोनों तरफ के व्यवसायों को फायदा होगा और निवेश, पर्यटन के अलावा क्षेत्रीय सहयोग के अवसर पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ज्यादा भारतीय पर्यटक भी आ सकते हैं, खासकर उन लोगों को जो धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अपने पूर्वजों के घरों और गांवों को देखने में दिलचस्पी रखते हैं. क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए, कसूरी ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की तरफ से दी गई वित्तीय सहायता का उदाहरण दिया, जो यह दिखाता है कि कैसे पड़ोसी देश मुश्किल समय में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं.

बातचीत से सुलझाएं मुद्दा

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक मतभेदों को दोनों देशों के बीच आर्थिक अवसरों की तलाश करने में बाधा नहीं बनना चाहिए, और कहा कि लंबित विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है. उन्होंने कहा,'पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध हैं, जो बेहतर रिश्तों की नींव बन सकते हैं.'

 

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About the Author

Rachit Kumar

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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