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मुनीर की समुद्री साजिश: क्या है चरना द्वीप, जहां आतंकी बन रहे गोताखोर, क्या फिर समंदर से आएंगे दहशतगर्द?

पाकिस्तान की नापाक साजिशें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. लश्कर-ए-तैयबा अब 26/11 जैसा हमला करने की प्लानिंग कर रहा है. इसके लिए आतंकियों को स्कूबा डाइविंग समेत अन्य तरह की ट्रेनिंग दी जा रही हैं.

Written By Rachit Kumar
Published: Nov 06, 2026, 12:13 PM IST | Updated: Nov 06, 2026, 12:14 PM IST
Image Credit: हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान.
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पाकिस्तान एक बार फिर 26/11 जैसा हमला करने की योजना बना रहा है. कराची के पास चरना द्वीप से जुड़ा बड़ा दावा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों को यहां समुद्री और कमांडो ट्रेनिंग दी जा रही है. पाकिस्तानी नौसेना के कराची पोर्ट के करीब होने के साथ-साथ यहां पर्यटकों की आवाजाही भी रहती है. दावा है कि इसी की आड़ में ट्रेनिंग को छिपाया जा सकता है. चरना द्वीप बलूचिस्तान और सिंध प्रांत की सीमा पर कराची के मुबारक गांव से लगभग 6 से 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

पथरीले और दुर्गम इलाके में आतंकियों को स्कूबा डाइविंग और कॉम्बैट स्विमिंग की ट्रेनिंग दिए जाने की बात कही गई है. यानी रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी समुद्र के रास्ते ऑपरेशन करने की तैयारी चल रही है.

लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की खास समुद्री इकाई, जिसे खुफिया एजेंसियां ​​अक्सर दावा मरीन विंग या सदा-ए-हुर्रियत कहती हैं, ने LAC के पार पारंपरिक जमीनी घुसपैठ से आगे बढ़कर अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की है. दहशतगर्दों को स्कूबा डाइविंग और कॉम्बैट स्विमिंग में ट्रेनिंग देने के पीछे कई रणनीतिक मकसद हैं.

क्या है पाकिस्तान की साजिश?

पानी के नीचे चलने-फिरने की ट्रेनिंग मिलने से ये आतंकी तटीय गश्त और सीमावर्ती रडार नेटवर्क से बचकर, बिना पकड़े गए घुसपैठ कर सकते हैं. स्कूबा ट्रेनिंग की मदद से, ये लोग पश्चिमी भारतीय बंदरगाहों (जैसे मुंबई, गुजरात या कोच्चि) के आसपास मौजूद नौसैनिक जहाजों, व्यापारिक जहाजों, ऑफशोर ऑयल रिग या बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर 'लिम्पेट माइन्स' (चिपकने वाले विस्फोटक) या अन्य विस्फोटक लगा सकते हैं. दहशतगर्द पानी के नीचे सुरक्षा घेरों को तोड़कर, जमीन के बजाय समुद्र की तरफ से अहम तटीय ठिकानों (जैसे नौसैनिक अड्डे, शिपयार्ड या तटीय इलेक्ट्रिसिटी प्लांट) तक पहुंच सकते हैं.

चरना आइलैंड ही क्यों चुना?

सिंधु डेल्टा के आसपास के उथले और कीचड़ वाले तटीय इलाकों के विपरीत,चरना द्वीप के आसपास के पानी में कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) हैं. यहां पानी के नीचे काफी दूर तक देखा जा सकता है. यहां का गहरा पानी 'ओपन-वाटर स्कूबा डाइविंग' के लिए बहुत मुफीद है. यह द्वीप कई प्रमुख नेवी बुनियादी ढांचों के करीब है, जिनमें पाकिस्तानी नौसेना के ठिकाने, कराची का तट और अरब सागर के रणनीतिक समुद्री मार्ग शामिल हैं.

चरना द्वीप आम लोगों के बीच स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और वॉटर स्पोर्ट्स के लिए एक लोकप्रिय जगह है. ऐसी जगहों पर या उनके आस-पास गतिविधियां चलाने से, सीक्रेट ट्रेनिंग को छिपाना आसान हो जाता है. इसमें मिलिट्री लेवल की कॉम्बैट स्विमिंग की प्रैक्टिस भी आम समुद्री गतिविधियों के बीच छिप जाती है.

अरब सागर में सतह पर चलने वाले जहाजों की निगरानी बढ़ने के बाद, आतंकवादी समूहों ने पानी के नीचे से हमले करने के लिए अपने आतंकियों को कॉम्बैट स्विमर और गोताखोर के रूप में ट्रेनिंग देने की कोशिशें तेज कर दी हैं.

इससे पहले 2008 में, मुंबई हमलों के दौरान भी लश्कर-ए-तैयबा ने अपने आतंकियों को मंगला बांध में ट्रेनिंग दी थी.

 

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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