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पाकिस्तान में इलाज के नाम पर बच्चों को बांट दिया HIV! 6 की मौत और दर्जनों संक्रमित होने पर मचा कोहराम

एक छोटी सी लापरवाही बच्चों की जिंदगी कैसे बर्बाद कर सकती है, इसका खौफनाक उदाहरण पाकिस्तान से सामने आया है. कराची में दर्जनों बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला..

Written By Bhoopendra Rai
Published: Sep 25, 2026, 08:30 PM IST | Updated: Sep 25, 2026, 08:39 PM IST
Image Credit: पाकिस्तान के अस्पतालों में इलाज के नाम पर बंटा मौत का सामान (फोटो सोर्स NPR)
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पाकिस्तान के कराची से बेहद डराने वाली खबर आई है, जहां इलाज कराने पहुंचे मासूम बच्चों को जिंदगी की जगह मौत का सामान थमा दिया गया. कराची में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की लापरवाही के चलते दर्जनों बेकसूर बच्चे एचआईवी (HIV) की चपेट में आ गए हैं. 6 मासूमों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया है. 

अमेरिकी मीडिया संस्थान एनपीआर (NPR) के अनुसार, हुआ ये कि पाकिस्तान में दर्जनों ऐसे माता-पिता अपने बच्चों को सामान्य इलाज के लिए अस्पताल ले गए थे, लेकिन अब उनके बच्चे एचआईवी (HIV) पॉजिटिव पाए गए हैं. सामान्य बीमारी का इलाज कराने पहुंचे बच्चों को पुरानी सीरिंज और गंदे मेडिकल उपकरणों के जरिए लाइलाज बीमारी बांटने की इस खौफनाक करतूत के बाद पूरे मुल्क में हाहाकार मच गया है.

पीड़ित माता-पिता का सीधा आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने इंजेक्शन और ड्रिप चढ़ाने के दौरान पुरानी सीरिंज और सुइयों का दोबारा इस्तेमाल किया, इसी वजह से ऐसा हुआ.

बच्चों में एचआईवी को समझना कितना मुश्किल?

बच्चों में होने वाले HIV को समझना कितना मुश्किल है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है? इसे लेकर सीके बिड़ला अस्पताल (दिल्ली) के सीनियर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल जैन डिटेल से समझाया है.

डॉ. विशाल जैन के अनुसार, बच्चों में एचआईवी संक्रमण लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के छिपा रह सकता है. कोई साफ संकेत नहीं दिखता, इसलिए शुरुआती दिनों में इसका पता लगाना बेहद मुश्किल होता है. उन्होंने बताया कि नवजात और छोटे बच्चे, जो आमतौर पर जन्म के वक्त इस वायरस का शिकार बनते हैं, उनमें यह बड़ों के मुकाबले उनके इम्यून सिस्टम को कहीं ज्यादा तेजी से कमजोर कर देता है.

डॉ. जैन कहते हैं कि 'डब्ल्यूएचओ (WHO) की गाइडलाइंस के मुताबिक, जो नवजात बच्चे एचआईवी के खतरे के दायरे में आते हैं, उनकी जिंदगी के शुरुआती हफ्तों में ही वायरोलॉजिकल जांच होनी चाहिए. ऐसा इसलिए जरूरी है, क्योंकि 18 महीने से छोटे बच्चों में बीमारी का पता लगाने के लिए सामान्य सेरोलॉजिकल टेस्ट काम नहीं करते.'

किन शुरुआती लक्षणों पर माता-पिता को ध्यान देना चाहिए?

डॉ. विशाल जैन ने उन आ संकेतों के बारे में बताया है, जिन पर माता-पिता और डॉक्टरों को खासतौर पर नजर रखनी चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा अगर बच्चे में इनमें से कोई लक्षण दिख रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसे एचआईवी ही है.

बच्चों की आम बीमारियों में भी ऐसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं

1. बच्चे को बार-बार या लगातार कोई न कोई इन्फेक्शन होना

2. बच्चे का वजन न बढ़ना और शारीरिक विकास (ग्रोथ) रुक जाना

3. लंबे समय तक दस्त (डायरिया) या बुखार का बने रहना

4. बार-बार निमोनिया होना या सांस से जुड़ी तकलीफें होना

5. गले या कांख की ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में सूजन और मुंह में छाले पड़ना

उम्र और संक्रमण का जरिया, क्या ज्यादा मायने रखता है?

डॉ. विशाल जैन कहते हैं कि बच्चों में होने वाला एचआईवी बड़ों के मुकाबले इस बात पर काफी निर्भर करता है कि संक्रमण किस उम्र में हुआ और वह बच्चे के शरीर में कैसे पहुंचा. उन्होंने आसान शब्दों में समझाया कि 'यह वायरस प्रेग्नेंसी, डिलीवरी या फिर मां के दूध के जरिए बच्चे में पहुंच सकता है. इसके अलावा, बिना जांचा हुआ खून चढ़ाने या फिर ठीक से साफ न किए गए मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल से भी बच्चा इसका शिकार हो सकता है, जिन बच्चों में जन्म के आसपास यह इन्फेक्शन पहुंचता है, अगर उन्हें समय पर सही इलाज न मिले, तो यह बीमारी बहुत तेजी से खतरनाक रूप ले लेती है.'

बचाव के क्या उपाय हैं?

बचाव को लेकर डॉ. जैन कहते हैं कि माता-पिता को यह समझना होगा कि बच्चे के इलाज के दौरान हर कदम पर पूरी सावधानी बरती जाए.  डॉ. जैन ने बताया 'हर बार इंजेक्शन लगाते वक्त बिल्कुल नई और सीलबंद सीरिंज और सुई का ही इस्तेमाल होना चाहिए. बच्चे को चढ़ाने से पहले खून की पूरी जांच जरूरी है और इलाज में काम आने वाले सभी मेडिकल औजारों को अच्छी तरह से कीटाणुरहित (स्टरलाइज) किया जाना चाहिए.' उन्होंने यह भी सलाह दी कि माता-पिता को डॉक्टर या नर्स से यह पूछने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाना चाहिए कि जो सीरिंज या उपकरण इस्तेमाल हो रहे हैं, वे नए और साफ हैं या नहीं.'

प्यार और सही देखभाल जरूरी

डॉ. विशाल जैन ने एक खास सलाह भी दी. उनका मानना है कि बच्चों में एचआईवी को लेकर मन में कोई भी गलत डर नहीं पालना चाहिए.एचआईवी बच्चे को गले लगाने, साथ खेलने, साथ बैठकर खाना खाने या आम घरेलू मेलजोल से बिल्कुल नहीं फैलता. अगर कोई बच्चा एचआईवी पॉजिटिव है, तो उसे दूरी बनाने या अलग-थलग करने के बजाय अच्छे इलाज, थेरेपी और ढेर सारे प्यार की जरूरत होती है. इलाज से हमेशा बेहतर बचाव होता है और यह बात एचआईवी के मामले में सबसे ज्यादा सच साबित होती है.'

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पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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