क्या पाकिस्तानी ब्यूरोकेसी में खलबली मची हुई है? क्या सीनियर अफसरों ने पाकिस्तान छोड़कर विदेशों में बसने की प्लानिंग कर रखी है. यह सवाल उठाया है पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी और पाकिस्तान एक्सपर्ट तिलक देवशेर ने. आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह बात कहां से उठी. दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि सरकार में काम कर रहे कई अधिकारियों ने विदेश में बसने की योजना बना ली है.
आसिफ के इस बयान पर देवशेर ने एक्स पर लिखा कि यह चलन पाकिस्तान को लेकर सीनियर अफसरों की वफादारी पर सवाल खड़े करता है. देवशेर ने लिखा, 'पाकिस्तान में कुछ बहुत गलत हो रहा है.' उन्होंने आगे लिखा,'काफी बड़ी तादाद और नौकरी के दौरान ही'- इन बातों पर ध्यान दें. ब्यूरोक्रेट्स के विदेश जाने के लिए पुर्तगाल नई पसंदीदा जगह बन गया है.'
यह पूछते हुए कि क्या विदेश जाने की ये प्लानिंग पाकिस्तान के फ्यूचर को लेकर अधिकारियों की चिंता को दिखाती हैं, देवशेर ने लिखा, 'चूंकि आला अफसरों को जमीनी हकीकत की अच्छी खबर होती है, तो क्या यह वैसा ही मामला है जैसे डूबते जहाज से चूहे भाग जाते हैं? बस पूछ रहा हूं.'
हालांकि, आसिफ ने उन अधिकारियों के नाम नहीं बताए, जिन पर यह आरोप है, और न ही अपने दावों को साबित करने के लिए कोई कागजी सबूत दिए.
अपनी पोस्ट में आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान की नौकरशाही में कई काबिल और ईमानदार अधिकारी भी हैं. लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई अधिकारियों ने कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों को अपना परमानेंट घर बना लिया है.
Something is seriously wrong in Pakistan. Def Min Khawaja Asif has revealed that a significant number of govt officers had prepared for their relocation abroad while still serving. Note ‘significant number’ & ‘while still serving.’ Portugal is the new favourite destination for the bureaucratic exodus. Since bureaucrats have their ear to the ground, is it a case of rats deserting a sinking ship? Just asking. https://t.co/rCxcpXy4se
— Tilak Devasher (@tilakdevasher1) October 20, 2026
उन्होंने दावा किया कि कुछ अफसरों ने पाकिस्तान सरकार के लिए काम करते हुए ही विदेश जाने की फुलप्रूफ प्लानिंग कर ली है, जिससे देश और अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों को लेकर उनकी वफादारी पर सवाल उठते हैं.
उन्होंने दावा किया कि परमानेंट रेजिडेंसी का बंदोबस्त कराने वाला एक शख्स प्रभावशाली नौकरशाहों से बड़ी रकम वसूलने के बाद वहां से भाग गया.
यह सवाल उठाते हुए कि क्या सीनियर अफसर ऊंचे पदों और फैसिलिटी का लुत्फ लेने के बावजूद पाकिस्तान को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं, आसिफ ने पूछा, 'क्या यह सब शक-ओ-शुबहा से परे है, या वे बस यहां कुछ समय के लिए रुके हुए हैं?'
पाकिस्तानी नौकरशाहों के पुर्तगाल में संपत्ति खरीदने के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं. अगस्त 2025 में, पाकिस्तान की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) ने इस मामले को उठाया और जानकारी लेने के लिए संबंधित सरकारी विभागों और एजेंसियों को तलब करने का फैसला किया.
पाकिस्तानी अखबार द डॉन की 13 अगस्त 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, कमिटी ने गृह मंत्रालय, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान, फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और अन्य अधिकारियों से जानकारी मांगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन नौकरशाहों ने पुर्तगाल में संपत्ति खरीदी है.
हालांकि, अगस्त 2025 में द न्यूज इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में, पाकिस्तान के एस्टेब्लिशमेंट डिवीजन और नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो के सूत्रों ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी सबूत की जानकारी नहीं है जो आसिफ के उस बड़े दावे की पुष्टि करे, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के आधे से ज्यादा नौकरशाहों ने पुर्तगाल में संपत्ति खरीदी है या वे विदेशी नागरिकता लेने की कोशिश कर रहे हैं.
इससे पहले की जांच में दुबई में संपत्ति रखने वालों में पाकिस्तानी अधिकारी भी शामिल पाए गए थे. इसके अलावा, पाकिस्तान के राजनीतिक और प्रशासनिक जमात के लोगों के विदेशों में संपत्ति रखने का मामला खोजी रिपोर्टिंग के जरिए चर्चा में आया है.
मई 2024 में, 'ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट' (OCCRP) ने 'दुबई अनलॉक्ड' नाम से अपनी एक जांच रिपोर्ट पब्लिश की, जो लीक हुए संपत्ति रिकॉर्ड पर आधारित थी.
डॉन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होंने सरकारी पदों पर बैठे लोगों, चुने गए राजनेताओं, सैन्य कर्मियों और अन्य राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े डेटा की जांच की. पत्रकारों ने दुबई लैंड डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड से मिलान करके यह पुष्टि की कि संपत्ति किसके नाम पर है.
14 मई 2024 को 'जियो न्यूज' की एक अलग रिपोर्ट में बताया गया कि रिकॉर्ड में ऐसी संपत्तियां मिली हैं, जिनका संबंध पाकिस्तान के रिटायर्ड मिलिट्री अफसरों, उनके परिवारों, बैंकरों और नौकरशाहों से है. इनमें पुलिस के एक मौजूदा इंस्पेक्टर जनरल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.
हालांकि, विदेशों में संपत्ति होना अपने आप में भ्रष्टाचार का सबूत नहीं है. दुबई से जुड़ी इस जांच से यह भी साबित नहीं होता कि संबंधित लोग हमेशा के लिए पाकिस्तान छोड़कर जाना चाहते थे. साथ ही, यह रिपोर्ट पुर्तगाल को लेकर आसिफ के दावों की भी पुष्टि नहीं करती है.