प्रशांत महासागर में उबाल, अल नीनो का वार, तूफानों की भरमार; एशिया पर मंडरा रहा खौफनाक खतरा
पिछले कुछ वक्त से लगातार तूफानों की तीव्रता में तेजी देखी जा रही है. फिलीपींस, ताइवान, चीन, जापान में तो हालात खतरनाक हो गए हैं. इतना ही नहीं, महासागर का तापमान भी सामान्य से काफी ज्यादा हो चुका है.
फिलीपींस, ताइवान, चीन और जापान के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भीषण मौसम एक आम बात है. लेकिन, पिछले कुछ महीनों में तूफानों का एक बेहद खतरनाक दौर देखने को मिला है. इन तूफानों की तीव्रता और उनके अनिश्चित रास्ते ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. अल नीनो की वजह से और भी ताकतवर हुए इन तूफानों ने पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में दर्जनों लोगों की जान ले ली है, हवाई यात्राओं पर ब्रेक लगा दिया है, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ फसलों को तबाह कर दिया है.
बीबीसी के अनुसार, अक्टूबर में ताइवान के उत्तर-पूर्वी तट के पास एक बहुत बड़ा तूफान पहुंचने से वहां जनजीवन लगभग ठप हो गया था. 2.3 करोड़ की आबादी वाले इस द्वीप को पूरी तरह अपनी चपेट में लेने वाले इस तूफान में हवा की गति 295 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई थी. यह 'कैटेगरी 5' के तूफान के बराबर है. यह तूफान इतना ताकतवर था कि घर ढहा सकता था और खतरनाक लहरें पैदा कर सकता था.
लेकिन, यह तूफान ताइवान के तट से टकराया नहीं, बल्कि द्वीप के काफी करीब से गुजर गया, जिससे भारी बारिश हुई. सीधे न टकराने के बावजूद, इसने पूरे इलाके में भारी अव्यवस्था पैदा कर दी. हांगकांग, ताइवान और जापान में सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं. फिलीपींस के बटानेस द्वीप समूह में कोस्टल हाईवे को बंद करना पड़ा क्योंकि समुद्र की विशाल लहरें तट से टकरा रही थीं. वहीं, जापान के दक्षिणी ओकिनावा द्वीप समूह में लगभग 15,000 घरों की बिजली गुल हो गई.
लगातार आते शक्तिशाली तूफान
'अल नीनो' एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो पूर्वी प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने और एटमॉस्फेरिक सर्कुलेशन में बदलाव से जुड़ी है. ये स्थितियां दुनिया भर के मौसम के पैटर्न पर असर डाल सकती हैं, जिससे भीषण मौसमी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है.
यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल में होती है और लगभग एक साल तक चल सकती है. वर्तमान दौर, जिसे यूके मेट ऑफिस ने हाल के समय का सबसे शक्तिशाली दौर बताया है, फरवरी या मार्च तक जारी रहने की उम्मीद है.
इस क्षेत्र में हाल के महीनों में पहले ही कई बड़े तूफान आ चुके हैं. जून में, जापान के पूर्वी तट की ओर एक साथ 'टाइफून मेखला' और 'तूफान हिगोस' बढ़ रहे थे, जिसके चलते लगभग दस लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का आदेश दिया गया था.
प्रशांत महासागर में बढ़ रही तूफानों की तीव्रता
एक मौसम के दौरान ट्रॉपिकल साइक्लोन की कुल तीव्रता को मापने वाले 'एक्युमुलेटेड साइक्लोन एनर्जी' (ACE) इंडेक्स के मुताबिक, प्रशांत महासागर में काफी एनर्जी जमा हो गई है. इसका कारण 'अल नीनो' से जुड़ा रिकॉर्ड-तोड़ तापमान है. इस साल दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के लिए ACE रीडिंग, पिछले 30 साल के औसत से लगभग दोगुनी होने का अनुमान है.
'अल नीनो' के कारण हवा के पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिसका असर इस बात पर भी पड़ रहा है कि टाइफून कहां बनते हैं. अब तूफान सामान्य से कहीं ज्यादा पूर्व की ओर बन रहे हैं. समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म होने के कारण, इन तूफानों को ताकत जुटाने के लिए ज्यादा समय मिल जाता है.
फिलीपींस के राष्ट्रीय मौसम ब्यूरो में जलवायु विज्ञान की मुखिया, एना लिजा सोलिस ने प्रशांत महासागर की तुलना बुखार से तपते किसी शख्स से की है. सितंबर में मनीला में उन्होंने चेतावनी दी थी कि यहां जल्द ही गंभीर उथल-पुथल देखने को मिल सकती है.
महासागर उबल रहा है
हालात चिंताजनक बने हुए हैं. अक्टूबर में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया. जापान की मौसम एजेंसी 'अल नीनो' के पूर्वानुमान के लिए इस क्षेत्र की निगरानी करती है. 1949 में जब से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ है, तब से यह अब तक का सबसे उच्च स्तर है. इससे पहले का रिकॉर्ड 3.6 डिग्री सेल्सियस था, जो दिसंबर 1997 में दर्ज किया गया था.
चीन की जलवायु एजेंसी ने भी चेतावनी दी है कि 'अल नीनो' के कारण अगले तीन महीनों तक समुद्र का तापमान और बढ़ सकता है. वैसे तो टाइफून का मौसम आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के बीच अपने चरम पर होता है, लेकिन समुद्र के पानी का लगातार गर्म होना इस बात की चिंता पैदा कर रहा है कि बार-बार मौसम संबंधी आपात स्थितियों का सामना करने के बाद, इस क्षेत्र को और भी विनाशकारी तूफानों का सामना करना पड़ सकता है.