US में राष्ट्रपति से ही चुनाव बचाने की तैयारी! ट्रंप के डर से क्यों अलर्ट हुए अधिकारी? हो सकता है 2020 जैसा बवाल
अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनाव की हिफाजत खुद राष्ट्रपति और उनके प्रशासन से करनी पड़ रही है. 3 नवंबर को होने वाले चुनाव में इस बार काफी कुछ नया देखने को मिल सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर दावा किया जा रहा है कि वो नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव को लेकर डरे हुए हैं. ट्रंप लगातार चुनावी प्रक्रिया पर हमले कर रहे हैं, जिसका मकसद नतीजों को अमान्य ठहराना और वोटिंग में दखल देने की धमकी देना भी शामिल है. ट्रंप ऐसा एक बार पहले कर भी चुके हैं. उनकी इस तरह की टिप्पणियों को लेकर अमेरिकी चुनाव अधिकारी और चुनावों की रक्षा करने की तैयारी कर रहे हैं. ट्रंप की ये छटपटाहट इसलिए नजर आ रही है, क्योंकि मिड-टर्म चुनाव में उनकी रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कुछ खास नजर नजर नहीं आ रहा है.
ट्रंप को लेकर इस तरह की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं क्योंकि, हाल के महीनों में ट्रंप के कामों से पता चलता है कि वह मिड-टर्म चुनावों के नतीजों को खारिज करने की तैयारी कर रहे हैं. ट्रंप लगातार बिना सबूत के वोटिंग से जुड़े उपकरणों में गड़बड़ी का दावा कर रहे हैं, डाक के जरिए वोटिंग पर रोक लगाई है, वोट-गिनती मशीनों पर पाबंदी लगाने की कोशिश की है और उन वोटर्स को हटाने के संदिग्ध प्रयासों में राज्य की वोटर लिस्ट तक पहुंच बनाई है, जो उनका समर्थन नहीं कर सकते हैं.
ट्रंप ने सेना तैनात करने की दी धमकी
इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चुनाव के दिन सेना तैनात करने की भी धमकी दी है. विद्रोह अधिनियम के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा,'मैं इसका इस्तेमाल कर सकता हूं. बहुत से लोग सोचते हैं कि मुझे कभी-कभी इसका इस्तेमाल करना चाहिए.' जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह मिड-टर्म चुनावों के लिए इमरजेंसी घोषित करेंगे, तो उन्होंने यह भी कहा, 'मैं किसी भी संभावना से इनकार नहीं करता.'
वोटिंग मशीन और बैलेट पेपर्स को भी खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति की इस तरह कोशिशों को लेकर पूर्व उप गृह सुरक्षा सलाहकार कैटलिन डर्कोविच का कहना है कि ट्रंप अपने कामों की वैधता की परवाह किए बिना वोटिंग से जुड़े उपकरण या बैलेट पेपर जब्त करने की कोशिश कर सकते हैं. डर्कोविच ने आगे कहा,' चूंकि प्रशासन अदालत में सामान्य प्रक्रिया को बाधित करने की अपनी कई कोशिशों में नाकाम रहा है, इसलिए वे वोटिंग के दिनों के आखिर में विदेशी दखल के दावे का इस्तेमाल वोटिंग उपकरण जब्त करने या बैलेट पेपर जब्त करने के लिए करेंगे, चाहे ऐसा करना कानूनी रूप से उचित हो या नहीं.'
'सरकारी दखल से रक्षा की तैयारी कर रहे अफसर'
डर्कोविच के अलावा सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के टॉप डेमोक्रेट, वर्जीनिया के सीनेटर मार्क वार्नर ने भी कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि ट्रंप वोटिंग मशीनों को जब्त करने के लिए चुनाव में विदेशी दखल का दावा कर सकते हैं. वार्नर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उन्होंने व्यापारिक नेताओं, पूर्व सैन्य अधिकारियों और अनुभवी संघीय कानून प्रवर्तन अधिकारियों से अपील की है कि अगर ट्रंप नतीजों को खारिज करते हैं तो वे उनका विरोध करें. इसके अलावा यूटा की रिपब्लिकन लेफ्टिनेंट गवर्नर डीड्रे हेंडरसन ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिका में यह पहली बार है कि अधिकारी केंद्रीय दखल से वोटिंग की हिफाजत के लिए तैयारी कर रहे हैं.
धमकाने पर क्यों मजबूर हुए ट्रंप?
दरअसल 3 नवंबर को अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव होने हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में माहौल ट्रंप के खिलाफ बना हुआ है. ऐसे में उन्हें डर है कि अमेरिकी संसद में उनकी विरोधी पार्टी डेमोक्रेट सदन में बहुमत हासिल ना करले. क्योंकि, अगर ऐसा होता है तो ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे ले जाने में दिक्कतों को सामना करना पड़ेगा. अमेरिका के ताजा सर्वे में डेमोक्रेट्स को बढ़त भी दिखाई गई है. जनता और ट्रंप के बीच नाराजगी मुख्य वजह महंगाई बताई जा रही है. अमेरिका में रोजमर्रा की चीजों, ऊर्जा और आवास की लागत वोटर्स के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई है. ईरान युद्ध से जुड़े ऊर्जा संकट ने भी आर्थिक दबाव बढ़ाया है. इससे ट्रंप और उनकी पार्टी के खिलाफ नाराजगी बढ़ने का खतरा है.