नेपाल में अगले 48 घंटे भारी! उफान पर बागमती और विष्णुमती नदी, भूस्खलन से हाईवे बंद, 12 जिलों में हाई अलर्ट
नेपाल मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और मध्य नेपाल में शनिवार से बारिश थोड़ी थम सकती है, लेकिन पश्चिमी नेपाल में अगले 48 घंटे काफी जोखिम भरे रहेंगे.
नेपाल एक बार फिर चर्चा में है. पिछले दिनों वहां ग्लेशियर फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई कि सब हैरान रह गए. इस आपदा में करीब 1500 मौतें हुई हैं, जबकि हजारों लोग एक महीने बाद भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है. इस बीच लोगों की परेशानी और बढ़ चुकी है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी दबाव के असर से नेपाल में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है. पिछले 24 घंटों में पाल्पा के अर्घाले स्टेशन पर 187 मिमी से भी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है, वहीं कई पहाड़ी इलाकों में ठीक-ठाक से लेकर भारी बर्फबारी भी हुई है.
मूसलाधार बारिश की वजह से राजधानी काठमांडू की जीवनरेखा मानी जाने वाली बागमती और विष्णुमती नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते पृथ्वी और बीपी हाईवे समेत देश के मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे काठमांडू का संपर्क शेष देश से लगभग कट गया है. मौसम विभाग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का हाई अलर्ट जारी किया है.
पृथ्वी हाईवे, बीपी हाईवे और कांति लोकपथ बंद
लगातार बारिश की वजह से कई जगहों पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हुआ है, जिससे काठमांडू को बाकी देश से जोड़ने वाले सभी बड़े रास्ते बंद हो गए हैं. पृथ्वी हाईवे, बीपी हाईवे और कांति लोकपथ पर भारी मलबा और पत्थर गिरने की वजह से गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है. सड़कें जाम होने की वजह से लंबी दूरी की सैकड़ों गाड़ियां, सामान से लदे ट्रक और मुसाफिर घंटों से बीच रास्ते में ही फंसे हुए हैं.
लगातार हो रही बारिश और गिरते पत्थरों की वजह से राहत काम में दिक्कत आ रही है. आपदा प्रबंधन और पुलिस की टीमें रास्ते साफ करने में जुटी हैं. प्रशासन ने नदी किनारे और पानी भरे रास्तों पर जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. पश्चिमी और मध्य नेपाल के कई इलाकों के लिए अगले 48 घंटे काफी जोखिम भरे बताए गए हैं.
12 जिलों में बाढ़ और फ्लैश फ्लड का बड़ा खतरा
12 जिलों को 'हाई रिस्क' जोन में रखा गया है. इनमें गोर्खा, लमजुंग, कास्की, मनांग, मुस्तांग, दांग, बांके, बर्दिया, सुर्खेत, दैलेख, कैलाली और कंचनपुर शामिल हैं. इन जिलों की छोटी-बड़ी सहायक नदियों में अचानक बाढ़ आने का बहुत ज्यादा खतरा है.
नेपाल में क्यों हो रही है इतनी बारिश?
दरअसल, बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन का असर पूरे नेपाल पर पड़ रहा है. ओडिशा और छत्तीसगढ़ से होते हुए यह सिस्टम पश्चिमी और मध्य नेपाल पहुंचा है, जिसका सीधा असर नेपाल के पश्चिमी और मध्य इलाकों पर पड़ रहा है. मौसम वैज्ञानिक रोजन लामिछाने का कहना है कि अगले दो दिनों तक गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम प्रांतों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. मूसलाधार बारिश के खतरे को देखते हुए किसानों से अपील की गई है कि वे धान की कटाई जैसे खेती के काम अभी कुछ दिनों के लिए रोक दें.
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