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साल 2026 के नोबल शांति पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है. इस बार से सम्मान नवनेथम नवी पिल्लई को दिया गया है. इस साल की लिस्ट में इस पुरस्कार के कई अन्य दावेदार भी थे. पिल्लई भारतीय मूल की महिला हैं. कुछ अनुमान लगाने वालों के अनुसार, इस लिस्ट में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और सूडान की बचाव टीमें शामिल थीं. हैरान करने वाली बात है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार अपने लिए नोबल शांति पुरस्कार की मांग की थी. हालांकि, इस बार भी वह चूक गए.
दरअसल, ओस्लो की नोबेल समिति के सामने कुल 287 उम्मीदवारों की लिस्ट थी. इनमें से करीब एक चौथाई संगठन (संस्थाएं) थे. कुछ जानकारों का मानना है कि समिति हमेशा शांति बनाए रखने वाले कामों पर ध्यान देती है. जानकारों का माना है कि यह समिति दुनिया में भाईचारा बढ़ाने और शांति के लिए काम करने वाली है.
शांति पुरस्कार से सुशोभित होने वाली नवनेथम नवी पिल्लई भारतीय मूल की महिला हैं. वह भारतीय तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं. वह पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज थीं. पिल्लई एक कानून विशेषज्ञ भी हैं, जिन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर काम किया है. इसके साथ ही वह इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की जज और रवांडा के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष रहीं.
BREAKING NEWS The Norwegian Nobel Committee has decided to award the 2026 #NobelPeacePrize to Navanethem “Navi” Pillay for her efforts to promote peace and international law. #NobelPrize https://t.co/97vurspw6z
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 9, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पिछले कई महीनों से दावा करते आए हैं कि उन्होंने दुनिया के आठ युद्धों को रुकवाया है, जिसके लिए उन्हें नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए. ट्रंप ने एक दिन पहले ही नोबल शांति समित की मशां पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि इस बार भी उन्हें नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया जाएगा. ट्रंप इस बार भी चूक गए हैं.
गौरतलब है कि पिछले साल वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को इस सम्मान से सम्मानित किया गया था. मचाडो ने दक्षिण अमेरिकी देश में लोकतांत्रिक बदलाव लाने के अपने संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीता था.