अमेरिका ने फिर हमला किया तो युद्ध की सीमा बदल देगा ईरान, हिंद महासागर तक पहुंचेगा मोर्चा
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार याह्या रहीम ने वॉर्निंग दी है कि अमेरिका या इजरायल के दोबारा हमले की हालत में जंग हिंद महासागर तक पहुंच सकता है.
अमेरिका ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने की बजाए और आगे बढ़ने की खबरें आ रही हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के एक सलाहकार ने कहा है कि यह जंग हिंद महासागर तक फैल सकती है. ईरान की न्यूज एजेंसी फार्स की तर से जारी एक वीडियो में याह्या रहीम सफावी ने कहा,'जंग पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से लेकर लाल सागर तक फैल चुकी है, इसलिए यह मुमकिन है कि अगर ईरान पर और भी हमले हुए तो यद्ध जवाबी हमलों की वजह से आगे बढ़कर हिंद महासागर और शायद उससे भी आगे तक पहुंच जाएगा.'
ईरानी अधिकारियों की तरफ से पहले भी जंग का भौगोलिक दायरा बढ़ाने की चेतावनियां दी जाती रही हैं, लेकिन गुरुवार को दिए गए सफवी के बयान में हिंद महासागर का साफ तौर पर जिक्र किया गया है. यही वजह है कि इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ईरान की इस चेतावनी का सीधे असर भारत पर पड़ना लाजमी है. क्योंकि हिंद महासागर भारत के समुद्री पड़ोस का हिस्सा है और पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप से जुड़ी भारत की समुद्री व्यापारिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है.
पहले होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दुनिया के दो बेहद अहम समुद्री चेकपॉइंट जंग में झुलसे हुए हैं. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 21 सितंबर के सप्ताहांत में होर्मुज से सिर्फ 17 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि उससे पिछले हफ्ते यह तादाद 37 थी और जंग से पहले औसत करीब 125 जहाज प्रतिदिन था. बाब-अल-मंदेब में भी जहाजों की आवाजाही घटी है. जिसका असर दुनियाभर के कारोबार पड़ रहा है. ऐसे हालात में यह संघर्ष हिंद महासागर तक बढ़ता है, तो सवाल सिर्फ युद्ध का नहीं होगा, बल्कि तेल की सप्लाई, LNG की सप्लाई, कंटेनर शिपिंग, समुद्री बीमा, फ्रेट रेट, भारत की ऊर्जा सुरक्षा जैसी चिंताएं पैदा हो सकती हैं.
मार्च 2026 में हिंद महासागर में हुआ था हमला
वैसे ईरान-अमेरिका जंग की आहट हिंद महासागर तक पहुंच भी चुकी है. 4 मार्च 2026 को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास ईरानी नौसेना का फ्रिगेट IRIS Dena अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले में डूब गया था. इसमें 87 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था. IRIS Dena भारत में आयोजित MILAN-2026 नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा था और हमला श्रीलंका के पास हिंद महासागर में हुआ. हालांकि यह एक मात्र घटना थी, लेकिन अगर हमले लगातार बढ़ते हैं तो हालात ज्यादा खराब हो जाएंगे.
भारत और हिंद महासागर
भारत की भौगोलिक ऐसी है कि हिंद महासागर में कुछ भी हो तो उसको चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. क्योंकि, भारत हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से में मौजूद है. अरब सागर पश्चिम में और बंगाल की खाड़ी पूर्व में भारत को हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री नेटवर्क से जोड़ते हैं. भारत के करीब 95 फीसद व्यापार की मात्रा समुद्री रास्तों से होती है. इसके अलावा भारत हिंद महासागर का सबसे अहम तटीय देश है इसलिए यहां होने वाली बड़ी सैन्य गतिविधि या अस्थिरता भारत के आसपास के समुद्री इलाकों को सीधे प्रभावित कर सकती है.
दुनिया के लिए क्यों अहम है हिंद महासागर?
- हिंद महासार से हर साल करीब 1 लाख जहाज गुजरते हैं. ये जहाज दुनिया के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा लेकर चलते हैं.
- दुनिया के करीब 30 फीसद कंटेनर कार्गो का आवाजाही हिंद महासागर से जुड़ी हुई है.
- वैश्विक समुद्री कच्चे तेल व्यापार का करीब 42% हिंद महासागर से जुड़े रास्तों पर निर्भर बताया गया है.
- होर्मुज स्ट्रेस से 2025 की पहली छमाही में करीब 20.9 मिलियन बैरल तेल/पेट्रोलियम लिक्विड्स रोजाना गुजरे. यह हिंद महासागर से जुड़े सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है.
- होर्मुज से करीब 11.1% वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है. 2023 के आंकड़ों में कच्चे तेल के समुद्री व्यापार का हिस्सा करीब 39% था.
- बाब-अल-मंदेब से करीब 8.7% वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है.
- मलक्का स्ट्रे से 23.7% वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है. यही रास्ता हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर और पूर्वी एशिया से जोड़ता है.
- दुनिया के 80% से ज्यादा माल का व्यापार समुद्र के रास्ते होता है. इसलिए हिंद महासागर से जुड़े समुद्री रास्तों में बड़ा रुकावट वैश्विक सप्लाई चेन तक असर पहुंचा सकती है.
एक तरफ ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार हिंद महासागर तक युद्ध फैलने की चेतावनी दे रहे हैं. दूसरी तरफ, 22 सितंबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया था कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाए तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोल सकता है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया था.