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अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन से पहले सोशल मीडिया कंपनी मेटा को गंभीर आरोपों का सामना करने के लिए 14 राज्यों ने तलब किया है. इंस्टाग्राम पर मध्यावधि चुनावों के बीच चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर उन सभी की सियासी गतिविधियों को नियंत्रित करने का आरोप भी लगा है. ट्रंप के धुर विरोधियों का इंस्टाग्राम अकाउंट बंद होने के बाद कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने मेटा से जवाब मांगा है. दूसरी ओर मेटा ने इसे एल्गोरिदम की तकनीकी चूक बताकर मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है. फिलहाल ये मामला पूरे अमेरिका में तेजी से गरमाया हुआ है, जिसकी आंच कंपनी के मालिक मार्क जुकरबर्ग तक पहुंचने लगी है.
अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले कांग्रेस चुनावों से ठीक पहले मेटा को विपक्षी नेताओं और राज्य के अटॉर्नी जनरल्स के सवालों का सामना करना पड़ रहा है. मामला एंटी-ट्रंप संगठन 'नो किंग्स कोएलिशन' के इंस्टाग्राम अकाउंट को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने से जुड़ा है. इससे राजनीतिक अभिव्यक्ति और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
सोमवार को 14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स के एक समूह ने मेटा से पूछा कि 17 अक्टूबर को देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'नो किंग्स कोएलिशन' का इंस्टाग्राम अकाउंट क्यों बंद किया गया था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी ने क्या कदम उठाए हैं.
इससे पहले 22 अक्टूबर को पांच डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कंपनी की स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली के बारे में सवाल पूछे थे. उन्होंने चिंता जताई थी कि कहीं राजनीतिक संगठनों को गलती से निशाना तो नहीं बनाया जा रहा.
मेटा ने स्वीकार किया है कि अकाउंट का निलंबन एक गलती थी. कंपनी के अनुसार, अकाउंट पर अचानक बहुत ज्यादा गतिविधि होने लगी थी, जिसे उसके सिस्टम ने संदिग्ध या ऑटोमेटेड समझ लिया. 'नो किंग्स कोएलिशन' के मुताबिक, 17 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे उनका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया गया था, ठीक उस समय जब अमेरिका में प्रदर्शन चल रहे थे.
करीब 90 मिनट बाद अकाउंट फिर से सार्वजनिक रूप से दिखाई देने लगा, लेकिन उसके संचालक कई घंटों तक लॉग-इन नहीं कर पाए. पूरी तरह से पहुंच बहाल होने में चार घंटे से भी अधिक समय लगा. इस व्यवधान के कारण संगठन प्रदर्शन के दौरान अपने समर्थकों तक संदेश नहीं पहुंचा सका और जरूरी जानकारी साझा करने में उसे कठिनाई हुई.
अटॉर्नी जनरल्स के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में मेटा ने बताया कि अकाउंट पर असामान्य रूप से बढ़ी गतिविधि उसके सिस्टम को बॉट्स (स्वचालित अकाउंट) जैसी लगी, इसलिए यह कार्रवाई हुई. हालांकि, ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला है कि कंपनी ने समूह को उसकी राजनीतिक विचारधारा की वजह से जानबूझकर निशाना बनाया हो.
कनेक्टिकट के अटॉर्नी जनरल विलियम टोंग ने इस अलायंस की अगुवाई की, जिसमें कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और मैरीलैंड समेत कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल शामिल थे. इन अधिकारियों ने मेटा से पूछा कि कंपनी को इस निलंबन की जानकारी कब मिली, यह फैसला कैसे लिया गया और अकाउंट को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए गए.
उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि क्या इस प्रक्रिया में मानव समीक्षकों (ह्यूमन रिव्यूअर्स) की कोई भूमिका थी और क्या चुनाव से जुड़े अन्य वैध अकाउंट भी इसी तरह प्रभावित हुए थे. कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि सोशल मीडिया आज राजनीतिक संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है.
उन्होंने कहा, 'कैलिफोर्निया के लाखों लोग संगठित होने, खबरें पढ़ने और आने वाले चुनावों से जुड़ी जानकारी पाने के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं.'
बोंटा के मुताबिक अकाउंट का सस्पेंशन ऐसे समय हुआ जब 'नो किंग्स कोएलिशन' लोगों को अग्रिम मतदान (अर्ली वोटिंग) के लिए प्रेरित करने का अभियान चला रही थी.
अटॉर्नी जनरल्स ने मेटा से 29 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा है, जो कांग्रेस चुनावों से पांच दिन पहले की तारीख है. राज्य अधिकारियों की इस कार्रवाई से पहले डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन होलेन, रॉन वायडन, जेफ मर्कली, रिचर्ड ब्लूमेंथल और क्रिस मर्फी भी मेटा को पत्र लिख चुके थे.
इन सांसदों ने सवाल उठाया कि क्या मेटा की स्वचालित निगरानी प्रणाली वैध राजनीतिक गतिविधियों और संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों के बीच सही अंतर कर सकती है. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अकाउंट निलंबित करने और गलती होने पर उसे दोबारा बहाल करने की कंपनी की प्रक्रिया क्या है. सीनेटरों ने पूछा कि क्या मेटा के अधिकारियों ने 'नो किंग्स आंदोलन' या अन्य राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ कोई बातचीत की थी.
कंपनियों की ऑटोमेटेड प्रणालियां अचानक आई पोस्ट की बाढ पोस्ट, कमेंट और अन्य गतिविधियों में अचानक वृद्धि को संदिग्ध मान सकती हैं. लेकिन राजनीतिक रैलियों और अभियानों के दौरान भी इसी तरह की गतिविधि तेजी से बढ़ती है, क्योंकि समर्थक जानकारी साझा करते हैं और कार्यक्रमों का समन्वय करते हैं.