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पृथ्वी से काफी दूर मंगल ग्रह का रहस्य सदियों से मानव को आकर्षित करता रहा है. लाल ग्रह के रूप में चर्चित इस ग्रह पर जीवन की संभावनाएं जानने के लिए कई उन्नत देश वैज्ञानिक अभियान चला रहे हैं. लेकिन उन्हें अब तक इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई है. लेकिन लगता है कि अब भारत इस गुत्थी को सुलझाने वाला पहला देश बन सकता है. असल में भारत के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर दो ऐसी जगहों की खोज की है, जहां का धरातल हूबहू मंगल ग्रह की सतह जैसा है. अब वैज्ञानिक जगहों के नमूने लेकर मंगल का रहस्य सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक, यह शानदार खोज केरलम यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च टीम ने की है. इस टीम की अगुवाई प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. साजिन कुमार के.एस. कर रहे थे. इस रिसर्च के नतीजे जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च में प्रकाशित किए गए हैं. उनकी टीम ने भारत में तमिलनाडु के नेवेली और चिली के अटाकामा रेगिस्तान में ऐसी जगहों की पहचान की, जिनकी मिट्टी और चट्टानों में मौजूद खनिज मंगल ग्रह के वातावरण से काफी मिलते-जुलते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वैज्ञानिकों की तमिनलाडु के तिरुचिरापल्ली के बैडलैंड्स इलाके में गई. वहां पर उसे मेलेंटेराइट नामक खनिज मिला मिला. बैडलैंड्स वो इलाका होता है, जहां पर सालभर लगभग सूखा रहता है और बारिश नाम मात्र की होती है. वहां पर जमीन का कटाव भी ज्यादा होता है. जबकि दक्षिण अमेरिकी देश चिली के अटाकामा रेगिस्तान में जिप्सम पाया गया.
रिसर्च टीम ने अपनी स्टडी के लिए आधुनिक लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर का इस्तेमाल किया. यह एक ऐसा उपकरण होता है, जिससे खनिजों की की पहचान करके उनकी संरचना का पता लगाया जा सकता है. दोनों जगहों पर मेलेंटेराइट और जिप्सम, देखकर वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे. इसकी वजह ये थी कि दोनों ही खनिज ऐसे हैं, जिनकी संरचना में पानी से जुड़े तत्व मौजूद होते हैं. इन दोनों खनिजों से मंगल के भूगर्भीय इतिहास को समझने में काफी मदद मिल सकती है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, मंगल ग्रह की सतह पर भी ये दोनों मिनरल पाए गए हैं. इनमें जिप्सम मिलना इस बात का संकेत हो सकता है कि वहां पर कभी पानी हुआ करता था. वहीं मेलेंटेराइट खास तरह की परिस्थितियों में बनता है. इसके बनने के लिए कुछ समय तक नमी, अम्लीय वातावरण और ऑक्सीकरण जैसी प्रक्रियाओं की जरूरत होती है.
दोनों जगहों पर मंगल ग्रह जैसी जमीन की खोज इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि मंगल पर रिसर्च के लिए साइंटिस्ट अब तक अंतरिक्ष यानों और ऑर्बिटर से मिलने वाले आंकड़ों पर काफी निर्भर रहे हैं. लेकिन अब वे इन जगहों की भूगर्भीय संरचना पर रिसर्च कर मंगल के बारे में काफी हद तक अनुमान लगा सकते हैं.
यह रिसर्च भविष्य में मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले मिशनों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. साथ ही, इससे आने वाले वक्त में मंगल पर मानव बस्तियां बसाने की संभावनाओं पर आगे बढ़ने में भी मदद मिल सकती है.
-PIB