स्वर्ग में जीजस से मिलाने का झांसा, 190 बच्चों को भूखा मार डाला! पादरी को 200 साल की जेल
केन्या के शाकाहोला जंगल में हुए 191 लोगों के इस नरसंहार का मुख्य आरोपी अब जिंदगी भर सलाखों के पीछे रहेगा. उसे अदालत ने 200 साल कैद की सजा सुनाई है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
क्या कोई धर्म या आस्था के नाम पर मासूम बच्चों को भूखा तड़पाकर मरने के लिए मजबूर कर सकता है? केन्या में ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिला था, जब शाकाहोला जंगल में 'जीसस से मिलने' के नाम पर 190 बच्चों समेत कुल 191 लोगों को भूख से तड़पाकर मौत की नींद सुला दिया गया. इस नरसंहार के दोषी पॉल मैकेंजी को अदालत ने 200 साल की सजा सुनाई है.
इस खौफनाक मामले को 'शाकाहोला फॉरेस्ट नरसंहार' के नाम से जाना जाता है, जिसमें मैकेंजी ने अपने अनुयायियों को 'जीसस से मिलने' का लालच देकर भूखा रहकर जान देने के लिए उकसाया था. ये वही मैकेंजी है, जिस पर गैर-इरादतन हत्या और आतंकवाद से जुड़े अन्य मामलों में भी मुकदमे चल रहे हैं, जिनसे वह इनकार करता रहा है.
अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए मैकेंजी को हत्या और लोगों को भूखा मारकर जान लेने के जुर्म में 100-100 साल यानी कुल 200 साल जेल की सजा सुनाई. इसके साथ ही इस खूनी खेल में उसका साथ देने वाले 28 अन्य मददगारों को भी लंबी कैद की सजा दी गई है. इस पूरे ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लगभग 120 गवाहों ने गवाही दी.
फैसले के खिलाफ अपील करेगा दोषी
पिछले महीने ही अदालत ने जनवरी 2021 से सितंबर 2023 के बीच हुई इन मौतों के लिए मैकेंजी और उसके सहयोगियों को दोषी ठहराया था. मैकेंजी के वकील ने अदालत के इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है.
अदालत में बेपरवाह दिखा मैकेंजी
रिपोर्ट्स के अनुसार, पॉल मैकेंजी पहले टैक्सी ड्राइवर रह चुका है. शुक्रवार को जब वो अदालत पहुंचा तो उसके चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था. वो टी-शर्ट पहने हुए था और चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ बिल्कुल बेपरवाह दिख रहा था.
'मौत की सजा मिलती तो मिलता सुकून'
इस नरसंहार में अपने दो पोते-पोतियों को खोने वाले 62 साल के शिक्षक फ्रांसिस वांजे ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में अपना दर्द बयां किया. उनका कहना है कि वे उम्मीद कर रहे थे कि मैकेंजी को मौत की सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें. वांजे ने कहा, 'हमारा दर्द कोई चीज कम नहीं कर सकती. मुझे अधिकारियों पर बेहद गुस्सा है. अगर प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम उठाए होते, तो आज हम यह दिन देखने को मजबूर न होते.'
अभियोजन पक्ष ने मांगी थी फांसी की सजा
इस केस में सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने मैकेंजी के लिए मौत की सजा की मांग की थी. उन्होंने अदालत में दलील दी कि जिस बड़े पैमाने पर जानें गई हैं और उसके कृत्यों से जो खतरा पैदा हुआ, उसके लिए यह सजा जरूरी है, लेकिन उसे 200 साल की सजा हुई है. बता दें कि केन्याई कानून में फांसी का प्रावधान होने के बावजूद देश में 1987 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है.
सहयोगियों को भी उम्रकैद देने की मांग
सरकारी वकीलों ने मैकेंजी के साथियों को भी उम्रकैद देने की पुरजोर वकालत की. उनका साफ कहना था कि ये लोग मैकेंजी के अंधविश्वास के जाल में इस कदर फंस चुके हैं कि अगर जेल से बाहर आए, तो दोबारा ऐसे खौफनाक जुर्म को अंजाम दे सकते हैं.
आधुनिक शिक्षा और दवाओं को बताया शैतान का जरिया
गवाहों ने खुलासा किया कि 'गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च' का सरगना पॉल मैकेंजी आधुनिक शिक्षा को शैतान की देन बताता था. उसका कहना था कि अस्पताल और दवाएं भी शैतानी जरिया हैं, इसलिए उसने अपने भक्तों को बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटकर रहने के लिए मजबूर कर दिया था.
मानवाधिकार संगठन के इनपुट से खुला खूनी राज
मैकेंजी को अप्रैल 2023 में तब गिरफ्तार किया गया था, जब एक मानवाधिकार संगठन ने पुलिस को इनपुट दिया था. इसके बाद केन्याई तट के पास शाकाहोला जंगल में स्थित उसके 800 एकड़ के फॉर्म से कई बंधक अनुयायियों को भुखमरी की हालत में बचाया गया था. इसके बाद शुरू हुई खुदाई में वहां से सैकड़ों शव बरामद हुए और यह मामला दुनिया के सामने आ सका. केन्या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, साल 2024 तक इस भयावह त्रासदी में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 429 तक पहुंच चुका था, जिनमें से कई शवों की शिनाख्त तो अब तक नहीं हो पाई है.
धार्मिक पंथों पर नकेल कसने की उठी मांग
इस नरसंहार के खुलासे के बाद पूरे केन्या में धार्मिक संस्थाओं और स्वयंभू पंथों पर नकेल कसने की मांग तेज हो गई है. लोगों का गुस्सा इसलिए भी सातवें आसमान पर है, क्योंकि जांच में सामने आया कि पादरी मैकेंजी को पहले भी दो बार गिरफ्तार किया गया था, लेकिन हर बार उसे छोड़ दिया गया, जिसकी भारी कीमत सैकड़ों मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी.
कैसे ब्रेनवॉश करता था?
जांच में सामने आया है कि 'गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च' (GNIC) केन्या का एक ऐसा खतरनाक धार्मिक पंथ था, जो लोगों को कयामत और दुनिया खत्म होने का डर दिखाता था. मैकेंजी ने इसकी शुरुआत 2003 में की थी. वो अपने अनुयायियों का ब्रेनवॉश करता था कि बहुत जल्द पूरी दुनिया तबाह होने वाली है. वह लोगों से कहता था कि बच्चों को स्कूल मत भेजो, अस्पतालों में मत जाओ और आधुनिक दवाइयां शैतान का हथियार हैं, इसलिए इनका पूरी तरह त्याग कर दो.
स्वर्ग में 'यीशु' से मिलने का दिया था झांसा
बताया जाता है कि 2019 में जब उसका चर्च बंद हुआ, तो वह अपने अंधभक्तों को लेकर केन्या के शाकाहोला जंगल में चला गया. वहां उसने यह खौफनाक जाल बिछाया कि अगर वे और उनके बच्चे भूखे रहकर जान दे देंगे, तो दुनिया खत्म होने से पहले ही सीधे स्वर्ग पहुंचकर 'यीशु' से मिल सकेंगे. इसी झांसे में आकर सैकड़ों मासूम बच्चों और लोगों ने भूखे रहकर अपनी जान गंवा दी.