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'वसुधैव कुटुंबकम' सिर्फ नारा नहीं: जयशंकर बोले- जंग के दौर में हम 78 देशों के साथ; UN को तमाशबीन नहीं, लीडर बनना होगा!

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक मंच पर 'वसुधैव कुटुंबकम' के वास्तविक अर्थ को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल कहने की बात नहीं है, बल्कि वैश्विक सहयोग और जिम्मेदारी का आधार है.

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Oct 25, 2026, 03:38 PM IST | Updated: Oct 25, 2026, 03:47 PM IST
Image Credit: वसुधैव कुटुंबकम सिर्फ नारा नहीं, हमारी नीति है... विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया को क्यों दी यह दो टूक?
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत वैक्सीन की आपूर्ति, विकास साझेदारी और मानवीय सहायता के जरिए वैश्विक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता लगातार दिखा रहा है. उन्होंने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि उसके काम करने का तरीका है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की भूमिका और दुनिया के अलग-अलग देशों में चल रही विकास परियोजनाओं का जिक्र किया.

जयशंकर ने कहा कि कोरोना महामारी के समय भारत ने उन देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराने का फैसला किया, जो इसकी कमी के कारण पीछे छूट सकते थे. उस समय भारत में भी टीकाकरण अभियान जारी था, लेकिन इसके बावजूद दूसरे देशों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया. उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी अब 78 देशों तक पहुंच चुकी है. इन देशों में सैकड़ों परियोजनाएं चल रही हैं. भारत के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़े संस्थान भी दूसरे देशों के लोगों के लिए खुले हैं.

नेपाल से वेनेजुएला तक मदद पहुंचा रहा भारत

विदेश मंत्री ने आपात स्थितियों में भारत की सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों की मदद के लिए आगे आता है. उन्होंने नेपाल, श्रीलंका, वेनेजुएला और जमैका का उदाहरण दिया. जयशंकर के मुताबिक, भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना पर अमल करता है. यह विचार केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय दूसरे देशों की सहायता के रूप में दिखाई देता है.

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वैश्विक संकटों से निपटने के लिए सहयोग जरूरी

जयशंकर ने कहा कि दुनिया में हमेशा से प्रतिस्पर्धा और सहयोग को लेकर अलग-अलग विचार रहे हैं. लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनका असर इस बात पर पड़ता है कि देश एक-दूसरे के साथ किस तरह व्यवहार करते हैं. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय भी देशों के बीच सहयोग और साझा लक्ष्यों की भावना को महत्व दिया गया था. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 में भी देशों के प्रयासों में तालमेल बनाने और साझा उद्देश्यों को हासिल करने की बात कही गई है. जयशंकर ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों और अवसरों का सबसे प्रभावी समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है. संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर देशों को एकजुट होकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहरानी चाहिए.

यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों का असर दुनिया पर

विदेश मंत्री ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इनका नुकसान केवल युद्ध प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. दूर बैठे लोगों, समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि इन संघर्षों के फैसलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति को ही इन विवादों का समाधान मानता है. भारत खुद भी इस दिशा में प्रयास कर रहा है और दूसरे साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है.

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सीमाओं और कमियों को स्वीकार करते हुए उनमें सुधार करना जरूरी है. उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े हिस्से को फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता. संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक संकटों के दौरान केवल दर्शक बने रहने के बजाय नेतृत्व करना चाहिए. विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लंबे समय से लंबित सुधारों के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की. उन्होंने कहा कि देशों को साझा जिम्मेदारियों और एकजुटता की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा.

24 अक्टूबर को मनाया जाता है संयुक्त राष्ट्र दिवस

संयुक्त राष्ट्र दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है. इसी दिन 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर लागू हुआ था और संयुक्त राष्ट्र की औपचारिक स्थापना हुई थी. चार्टर को इसके हस्ताक्षरकर्ता देशों के बहुमत, जिसमें सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य भी शामिल थे, की मंजूरी मिलने के बाद संगठन अस्तित्व में आया.

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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