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इजरायल में कैसे बनती है सरकार: वोटर चुनेंगे पार्टी, 61 सीटों पर टिकेगा सत्ता का खेल; नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा

इजरायल में नई सरकार के लिए वोटिंग होने जा रही है. 73 लाख से ज्यादा मतदाता देश की किस्मत का फैसला करने के लिए रेडी हैं. अक्टूबर 2023 में हमास के हमले और फरवरी 2026 में ईरान के साथ सैन्य संघर्ष ने इजरायल की सियासत पर काफी असर डाला है. नेतन्याहू मारेंगे 'चौका' या या गादी पलटेंगे 'बाजी'? इस पर निगाहें टिकी हैं.

इजरायल में कैसे बनती है सरकार: वोटर चुनेंगे पार्टी, 61 सीटों पर टिकेगा सत्ता का खेल; नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा
Image Credit: इजरायल में वोटिंग से पहले लगी होर्डिंग (रॉयटर्स)

इजरायल के आम चुनावों में अपने वोट की ताकत से मतदाता देश की राजनीतिक दिशा और दशा तय करने जा रहे हैं. वोटिंग से ठीक पहले भारत में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने अपने देश की चुनावी व्यवस्था, गठबंधन बनाने की प्रक्रिया और किन परिस्थितियों में दोबारा मतदान की नौबत आ सकती है, इसके बारे में विस्तार से बताया. सिरोटा ने कहा कि इजरायल के लोग सामान्य जीवन, शांति और सुरक्षा चाहते हैं, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

बैलट बॉक्स में कैद होगी पार्टी की किस्मत

इजरायल में मंगलवार की वोटिंग को लेकर इजरायल एंबेसी की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने बताया कि करीब 73 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. हमें उम्मीद है कि मतदान का प्रतिशत काफी अच्छा रहेगा. क्योंकि इजरायल के लोग बहुत बहादुर हैं और हमारे देश में बहुत ही जीवंत लोकतंत्र है.'

इजरायल को लेकर आम लोगों की जरूरतों और आकाक्षांओं का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, 'आम लोग इजरायल के भविष्य की सोच रहे हैं. आगे चलकर देश कैसा होगा, इस पर विचार कर रहे हैं. वो यह समझते हैं और तय करते हैं कि इजरायल में उनके अगले चार साल कैसे होंगे.'

इजरायल में नेतन्याहू की साख दांव पर

संसदीय प्रक्रिया को आगे समझाते हुए उन्होंने कहा, 'हमारी संसद में कुल 120 सीटें हैं, इसलिए सबसे बड़ी पार्टी या अपनी पसंद की किसी भी पार्टी को वोट नागरिक दे सकते हैं. वोटों के आधार पर हर पार्टी को जितनी सीटें (जनादेश) मिलती हैं, उतने ही प्रतिनिधि वे संसद में भेज सकते हैं. चाहे वे गठबंधन का हिस्सा बनें या विपक्ष में रहें. चुनाव के बाद, वोटों की गिनती होगी और राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका दिया जाए. उनके पास गठबंधन बनाने और आम सहमति जुटाने के लिए 28 दिन का समय होगा.'

दोबारा वोटिंग की नौबत

उन्होंने आगे बताया, '28 दिनों के बीच वे अन्य पार्टियों को अपने साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए मना सकते हैं. अगर वे सफल नहीं होते हैं, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका मिलेगा.'

सिरोटा ने उम्मीद जताई कि इसकी नौबत नहीं आएगी. लेकिन अगर ऐसा भी नहीं हो पाता है, तो 90 दिनों के भीतर फिर से मतदान होगा.

उम्मीदवार के बजाय पार्टी को वोट

इजरायल में जन प्रतिनिधि चुनने में क्या अहम होता है, पार्टी या फिर उसे लीड करने वाला नेता? इस सवाल के जवाब में प्रवक्ता सिरोटा ने कहा, 'दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह ही, यहां भी बहुत से लोग अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं. लेकिन जब आप पोलिंग बूथ पर होते हैं, तो आप असल में अपनी पसंद की पार्टी को वोट दे रहे होते हैं, क्योंकि एक पार्टी का मतलब सिर्फ उसका मुख्य उम्मीदवार नहीं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर होता है. लेकिन हम किसी एक उम्मीदवार के बजाय पूरी पार्टी को वोट देते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल उसके मुखिया तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उससे कहीं अधिक व्यापक है.'

सिरोटा के मुताबिक इजरायल के लोग शांति प्रिय हैं इसलिए उसकी वकालत करते हैं. 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हुए हमले से अभी तक लोग खौफजदा है. लोगों को इजरायल की सीमाओं पर, और कभी कभी तो मध्य इजरायल में भी, खुद को खतरे में महसूस हुआ. जाहिर है, हर कोई एक सामान्य जीवन जीना चाहता है, न कि पूरे देश में बमों या आतंकवादी हमलों के डर के साये में रहना चाहता है. लोग शांति और सुकून चाहते हैं. लेकिन मैं यह भी कहूंगी कि इजरायल अपने नागरिकों पर किसी भी तरह का खतरा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे वह कहीं भी हो. और हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देंगे.

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About the Author

Shwetank Ratnamber

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श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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