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Israel Election: इजरायल में आज होने वाले चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत तय करने वाले हैं. चुनाव से पहले इजरायली पीएम और इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के चीफ जनरल एयाल जमीर बीच तनातनी की खबरें सामने आई थीं. बताया जा रहा है कि IDF चीफ इकलौते ऐसे सिक्योरिटी चीफ है, जिन्होंने नेतन्याहू की ओर से ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन का विरोध किया. IDF को डर था कि इससे ईरान के साथ तनाव भड़क सकता है और मंगलवार ( 27 अक्टूबर 2026) को होने वाले चुनाव प्रभावित हो सकते हैं.
'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इजरायल में नेतन्याहू की सरकार बनती है, तो वे जमीर को उनके पद से हटा सकते हैं या फिर IDF चीफ खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. ये रिपोर्ट्स ऐसे वक्त पर सामने आई हैं, जब हाल के हफ्तों में इजरायल ने अमेरिका से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले वापस शुरू करने के लिए कहा था. हालांकि, ट्रंप ने इसके लिए मना कर दिया था. इसकी एक वजह ये थी कि जमीर ने अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख को चेतावनी दी थी कि इस तरह के हमले से चुनाव टल सकते हैं.
नेतन्याहू और इजरायल के विदेश मंत्री इजराइल काट्ज ने इस तरह के किसी भी रिपोर्ट्स को खारिज किया है. उनका कहना है कि इजरायल पहले से ही ईरान पर हमले का कोई इरादा नहीं था. 'टाइम्स ऑफ इजरायल' के मुताबिक, हाल के दिनों में नेतान्याहू और जमीर के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला है. यह टकराव प्रधानमंत्री के उस आदेश से जुड़ा है, जिसको लेकर रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे चुनाव से ठीक पहले ईरान के साथ तनाव भड़क सकता है. जमीर इस मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देने का विरोध कर रहे थे. इस मामले पर उन्होंने अधिक चर्चा करने की मांग की और नेतन्याहू से भी इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए कानूनी अधिकार से संबंधित लिखित दस्तावेज भी मांगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, जमीर ने कुछ समय पहले चेतावनी दी थी कि ईरान नेतन्याहू और काट्ज की ओर से उठाए जाने वाले कदमों का गलत मतलब निकाल सकता है और पहले ही हमले करके इसका जवाब दे सकता है. इसके अलावा एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू के पूर्व सैन्य सचिव गोफमैन को मोसाद के सीनियर ऑफिसर्स के विरोध का सामना करना पड़ा है. ये अधिकारी चुनाव से पहले ईरान पर प्रस्तावित हमले के खिलाफ हैं और उन्हें चिंता है कि इन योजनाओं के पीछे नेतन्याहू के राजनीतिक हित हैं. वहीं, मोसाद ने अपनी गतिविधियों पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन कहा कि तनाव नहीं आपसी चर्चा से संगठन मजबूत होता है.
चुनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि उन्होंने इस बार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए कोई समर्थन जारी नहीं किया है. नेतन्याहू ने उनसे चुनाव से पहले दूसरी बार समर्थन जारी करने के लिए नहीं कहा था. वहीं, रविवार ( 26 अक्टूबर 2026) को ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में एक बयान जारी किया. इससे कुछ घंटे पहले ही 'एक्सियोस' ने खुलासा किया था कि पीएम ऑफिस ने ऐसा करने के लिए व्हाइट हाउस पर दबाव डाला था. जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा,' नहीं, मैंने उनसे इस बारे में कभी कोई बात नहीं की.' ट्रंप ने आगे कहा,' मुझे लगता है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर बेहद अच्छा काम किया है.'