SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

चुनाव में जीतने के बाद भी पीएम नहीं बन पाएंगे नेतन्याहू! हाथ से सत्ता फिसलने का सता रहा डर; सबसे बड़ी वजह आ गई सामने

इजरायल में होने वाले आम संसदीय चुनाव की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस बीच कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू के सामने बड़ा राजनीतिक संकट चुनाव के बाद खड़ा हो सकता है, जिससे उनकी कुर्सी खतरे में पड़ सकती है.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 17, 2026, 10:21 AM IST | Updated: Oct 17, 2026, 01:47 PM IST
Image Credit: इजरायली पीएम नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में कैसे आई? (फोटो- एआई)
Join

इजरायल में 27 अक्टूबर को आम संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं. ये चुनाव ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब इजरायल कई देशों के साथ युद्ध में फंसा है.  इस बीच इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के सामने चुनाव के बाद सत्ता गंवाने का खतरा भी मंडरा रहा है.  

नेतन्याहू के सामने दक्षिणपंथी खेमे की छोटी पार्टियां मुश्किलें खड़ी करते नजर आ रही हैं. यही कारण है कि वोटों के बंटने की संभावना काफी हद तक बढ़ गई है. ऐसे में ये पार्टियां चुनाव के बाद नेतन्याहू की सरकार में शामिल होने से इनकार कर सकती हैं. जो नेतन्याहू के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है.

दरअसल, इजरायल में होने वाली वोटिंग से कुछ दिन पहले नेतन्याहू की लिकुड पार्टी इन सभी राजनीतिक दलों के वोट अपने पक्ष में लाने की कोशिश में लगी है. इससे इतर विपक्षी नेता गादी आइजनकोट भी अपनी पार्टी को विपक्ष का बड़ा दल बनाने में जुटे हैं. जिससे वह पीएम पद की मजबूत दावेदारी पेश कर सकें.

छोटी पार्टियां बनी इजरायली पीएम के लिए चुनौती?

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इजरायल में दक्षिणपंथी वोटों के लिए बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को ओफर विंटर और योआज हेंडेल के राजनीतिक दलों से सीधी चुनौती मिल रही है. ऐसे में नेतन्याहू चाहते हैं कि दक्षिणपंथी मतदाता भी लिकुड पार्टी के लिए वोट करें. ऐसा करने से नेतन्याहू को सरकार बनाने में आसानी मिलने की संभावना है.

हाल में ही एक चुनाव प्रचार के दौरान नेतन्याहू ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वह विंटर की पार्टी को वोट न करें. माना जा रहा है कि नेतन्याहू को डर है कि विंटर दक्षिणपंथी वोट लेकर चुनाव के बाद एविगडोर लिबरमैन के साथ जा सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो नेतन्याहू को इन पार्टियों का समर्थन मिलने के बाद भी संसद का जरूरी आंकड़ा पूरा करना कठिन हो जाएगा.

वोटों के बंटने का सता रहा डर

आपको यहां पर जानना चाहिए कि इजरायल में किसी भी पार्टी को संसद में सीट पाने के लिए कम से कम 3.25% वोट हासिल करना ही होता है. अगर इससे कम वोट मिलते हैं, तो पार्टी को नेसेट (इजरायली संसद) में सीट नहीं मिलती. माना जा रहा है कि अगर दक्षिणपंथी मतदाता लिकुड के बजाए विंटर की पार्टी को वोट करते हैं, लेकिन वो जरूरी वोट नहीं हासिल कर पाते, तो उन वोटों से संसद में कोई सीट नहीं मिलेगी.

ऐसा होने पर दक्षिणपंथी खेमे की कुल सीटें कम हो सकती हैं और नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो सकता है. इधर, विंटर पार्टी के भी संसद तक पहुंचने की काफी अधिक संभावना जताई जा रही है. 1 अक्टूबर के बाद हुए कई चुनावी सर्वे में विंटर पार्टी जरूरी वोट हासिल करती नजर आ रही है. अगर चुनावी नतीजे भी इन सर्वे के करीब आते हैं, तो भी संसद तक पहुंचना तय नहीं माना जा सकता है. 

विंटर से मिलेगा नेतन्याहू को सपोर्ट?

आपको बता दें कि ओफर विंटर की पार्टी ने कहा कि वह राष्ट्रपति के सामने बेंजामिन नेतन्याहू को फिर से पीएम बनाने की सिफारिश करेंगे, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उनकी पार्टी नेतन्याहू की सरकार में शामिल होगी. विंटर पार्टी ने कहा कि यहूदी पार्टियां सेना में भर्ती से जुड़े कानून पर सहमत हों. अगर ऐसा नहीं करते हैं, तो उनकी पार्टी सरकार में शामिल नहीं होगी.

क्या विपक्ष के पास पीएम का कोई चेहरा है?

गौरतलब है कि नेतन्याहू को हराने की कोशिश कर रहे विपक्षी दल के पास पीएम उम्मीदवार को लेकर किसी एक चेहरे पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है. हाल में ही विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि था कि उनकी याशर पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बने. यही कारण है कि इसके लिए वह दूसरी विपक्षी पार्टियों के समर्थकों को अपनी ओर लाने की कोशिश में लग गए हैं.  

आइजनकोट पीएम नेतन्याहू को मानते हैं देश के लिए खतरा

इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि आइजनकोट पहले यह आरोप लगा चुके हैं कि नेतन्याहू 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद देश की सुरक्षा करने में नाकाम रहे हैं. आइजनकोट का दावा है कि किसी भी नेता की पहचान उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसके नतीजों से होती है. एक कार्यक्रम के दौरान आइजनकोट ने नेतन्याहू को एंटी लीडर तक करार दे दिया था. आइजनकोट का मानना है कि देश में एक ऐसी सरकार हो, जो गलतियों की जिम्मेदारी ले.

आइजनकोट भी कर सकते हैं सरकार बनाने की कोशिश

इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी हो जाता है. हालांकि, कई बार कुछ विशेष परिस्थितियों में इससे कम समर्थन के साथ भी सरकार बनी है. यही कारण है कि विपक्षी नेता गादी आइजनकोट इसी संभावना पर विचार कर रहे हैं. उनका उद्देश्य है कि वह एक ऐसी सरकार बनाएं, जिसे अरब पार्टियों के मतदान से दूर रहने पर संसद में मंजूरी मिल जाए. वैसे यह केवल एक संभावना है. किसी भी दल के लिए एक बड़ा समर्थन जुटा पाना मुश्किल है.

सरकार नहीं बनने पर क्या हैं विकल्प?

एक तरफ दक्षिणपंथी पार्टियों के वोटों के खिसकने का डर है, तो दूसरी ओर विपक्षी नेता गादी आइजनकोट की इच्छा है कि चुनाव के बाद सरकार तुरंत बनें, जिससे नेतन्याहू लंबे समय तक कार्यवाहक पीएम न रह सकें. बता दें कि इससे पहले इजरायल में साल 2019 से 2022 के बीच पांच बार चुनाव हुए. इस दौरान करीब 19 महीने तक बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक पीएम रहे थे.  

यह भी पढ़ें: जंग के बीच ट्रंप का जुबानी प्रहार, 'मोहम्मद' नाम पर टिप्पणी से घमासान; ईरानी राष्ट्रपति पद का भी उड़ाया मजाक

यह भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एक्शन, व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी जकारिया बर्खास्त; नौकरी के पांच दिन बाद ही गई कुर्सी
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES