West Asia War: पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने मैक्रों पर ईरान परमाणु समझौता कहे जाने वाले 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) के संबंध में विपरीत विचार रखने का आरोप लगाया.
अराघची ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी बात रखते हुए पिछले कुछ सालों में मैक्रों के बयानों में आए बदलावों की ओर इशारा किया. उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति को सलाह दी कि वे अपने रुख में निरंतरता बनाए रखें.
अराघची ने अपने 'X' हैंडल पर लिखा,' साल 2018 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया, उससे ठीक पहले मैक्रों ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने जोर देकर कहा था कि फ्रांस JCPOA से बाहर नहीं निकलेगा, क्योंकि हमने इस पर हस्ताक्षर किए हैं. आज उनका दावा है कि उन्होंने हमेशा ईरान में किसी भी तरह की परमाणु गतिविधि का विरोध किया है.'
Just before POTUS exited the Iran Nuclear Deal in 2018, Mr. Macron insisted before the U.S. Congress that "France won't leave the JCPOA, because we signed it." Today, he claims he always opposed "any form of nuclear activity" in Iran. Get your story straight, Mr. President. https://t.co/wtitKJ1Pzt
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) October 22, 2026
अराघची ने मैक्रों से कहा,' अपनी बात तो साफ कर लीजिए राष्ट्रपति जी.'
ईरानी विदेश मंत्री ने अपनी पोस्ट के साथ एक फोटो भी शेयर की, जिसमें अप्रैल 2018 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने मैक्रों की ओर से दिए गए एक भाषण का क्लिप था. उस भाषण के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने 2015 के समझौते में बने रहने का समर्थन किया था. इतना ही नहीं उन्होंने इसे एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय ढांचे के रूप में भी पेश किया, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के बदले उसकी निगरानी करना और उसे रेगुलेट करना था.
बता दें कि 14 जुलाई 2015 को, P5+1 (चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका), यूरोपीय संघ (EU) और ईरान के बीच 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) पर सहमति बनी थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहे. 'अल जजीरा' की रिपोर्ट के मुताबिक, मैक्रों ने कहा कि पेरिस ने हमेशा ईरान में किसी भी तरह की परमाणु गतिविधि का विरोध किया है. इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रशासन ईरान की फाइनेंशियल लाइफलाइंस को टारगेट करना जारी रखेगा, जब तक कि वहां की लीडरशिप अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए इनका इस्तेमाल करने में असमर्थ न हो जाए.
बेसेंट ने कहा,' ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसता जा रहा है और यहां तक कि ईरान के तथाकथित सहयोगी भी उसे नहीं बचा सकते. ट्रेजरी डिपार्टमेंट तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक कि ईरानी शासन का खजाना खाली न हो जाए और उसकी वॉर मशीन को सहारा देने वाली हर फाइनेंशियल लाइफलान को पूरी तरह से काट न दी जाए.'