SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

काली बारिश का साया: अमेरिका-इजरायल पर भड़के अराघची, ईरान को अचानक क्यों याद आया गाजा?

ईरान ने अमेरिका-इजरायल के हमलों की वजह से पर्यावरण को हुए नुकसान की जवाबदेही तय करने की मांग की है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मुल्क की ऑयल रिफायनरी पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए वायु प्रदूषण के अलावा जहरीले केमिकल्स से ईरानी लोगों की सेहत और मुल्क के इकोसिस्टम को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 11, 2026, 02:53 PM IST | Updated: Oct 11, 2026, 03:32 PM IST
Image Credit: (Reuters)
Join

अमेरिका-ईरान के हमलों में तबाही और बर्बादी के कगार तक पहुंच चुके ईरान ने दुश्मनों को एक बार फिर से ललकारते हुए खुदा के खौफ की याद दिलाई है. तेहरान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'इकोसाइड: द साइलेंट वॉर क्राइम' में अमेरिका-इजरायल की बखिया उधेड़ते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पर्यावरण को हुए नुकसान की जवाबदेही तय करने की मांग की है. रविवार को अपने संबोधित में ईरानी मंत्री ने ये भी कहा क‍ि ईरान में दुश्मनों के हमलों से पर्यावरण को गंभीर खतरा पहुंचा है. ऐसे में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले देशों को इसका जिम्मेदार ठहराए जाने के साथ हर्जाना वसूला जाना चाहिए.

'इकोसाइड', 'जेनोसाइड' और फूड चेन पर असर

ईरानी समाचार एजेंसी मेहर न्‍यूज के मुताबिक, अराघची ने कहा तेहरान के पास तेल में लगी आग से खतरनाक पदार्थ निकले, जिनसे हवा, मिट्टी और पानी प्रदूषित हो सकते हैं और फूड चेन पर असर पड़ सकता है. 'इकोसाइड' (पर्यावरण की व्यापक तबाही) सिर्फ युद्ध अपराध नहीं, बल्कि उससे भी बड़ा अपराध है और इस मुद्दे पर केवल चिंता जताने के बजाय ठोस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जरूरत है.

अराघची ने कहा कि पर्यावरण पूरी मानवता की साझा धरोहर है. इसे देशों की आपसी प्रतिस्पर्धा का मैदान या अल्पकालिक आर्थिक और सैन्य हितों का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि 'इकोसाइड' शब्द की संरचना 'जेनोसाइड' (नरसंहार) शब्द जैसा है और यह पर्यावरण के खिलाफ युद्ध अपराध से भी आगे की अवधारणा को दर्शाता है.

गाजा से तुलना

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, अराघची ने कहा कि युद्ध की वजह से पानी, मिट्टी, हवा, जंगल, खेती की जमीन, ऊर्जा संसाधन, प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचता है. इसके प्रभाव कई बार युद्ध खत्म होने के वर्षों या दशकों बाद तक बने रहते हैं. उन्होंने गाजा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर्यावरण को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचा है. जैतून के बागों का विनाश हुआ है और पानी और मिट्टी दूषित हो गए हैं.

लेबनान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आग लगने की घटनाओं से जंगल और हजारों जैतून के पेड़ नष्ट हो गए. ईरान के बारे में बोलते हुए अराघची ने कहा कि मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने पुष्टि की थी कि तेल सुविधाओं पर हुए हमलों के कारण खतरनाक रासायनिक यौगिक वातावरण में फैले थे. उन्होंने तेहरान पर हुई 'काली बारिश' की घटनाओं का भी उल्लेख किया.

विदेश मंत्री ने तीन प्रमुख मुद्दों पर जोर देते हुए कहा क‍ि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए पर्यावरण को होने वाले गंभीर नुकसान की पहचान और उससे निपटने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा और स्पष्ट मानक विकसित किए जाएं. साथ ही, सशस्त्र संघर्षों के दौरान होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से दस्तावेजीकरण करने की व्यवस्था बनाई जाए. इसके अलावा, पर्यावरणीय तबाही रोकने, क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से बहाल करने और प्रभावित देशों की मदद के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाए.

अराघची ने कहा कि ईरान 'इकोसाइड' को एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने का समर्थन करता है और इस दिशा में अपने वैज्ञानिक, कानूनी और कूटनीतिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए तैयार है.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES