Indian-Americans Racism: अमेरिका के टेक्सास शहर में रहने वाले एक 21 साल के भारतीय मूल के स्टूडेंट जर्नलिस्ट को भेदभाव का सामना करना पड़ा. छात्र पत्रकार वसंत भट्ट ने कहा कि उन्होंने भारतीयों के खिलाफ बढ़ती नफरत और भेदभाव के विरोध में एक डेमोक्रेट उम्मीदवार को वोट दिया था, जिसके बाद कंजर्वेटिव उच्च शिक्षा से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म 'कैंपस रिफॉर्म' ने उन्हें संवाददाता की भूमिका से हटा दिया.
यह घटना अमेरिकी दक्षिणपंथियों के बीच भारतीय-अमेरिकियों के प्रति बढ़ते भेदभाव पर छिड़ी बहस का एक अहम मुद्दा बन गया है. 'यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन' में पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई कर रहे वसंत भट्ट ने शुक्रवार ( 23 अक्टूबर 2026) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए घटना की जानकारी दी.
वसंत भट्ट ने लिखा,' मैंने अपने विवेक के अनुसार मतदान करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया. भारतीयों के खिलाफ हो रही नफरत के खिलाफ आवाज उठाई और रिपब्लिकन पार्टी की लाइन पर चलने से इंकार किया. अब कैंपस रिफॉर्म के संवाददाता कार्यक्रम में मेरी भागीदारी समाप्त कर दी गई है.' भट्ट ने कहा,' किसी कार्यक्रम में अपनी जगह खो देने से मैं अपने विचार नहीं बदलूंगा और न ही अपने समुदाय का साथ छोड़ूंगा.' कैंपस रिफॉर्म ने अभी तक भट्ट के दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि, वेबसाइट पर मौजूद उनका प्रोफाइल, जिसमें उन्हें 'सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट' बताया गया था अब ऑथर लिस्ट में दिखाई नहीं देता है.
इस महीने की शुरुआत में भट्ट उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने कहा था कि टेक्सास की अमेरिकी सीनेट चुनावी दौड़ में उन्होंने रिपब्लिकन केन पैक्सटन की बजाय डेमोक्रेट जेम्स टालारिको को वोट दिया.
I exercised my constitutional right to vote according to my conscience, spoke out against anti-Indian bigotry, and refused to toe the Republican Party line. My participation in Campus Reform's correspondent program has now been terminated. Losing a place in a program will not make me retract my beliefs or abandon my community.
— Vasant Bhatt (@vasantbhatt14) October 23, 2026
भट्ट का कहना था कि भारतीय-अमेरिकियों की पहचान पर हो रहे हमलों और बढ़ती विदेशियों-विरोधी सोच से वह बेहद परेशान थे. कैंपस रिफॉर्म पर प्रकाशित उनकी जीवनी के अनुसार, उन्होंने पहले सीनेटर टेड क्रूज के पुनर्निर्वाचन अभियान में इंटर्नशिप की थी. साथ ही उन्होंने टेक्सास यूथ समिट के साथ भी काम किया था, जिसे राज्य के सबसे बड़े युवा रूढ़िवादी सम्मेलनों में से एक माना जाता है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी 'X' पर एक पोस्ट में भट्ट के खिलाफ हो रहे हमलों की आलोचना की. उन्होंने इसे इलिनोइस के ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की साजिश से पहले बने माहौल से जोड़ा.
कैंपस रिफॉर्म, वर्जीनिया स्थित रूढ़िवादी गैर-लाभकारी संस्था लीडरशिप इंस्टीट्यूट का एक प्रोजेक्ट है. यह संस्था युवा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का काम करती है. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राजनीति में भारतीयों के खिलाफ बढ़ती बयानबाजी को लेकर बहस तेज है. 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर हमले, सोशल मीडिया पर भारतीय H-1B वीजा होल्डर्स को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां और ऑनलाइन ट्रोलिंग चर्चा का विषय बने हुए हैं. भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस तरह की भाषा अब सिर्फ ऑनलाइन बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा की घटनाओं को भी बढ़ावा दे रही है. उन्होंने उदाहरण के तौर पर ऑरोरा मंदिर से जुड़े कथित षड्यंत्र का जिक्र किया है. टेक्सास में अमेरिका की सबसे बड़ी भारतीय-अमेरिकी आबादियों में से एक रहती है. इनमें से बड़ी संख्या ह्यूस्टन और डैलस-फोर्ट वर्थ क्षेत्र में बसती है. ( इनपुट- IANS)