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भारत का बांग्लादेश को एक और बड़ा झटका: जूट उत्पादों पर सख्त किए एंटी-डंपिंग ड्यूटी नियम, बिगड़ेंगे पड़ोसी मुल्क के हालात

India New Anti-Dumping Duties on Bangladeshi Jute: भारत ने दुश्मन रुख दिखा रहे बांग्लादेश को एक और बड़ा झटका दिया है. उसने जूट उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी नियम सख्त कर दिए हैं, जिसका सीधा असर बांग्लादेश पर पड़ना तय है.

Written By Devinder Kumar
Published: Sep 27, 2026, 05:00 AM IST | Updated: Sep 27, 2026, 05:13 AM IST
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India Anti-Dumping Duty Rules on Jute Imports from Bangladesh: पाकिस्तान के खेमे में आकर भारत के खिलाफ दुश्मनी का मोर्चा खोल रहे बांग्लादेश को भारत ने खामोशी के साथ एक ओर बड़ा झटका दिया है. भारत ने बांग्लादेश से आने वाले जूट उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के नियमों को ज्यादा कड़ा कर दिया है. इससे पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहे बांग्लादेश पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है.

भारत के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने मिड-टर्म रिव्यू के बाद यह फैसला लिया है. इस डिसीजन को भारत के जूट उद्योग को बढ़ावा देने वाला कहा जा रहा है. इसकी वजह ये है कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही जूट उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देश हैं. लेकिन बांग्लादेश का जूट दुनिया के दूसरे देशों के साथ बिकने के लिए भारत भी आता था. जिससे भारतीय किसानों को लगातार नुकसान हो रहा था. इसीलिए वे लंबे वक्त से बांग्लादेश के जूट को कंट्रोल करने की मांग कर रहे थे.

बांग्लादेश का कुल जूट निर्यात कितना है?

बांग्लादेश हर साल करीब 30 करोड़ से 40 करोड़ डॉलर से ज्यादा के जूट और जूट से बने उत्पादों का निर्यात करता है. उसका माल खरीदने वाले देशों में तुर्किये, चीन, उज्बेकिस्तान, मिस्र, पाकिस्तान और यूरोपीय देश  भी शामिल हैं. भारत भी बांग्लादेशी जूट उत्पादों का एक प्रमुख और पारंपरिक खरीदार रहा है.  

बांग्लादेश के निर्यात के लिए कितना अहम है भारत?

बांग्लादेश के जूट निर्यात के लिए भारत भूगोलीय और व्यावसायिक रूप से बेहद अहम रहा है. लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक नीतियों के चलते इसमें उतार-चढ़ाव आते रहे हैं. चूंकि, भारत भौगोलिक रूप से बिलकुल नजदीक है, जिससे परिवहन लागत कम आती है. यही वजह है कि बांग्लादेश कम लागत में बड़ी मात्रा में जूट फाइबर, सूत और बोरे भारत निर्यात करता रहता है. इसका नुकसान भारत के किसानों को उठाना पड़ता है. देश के घरेलू किसानों और जूट मिलों को अपना सामान बेचने के लिए उपयुक्त बाजार नहीं मिल पाते. इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने पहले ही एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई थी.

ऐसे में भारत के इस नए कदम का सीधा असर बांग्लादेश से भारत आने वाले जूट उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है. एंटी-डंपिंग ड्यूटी का मकसद ऐसे आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाना है, जिन्हें घरेलू उद्योग के लिए नुकसानदेह कीमतों पर बेचा जा रहा हो. मिड-टर्म रिव्यू के बाद नियमों को कड़ा करने से बांग्लादेशी जूट उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहले जैसी कीमत बढ़त बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसका फायदा घरेलू जूट किसानों और मिलों को मिल सकता है, जिन्हें सस्ते आयात से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है.

बांग्लादेश के लिए व्यापार में एक और चुनौती

इस फैसले का असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भारत-बांग्लादेश के मौजूदा तनाव के लिए भी अहम माना जा रहा है. हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई उत्पादों को लेकर व्यापारिक प्रतिबंध और नीतिगत बदलाव देखने को मिले हैं. ऐसे में जूट जैसे पारंपरिक कारोबार में भारत की ओर से शुल्क व्यवस्था को सख्त किया जाना बांग्लादेश के निर्यातकों के लिए एक नई चुनौती पैदा कर सकता है. खासकर तब, जब बांग्लादेश के जूट क्षेत्र के लिए भारत एक नजदीकी और बड़ा बाजार रहा है.

अब बांग्लादेशी जूट कारोबारियों के सामने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की चुनौती होगी. उन्हें या तो अतिरिक्त शुल्क का असर कीमतों में समायोजित करना होगा या फिर दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी बिक्री बढ़ाने की कोशिश करनी होगी. दूसरी तरफ भारत के जूट किसानों और घरेलू उद्योग के लिए यह फैसला राहत भरा हो सकता है.

तेजी से बिगड़ रहे पड़ोसी मुल्क के आर्थिक हालात

माना जा रहा है कि इस फैसले के जरिए भारत ने एक बार फिर बांग्लादेश को संकेत दिया है कि अपने देश की विदेश नीतियों की फिर से समीक्षा करे और उसे पाकिस्तान परस्त बनाने से रोके. शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में जिस तरह कट्टरपंथी ताकतें हावी हुई हैं और भारत विरोधी फैसले लिए गए हैं. उसके बाद से भारत का रुख भी बांग्लादेश के लिए सख्त हुआ है. अभी तक के उदारवादी रुख के उलट भारत अब बांग्लादेश के लिए कड़े फैसले ले रहा है, जिससे पड़ोसी मुल्क की आर्थिक हालत और तेजी से बिगड़ रही है. 
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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