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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत का पक्ष रखा. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को जोरदार लताड़ लगाई है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से को खाली करना चाहिए. यह बयान 24 सितंबर 2026 को परिषद की बैठक में भारत के राइट ऑफ रिप्लाई के दौरान दिया गया.
त्यागी ने पाकिस्तान में स्थित मंदिरों की तुलना जिक्र शराब की दुकानों के साथ किए जाने के बाद उन्हें करारा जवाब दिया और कहा कि किसी पूजा स्थल को अपराध के सबूत के तौर पर पेश करना पाकिस्तान में दूसरे धर्मों के प्रति सोच को दिखाता है. भारत की ओर से पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए. त्यागी ने कहा कि हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की आबादी में आजादी के बाद बड़ी कमी आई है. उन्होंने जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण और ईशनिंदा कानूनों को लेकर भी चिंता जताई.
#WATCH | While responding to Pakistan at the UN Human Rights Council, Indian diplomat Kshitij Tyagi said, "India exercises its right of reply in response to Pakistan's extraordinary combination of historical revisionism, invented statistics and sectarian insinuation. Since… pic.twitter.com/4IRduUWAJh
— ANI (@ANI) September 24, 2026
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर पलटवार
त्यागी ने पाकिस्तान में मुस्लिम समुदायों के भीतर मौजूद अल्पसंख्यक समूहों का भी जिक्र किया. उन्होंने शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ कथित भेदभाव और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि जिस देश का अपना रिकॉर्ड ऐसा हो, उसे दूसरे देशों के अल्पसंख्यकों पर सवाल उठाने से पहले अपने यहां की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए.
कश्मीरी पंडितों के पलायन के मुद्दे पर पाक को घेरा
कश्मीर में कथित जातीय सफाए के पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय राजनयिक ने 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को उनके घर छोड़ने के लिए मजबूर किया और इन आतंकियों को पाकिस्तान ने हथियार, प्रशिक्षण और सीमा पार से मदद दी. त्यागी ने यह भी कहा कि बाद के वर्षों में इन्हीं आतंकी संगठनों ने अलग-अलग समुदायों के कश्मीरियों को निशाना बनाया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे. भारत का आरोप है कि ऐसे संगठनों को पाकिस्तान से समर्थन मिलता रहा है.
पीओके का जिक्र कर की पाक की खिंचाई
भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. त्यागी ने जून से अब तक नागरिकों की मौत, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में छात्रों की गिरफ्तारी और भोजन तथा दवाओं की आपूर्ति रोके जाने से जुड़ी रिपोर्टों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि जब परिषद के सामने ये मामले रखे गए, तब पाकिस्तान की ओर से जवाब में प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाया गया.
अपने विकास पर ध्यान दे पाकिस्तान
यूएन में पाकिस्तान को दिए अपने जवाब के अंत में त्यागी ने पाकिस्तान से अपने लोगों के विकास और आर्थिक स्थिति पर ध्यान देने को कहा. उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे देशों की जमीनों पर दावा करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने से पाकिस्तान की समस्याएं हल नहीं होंगी. उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार परिषद में की जाने वाली राजनीतिक बयानबाजी से पाकिस्तान की आर्थिक परेशानियां या उसके कर्ज की समस्या दूर नहीं होगी.