9/11 से पनपी थी यारी, फिर क्या हुई गद्दारी, कैसे टूटा पुतिन का दिल?
अमेरिका पर जब 9/11 हमला हुआ, तब पुतिन वो पहले विदेशी नेता थे, जिन्होंने मदद का हाथ बढ़ाया था. इसके बाद भी पुतिन ने सकारात्मक रवैया जारी रखा. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ, जो दोनों देशों के रिश्ते तल्ख हो गए.
9/11 US Attack: 11 सितंबर 2001. इतिहास में दर्ज ये तारीख ना तो अमेरिका कभी भूल सकता है और ना ही दुनिया. पच्चीस साल बाद भी, 9/11 का असर जियोपॉलिटिक्स पर बना हुआ है. इन हमलों में न सिर्फ लगभग 3,000 लोगों की जान गई, बल्कि इसने पश्चिम और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टकराव की स्थिति भी पैदा कर दी. अब, पच्चीस साल बाद, पश्चिम और रूस यूक्रेन युद्ध और दूसरे मुद्दों पर आमने-सामने हैं. लेकिन हालात हमेशा इतने खराब नहीं थे.
आतंकवाद से लड़ाई में आगे था रूस
सोवियत संघ के टूटने के बाद, रूस पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते सुधारने में दिलचस्पी ले रहा था. 9/11 के बाद, पश्चिमी देश और रूस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे. iNews के मुताबिक, 9/11 के बाद व्लादिमीर पुतिन पहले विदेशी नेता थे, जिन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को फोन करके समर्थन देने की पेशकश की थी. टीवी पर दिए गए एक भाषण में पुतिन ने कहा, 'रूस की ओर से, मैं अमेरिकी लोगों से कहना चाहता हूं - हम आपके साथ हैं.' पश्चिम के साथ रूस के रिश्ते कैसे बदले? जब अमेरिका और उसके सहयोगियों ने अल-कायदा को पनाह देने के लिए तालिबान को सत्ता से हटाने के लिए अफगानिस्तान पर हमला किया, तो रूस ने मदद की थी.
अमेरिका को रूस ने दी थी जानकारी
अल-कायदा ने ही 11 सितंबर के हमलों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया था. रूस ने अफगानिस्तान के बारे में अमेरिका के साथ अहम जानकारी साझा की थी. iNews के मुताबिक, पुतिन ने इस इलाके में अमेरिकी बेस बनाने पर भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी. रूस ने अपना रुख क्यों बदला 2003 में अमेरिका के इराक पर हमले के बाद हालात बदल गए. बगदाद में रूस के बड़े आर्थिक हित थे. अमेरिका ने 2003 में इस दावे के आधार पर इराक पर हमला किया था कि देश के पास बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार (WMD) हैं, जिनका इस्तेमाल पश्चिमी ठिकानों के खिलाफ किया जा सकता है. बाद में ये दावे गलत साबित हुए. हालांकि, तब तक हालात बदलने में बहुत देर हो चुकी थी.
फिर अमेरिका ने कर दी बड़ी गलती
2023 में, टोनी ब्लेयर के विदेश नीति सलाहकार सर डेविड मैनिंग, जो बाद में इराक युद्ध के दौरान वॉशिंगटन में राजदूत बने ने एक इंटरव्यू में कहा कि पुतिन इस बात से नाराज थे कि 9/11 के बाद अमेरिका के साथ मॉस्को के सहयोगपूर्ण संबंधों के बावजूद इराक में 'रूस के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा था'. पुतिन इराक पर हमले को इस बात के उदाहरण के तौर पर देखते थे कि वॉशिंगटन सत्ता बदलने को सही ठहराने के लिए WMD के खतरे का इस्तेमाल कर रहा था. टोनी ब्लेयर के चीफ ऑफ स्टाफ जोनाथन पॉवेल ने 2023 में iNews को बताया कि इराक ही वह वजह थी जिसने पुतिन के साथ हमारे रिश्तों को खराब कर दिया. कई सालों में, कई वजहों से रूस और अमेरिका के रिश्ते खराब होते गए.
थिंक टैंक ब्रुकिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन मूल वजहों के बारे में मॉस्को के नजरिए में इराक युद्ध, बाल्टिक देशों तक NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) का विस्तार, एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल संधि से वॉशिंगटन का एकतरफा हटना और यूरेशिया में 'कलर रिवोल्यूशन' (रंग क्रांतियों) के लिए अमेरिका का समर्थन शामिल है. कई दशकों बाद, रूस और पश्चिमी देश आमने-सामने हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच को एक ऐसे 'जीरो-सम गेम' के तौर पर देखते हैं जिसमें सिर्फ एक ही विजेता होता है.