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एक झटके में 'खलीफा' का किला ढहाने की तैयारी! तुर्किये के खिलाफ ग्रीस ने बनाया 'शॉक अटैक प्लान'? अंकारा में फैला पैनिक

Greece’s ‘first strike’ plan against Türkiye: तुर्किये की बढ़ती आक्रामकता को सहते आ रहे ग्रीस का धैर्य अब जवाब दे गया है. उसने तुर्किये को जवाब देने के लिए अपना खतरनाक ‘फर्स्ट स्ट्राइक’ प्लान तैयार कर लिया है. इस प्लान के मुताबिक, खतरा महसूस होने पर ग्रीस अटैक का इंतजार करने के बजाय उस पर खुद ही हमला बोल देगा.

Written By Devinder Kumar
Published: Sep 29, 2026, 05:15 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 05:28 AM IST
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Greece’s shock attack plan against Türkiye: मुस्लिम दुनिया का खलीफा बनने की कोशिश कर रहा तुर्किये अपने ही क्षेत्र में घिरता जा रहा है. भारत, इजरायल के खुले सपोर्ट के बाद अब उसके प्रतिद्वंद्वी देशों आर्मेनिया, साइप्रस और ग्रीस के तेवर आक्रामक होते जा रहे हैं. आर्मेनिया जहां भारत से खरीदे गए आकाश एयर डिफेंस सिस्टम के साथ युद्धाभ्यास कर रहा है. वहीं साइप्रस के राष्ट्रपति ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में तुर्किये के अवैध कब्जे पर उसे खरी-खोटी सुनाई थी. अब तुर्किये के खिलाफ ग्रीस बड़ा वॉर प्लान सामने आया है, जिसके बाद से तुर्किये के मीडिया हलकों में हड़कंप मचा है. वहां पर इसे 'शॉक अटैक प्लान' (अचानक हमले की योजना) करार दिया जा रहा है.  

खतरा होते ही तुरंत जवाब देगा ग्रीस

टुडे प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीस ने तुर्किये के खिलाफ कथित रूप से 'चार-चरणीय प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक' (पहले हमला करने की नीति) बनाई है. इस नीति के अनुसार, अगर ग्रीस को लगा कि तुर्किये उस पर हमला करने की साजिश रच रहा है तो वह उसका अटैक होने का इंतजार नहीं करेगा. इसके बजाय वह उस पर पहले हमला बोलकर तहस-नहस कर देगा.

रिपोर्ट के अनुसार, यह प्लान तब एक्टिव होगा, जब तुर्किये अपनी सेना को तटीय इलाकों की तरफ मूव करना शुरू कर दे. वह अपने एंफीबियस जहाजों में हथियारों और दूसरे साजो-सामान को लोड करने लगे और अपने मिसाइल सिस्टम को हाई अलर्ट पर रख दे. अगर ग्रीस सरकार को ऐसी हरकतों की जानकारी मिली तो वह इसे एक आसन्न हमले के रूप में देखेगी. ऐसी स्थिति में ग्रीस हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय खुद पहले हमला करने का विकल्प चुनेगा.

बना रखा है 4 सूत्रीय स्ट्राइक प्लान

निगरानी और सैटेलाइट इंटेलिजेंस

इस योजना के पहला चरण में लगातार तुर्किये पर पैनी नजर रखी जाएगी. ग्रीस अपनी उन्नत सैटेलाइट क्षमताओं और अपने क्षेत्रीय- पश्चिमी सहयोगियों से मिलने वाली खुफिया जानकारी के जरिए तुर्की सेना की हर गतिविधि पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा.

इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ब्लैंडिंग

टैक्निकल स्ट्राइक शुरू होने से ठीक पहले, ग्रीस की सेना तुर्की के रडार नेटवर्क को जाम करने और उनके कमांड-एंड-कंट्रोल कम्युनिकेशंस को बाधित करने का प्रयास करेगी. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के जरिए तुर्किये की फौजों को 'अंधा' और 'बहरा' बनाने की रणनीति अपनाई जाएगी ताकि वे समय पर प्रतिक्रिया न दे सकें.

सटीक हवाई और मिसाइल हमले

तीसरे चरण में, ग्रीस के फाइटर जेट्स अचानक तुर्की के दलामन, बालिकेसिर और सिग्लि जैसे मुख्य एयरबेस पर ताबड़तोड़ हवाई हमले करेंगे. इसके साथ ही, ग्रीस के द्वीपों पर तैनात मिसाइल सिस्टम से तुर्किये के उन लैंडिंग जहाजों को बंदरगाहों के अंदर ही निशाना बनाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल किसी भी संभावित आक्रमण के लिए होना था.  

कूटनीतिक दबाव और युद्धविराम

इस त्वरित और अचंभित कर देने वाले हमले के तुरंत बाद, अमेरिका, नाटो और यूरोपीय संघ (EU) पर कूटनीतिक दबाव बनाया जाएगा कि वे तत्काल युद्धविराम लागू करवाएं. इस प्रकार, ग्रीस युद्ध के मैदान में मनोवैज्ञानिक और सामरिक बढ़त हासिल करने के बाद एक मजबूत स्थिति में टेबल पर बैठेगा.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रकार का सुनियोजित पहला हमला मात्र 24 घंटे के भीतर युद्ध के परिणाम को तय कर सकता है. मजे की बात ये है कि ग्रीस सरकार ने इस रिपोर्ट का न तो पुष्टि की है और न ही खंडन. वह इस पर चुप्पी साधे बैठी है.

'पैनिक मोड' में तुर्किये मीडिया

यह रिपोर्ट सामने आने के बाद से तुर्की के मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और डिफेंस एनालिस्ट्स 'पैनिक मोड' में है. इसके खिलाफ देश भर में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. तुर्किये की मीडिया ने इसे केवल एक काल्पनिक लेख मानने से इनकार कर दिया है, बल्कि इसे ग्रीक सैन्य प्रतिष्ठान की उस खतरनाक मानसिकता का प्रमाण बताया है, जो तुर्किये की बढ़ती कथित ताकत से डरी हुई है.

अचानक हमले का सता रहा डर

तुर्की के डिफेंस एक्सपर्टों का मानना है कि इस तरह की रिपोर्ट्स का मकसद उसकी जनता और सेना के मन में यह मनोवैज्ञानिक डर बिठाना है कि ग्रीस क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में रक्षात्मक रहने के बजाय आक्रामक रुख अपना सकता है. इस रिपोर्ट पर ग्रीस सरकार की चुप्पी उसके डर को और बढ़ा रही है. रिपोर्ट में संवेदनशील एयरबेसों का जिक्र होने से उनकी सुरक्षा समीक्षा तेज हो गई है. साथ ही,  किसी भी संभावित प्री-एम्प्टिव खतरे को बेअसर करने के लिए वहां पर एयर डिफेंस सिस्टम को अधिक मुस्तैद किया जा रहा है.  

'फर्स्ट स्ट्राइक' डॉक्ट्रिन की बहस

वहीं इंटरनेशनल रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लेख अक्सर सुरक्षा बहसों को हवा देने के लिए रणनीतिक थिंक-टैंक या मीडिया ट्रायल का हिस्सा होते हैं. ऐसा करे दुश्मन खेमे को जताया जाता है कि वह भी जवाब देने के लिए तैयार है. अगर उसने कोई गड़बड़ की तो वह रक्षात्मक रहने के बजाय उस पर ताबड़तोड़ स्ट्राइक करके उसे कड़ा जवाब दे सकता है.

उनका मानना है कि ग्रीस की 'प्री-एम्प्टिव' स्ट्राइक से पूर्ण युद्ध का खतरा हो सकता है. ऐसा होने पर तुर्किये भी अपनी मिसाइल और ड्रोन पावर से ग्रीस पर जवाबी हमला बोल सकता है. जिससे क्षेत्र एक बड़े युद्ध में फंस सकता है.

दोनों में किस बात को लेकर है विवाद?

बताते चलें कि तुर्किये और ग्रीस के बीच लंबे अरसे से सीमा विवाद चल रहा है. दोनों के बीच एक द्वीप को लेकर तनाव बना हुआ है. ग्रीस के इस द्वीप पर तुर्किये का अवैध कब्जा है, जिसे वापस लेने का ग्रीस अक्सर बयान देता रहता है. हालांकि, तुर्किये की सैन्य ताकत की वजह से वह अब तक बल से उसे वापस लेने की हिम्मत नहीं कर पाया है. लेकिन अब इजरायल और भारत का सक्रिय सैन्य सहयोग मिलने से वह भी धीरे-धीरे ताकतवर होता जा रहा है.

खास बात ये है कि दोनों मुल्क नाटो के सदस्य हैं. ऐसे में अगर इनमें जंग छिड़ती है तो नाटो भी चाहकर कुछ नहीं कर पाएगा और उन्हें वह जंग खुद ही लड़नी होगी. ऐसे में जिस मुल्क सहयोगी राष्ट्र ज्यादा होंगे और उसे सैन्य सहायता ज्यादा मिलेगी, वह विजयी बनकर बाहर आ सकता है. 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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