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फ्रांस में सितंबर क्रांति चल रही है. स्कूलों में घटती सुविधाओं और बढ़ती परेशानी को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतरे. स्कूलों की बदहाल स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन मंगलवार को कई शहरों में हिंसक हो गया. देशभर में 400 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग हैं. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए.
पिछले हफ्ते पेरिस से शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के कई हिस्सों में फैल चुका है. छात्रों ने सैकड़ों हाई स्कूलों के एंट्री गेट्स को बंद किया. शिक्षा मंत्रालय के मुतबिक, मंगलवार को करीब 400 स्कूलों में प्रदर्शन हुआ, जबकि लगभग 40 स्कूलों में पूरी तरह नाकाबंदी की गई.
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में क्लासेज में छात्रों की संख्या कम करना, टीचर्स और अन्य स्टाफ की कमी दूर करना और स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है. छात्रों ने लंबे और थकाऊ टाइमटेबल के अलावा हाल की गर्मी के दौरान क्लासेज में ज्यादा टेंपरेचर को लेकर भी नाराजगी जताई है.
मीडिया आउटलेट ली मोंडे की खबर के मुताबिक, उत्तरी शहर लील में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगा दी और पुलिस पर बोतलें, पत्थर और अन्य चीजें फेंकीं. पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया. बोर्डो, रेन्न, नांते, मार्सेय और अन्य शहरों में भी छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आईं.
तेज हुईं पुलिस के साथ झड़पें
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार को ही 164 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और करीब 180 स्कूलों पर असर पड़ा था. मंगलवार को आंदोलन और फैल गया. पुलिस के साथ झड़पों में अब तक दर्जनों सुरक्षाकर्मी और छात्र घायल हुए हैं.
एक ओर छात्र आंदोलनरत हैं तो वहीं फ्रांस में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकार की बजट योजनाओं के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार की प्रस्तावित बजट योजना में सार्वजनिक खर्च में कटौती शामिल है. शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग भी हड़ताल में शामिल हुआ है.
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने स्कूलों के आसपास आगजनी और हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि छात्रों, शिक्षकों और पुलिस को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को ठीक नहीं ठहराया जा सकता. दूसरी ओर, छात्र संगठनों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए.
छात्र संगठन के अध्यक्ष रियाद रानी ने कहा कि कई क्लासेज में 32 से 35 तक छात्र हैं और टीचर्स व अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है. उनके अनुसार, छात्रों का मकसद बेहतर और अधिक समान शैक्षणिक परिस्थितियों की मांग करना है.
इस बीच, सरकार और विपक्ष के बीच भी प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. प्रधानमंत्री लेकोर्नू और वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों के बीच प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके को लेकर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आए हैं.