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New Secretary General of Makkah Pact: पाकिस्तान ने मक्का पैक्ट की व्यवस्था की देखरेख के लिए एक रिटायर आर्मी जनरल की महासचिव के तौर पर भर्ती की है. ये रिटायर जनरल फेल्ड मार्शल आसिम मुनीर का चेला है. महासचिव की भर्ती उस वक्त हुई है, जब रियाद में मक्का पैक्ट के लिए खुलने वाले ऑफिस की शुरुआत तक नहीं हुई है. मतलब बिना ऑफिस खुले ही महासचिव की नियुक्ति हो गई है.
नकाबपोश पाकिस्तान के फरेब की ये सबसे नई तस्वीर है. मुनीर का चेला नौमान महमूद अब मक्का पैक्ट के तहत रियाद के सचिवालय में पहले महासचिव के रूप में नियुक्त हुआ है. इसकी काबिलियत का परचम वहां तक पहुंचता है, जहां मुनीर के जूते होते हैं.
अब आपको मुनीर की तरह बुजदिल और कायर इस रिटायर्ड जनरल की पूरी एबीसीडी बताते हैं. जिससे आपको पता चल जाएगा कि मक्का पैक्ट के पहले महासचिव के तौर पर ये क्या-क्या करेगा.
रियाद में स्थापित हो रहे गठबंधन के सामान्य सचिवालय का नेतृत्व करेगा. मक्का पैक्ट के तीन देशों के बीच कॉर्डिनेशन का काम देखेगा. तीनों सदस्य देशों के बीच मक्का पैक्ट की प्रगति का काम देखेगा.
मक्का पैक्ट करने से पाकिस्तान की समझ है कि उसे हीरा हाथ लग गया है. लेकिन सच ये है कि सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने इस एग्रीमेंट की पोल खोलकर रख दी है. अभी तक पाकिस्तान और तुर्किए ने सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं दी है.
दोनों देश सिर्फ जुबानी तौर पर सऊदी अरब का समर्थन कर रहे हैं. जाहिर है मक्का डिफेंस एग्रीमेंट के भविष्य पर अभी से गंभीर सवाल उठने लगे हैं. लिहाजा सचिवालय का कागजी शेर बनकर भी नौमान महमूद क्या करेगा.
वैसे आसिम मुनीर ने नौमान महमूद को मक्का पैक्ट का पहला कमांडर बनाकर ये साबित करने की कोशिश की है कि शहबाज शरीफ एंड कंपनी उसकी उंगलियों पर नाचने वाली सरकार है. वह मुल्क की अवाम की हुकूमत नहीं है.
नौमान महमूद मुनीर के ही शहर रावलपिंडी का रहने वाला है. रिटायरमेंट से ठीक पहले इस नाकाबिल लेफ्टिनेंट जनरल को दो सितारा अफसर बनाकर DG-ISI बनाया गया था. इसके बाद मुनीर ने अपने इस करीबी को रावलिपंडी आर्मी हेडक्वार्टर में कम्युनिकेशन का IG बनाया गया.
रिटायरमेंट के बाद ये नौमानी महमूद रावलपिंडी के सब्जजार कॉलोनी में मच्छर मारते दिन बीता रहा था. अब मुनीर की मेहरबानी से मक्का पैक्ट का महासचिव बनने जा रहा है. उस मक्का पैक्ट का जिसकी जमीन पर ना कोई अहमियत दिखती है ना औकात.
7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. रक्षा समझौते का आर्टिकल पांच कहता है कि तीनों देशों में से किसी एक
पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान जोर-जोर से चिल्लाया कि हमने नैटो की तरह सैनिक संगठन खड़ा कर लिया है.
हालांकि, सच कुछ दिनों में ही सामने आ गया जब सऊदी अरब को ईरान ने बमों से पाट दिया. यमन के हूतियों ने सऊदी अरब की जीना मुहाल कर दिया. पाकिस्तान और तुर्किए मुंह बाए देखते रहे हैं. ऐसे में आप समझ गए होंगे कि नौमान महमूद महज नाम का ही महासचिव होगा. इस बात की हकीकत मुनीर भी जानता है और उसका चेला नौमान महमूद भी.
(ब्यूरो रिपोर्ट, ज़ी मीडिया)