मिडटर्म में मिली हार तो ट्रंप चलाएंगे 'वीटो' तलवार: राष्ट्रपति की चेतावनी से सहमा देश! क्या कहता है अमेरिकी संविधान?
अगर मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की हार होती है, तो उन्होंने 'वीटो पावर' का इस्तेमाल करने की बात कही है. जब एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे नतीजों का सम्मान करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वे ऐसा तभी करेंगे, जब चुनाव ईमानदारी से हुए हों.
अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. सर्वे में तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी पिछड़ती हुई नजर आ रही है. हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जीत का पूरा भरोसा है. वहीं, अगर वह चुनाव नहीं जीत पाते तो क्या होगा? इस सवाल पर उनके (राष्ट्रपति ट्रंप) बयान ने खलबली मचा दी है. 'वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, जब एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या वे नतीजों का सम्मान करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वे ऐसा तभी करेंगे, जब चुनाव ईमानदारी से हुए हों. अब सवाल यह है कि चुनाव में निष्पक्षता जांचने के लिए किस पैमाने का इस्तेमाल करेंगे? ट्रंप ने यह नहीं बताया कि यह कैसे तय होगा कि चुनाव ईमानदारी हुए हैं या नहीं. हर चुनाव में ट्रंप का यही रवैया देखने को मिला है. 2016 के चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि अगर वह जीतते हैं, तो वह नतीजों को स्वीकार कर लेंगे. इसी तरह से 2020 से पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें देखना होगा कि क्या होता है? चुनाव के नतीजे आने के बाद में उन्होंने जो बाइडेन के सामने हार मानने से इनकार कर दिया और दर्जनों ऐसे मुकदमे दायर किए, जिनमें उन्हें सफलता नहीं मिली.
चुनाव में धोखाधड़ी की सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम
ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि जो कोई भी पिछले चुनावों या इस मध्यावधि चुनाव में हुई धोखाधड़ी की जानकारी देगा, उसे 1 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा. उन्होंने इसके साथ एक शर्त भी रख दी है. शर्त के मुताबिक, आरोपियों की गिरफ्तारी हो और उन्हें दोषी ठहराया जाए. मतलब साफ है इनाम तभी मिलेगा, जब आरोपी को दोषी ठहरा दिया जाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा को व्हाइट हाउस और उनके सहयोगियों ने भी आगे बढ़ाया है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता लॉरेन बिस ने अंग्रेजी न्यूज एजेंसी 'न्यूजवीक' से कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प सिर्फ निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव चाहते हैं. डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार पर बड़ा गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वे वोटर आईडी और नागरिकता के सत्यापन का विरोध करके जनता का भरोसा कम कर रहे हैं.
मिडटर्म में हार से ट्रंप को कितना फर्क पड़ेगा?
वहीं, अगर मिडटर्म इलेक्शन में रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार की हार होती है, तो अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत खतरे में पड़ जाएगा. इससे ट्रम्प के लिए अपने फैसलों को लागू करना मुश्किल हो सकता है. बजट या कोई भी कानून पास कराने के लिए विपक्ष के सहयोग की जरूरत पड़ा करेगी. इतना ही नहीं, डेमोक्रेट्स के पास बहुमत होने पर वे ट्रम्प के प्रस्तावों को रोक सकते हैं और उनके प्रशासन के कामकाज की जांच भी बढ़ा सकते हैं. इसको लेकर जब ट्रम्प से पूछा गया कि अगर 'हाउस' पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हो जाता है, तो फिर वह उनके साथ कैसे काम करेंगे? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि देश कोई न कोई रास्ता निकाल लेगा. ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अगर वह चुनाव हार गए, तो उनके पास प्लान-बी भी तैयार है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इशारों-इशारों में अपनी 'वीटो पावर' इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं.
क्या मिडटर्म चुनाव के नतीजों को पलट सकते हैं ट्रंप?
अमेरिका में मिडटर्म का इलेक्शन में कोई 'इलेक्टोरल कॉलेज' नहीं होता और न ही कोई सर्टिफिकेशन प्रक्रिया होती है. यह पूरी प्रक्रिया राज्यों की ओर संचालित होती है और अंत में कांग्रेस द्वारा पूरी की जाती है. इस चुनाव से राष्ट्रपति को कोई फर्क नहीं पड़ता, बस देश की संसद (कांग्रेस) में पार्टी का प्रतिनिधित्व तय होता है. मुख्य चुनाव के दिन से कुछ हफ्ते पहले ही कई राज्यों में मतदान केंद्र खुल जाते हैं, ताकि लोग भीड़ से बच सकें. मतदाता डाक के जरिए भी लोग अपना वोट भेज सकते हैं. मतों की गिनती स्थानीय स्तर से शुरू होती है. स्थानीय अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर ही सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की ओर से रिजल्ट घोषित किया जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति के पास मिडटर्म चुनाव के नतीजों को खारिज करने, रद्द करने या बदलने की कोई कानूनी या संवैधानिक शक्ति नहीं होती है.
अमेरिकी कानून क्या कहता है?
अमेरिकी संविधान के मुताबिक, मिडटर्म चुनाव कराने का अधिकार स्पष्ट रूप से राज्यों और कांग्रेस के पास है. 'ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस' की रिपोर्ट के मुताबिक, आपातकाल की घोषणा होने पर भी, चुनाव प्रक्रिया का नियंत्रण राष्ट्रपति के हाथों में नहीं जा सकता. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि आपातकाल की घोषणा होने पर भी राष्ट्रपति को चुनाव प्रशासन अपने नियंत्रण में लेने का संवैधानिक अधिकार नहीं मिल सकता, क्योंकि यह मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है. अमेरिकी संविधान के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास चुनाव के नतीजों को खारिज करने, रद्द करने या बदलने की कोई शक्ति नहीं है. अब सवाल यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 'वीटो पावर' का इस्तेमाल करने की बात क्यों कही? विशेषज्ञों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक की ओर से बनाए जाने वाले कानूनों को लेकर राष्ट्रपति ने इस तरह का बयान दिया होगा.
ये भी पढ़ें- मॉस्को पर होने वाला है बड़ा हमला! युद्ध के बीच पुतिन से दोस्ती निभा रहे ट्रंप, अमेरिका ने रूस को किया अलर्ट