चांद-मंगल का AI नक्शा और अंतरिक्ष में न्यूक्लियर प्लांट: जिनपिंग के स्पेस प्लान से ट्रंप-पेंटागन परेशान
स्पेस में चीन ने चक्कर लगाते वक्त सैटेलाइट में 'ऑर्बिटल रिफ्यूलिंग' कर दुनिया को हैरान कर दिया है. पढ़िए मून पर एटमी प्लांट से मंगल के एआई नक्शे और अंतरिक्ष में इंसानी प्रजनन के एक्सपेरिमेंट तक, चीन के महा-स्पेस प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी.
एआई से लेकर स्पेस तक चीन, हर तकनीक में अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. इसी चुनौती को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ये कहना पड़ा कि चीन के साथ एआई और स्पेस मिशन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में काम करना अमेरिका के लिए खतरनाक हो सकता है. ट्रंप की नजर में चीन, इन क्षेत्रों में साझेदारी कर अमेरिका की उन सीक्रेट टेक्नोलॉजी को हासिल कर सकता है, जो अब तक किसी के पास नहीं है.
ट्रंप का ये बयान, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिकी दौरे के बाद आया. इसके साथ एक ऐसी खबर भी चीन से आई, जिस पर ट्रंप और उनके स्पेस साइंटिस्ट चौंक सकते हैं. चीन ने अंतरिक्ष में वो कमाल कर दिया जो अमेरिका के अलावा किसी ने भी सोचा नहीं था. चीन अब अंतरिक्ष में भी ऑर्बिटल रीफ्यूलिंग कर सकता है यानी चीन किसी सैटेलाइट के अपने ऑर्बिट में चलते हुए उसमें दोबारा से ईंधन भर सकता है.
चीन कर चुका है बड़ा कारनामा
वैसे तो ये तकनीक अमेरिका के पास भी है, लेकिन अभी वो टेस्ट लेवल या उससे आगे है. लेकिन चीन ने अपने स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे अपने सैटेलाइट में ईधन भरने का कारनामा पहले कर लिया. चीन ने जिस तरह से चक्कर काटते सैटेलाइट में ईंधन भरा, उससे अंतरिक्ष मिशनों में बड़ी क्रांति आ जाएगी. अब कोई सैटेलाइट ईंधन के बिना बेकार नहीं होगा.
चीन के लिए ऑर्बिटल रीफ्यूलिंग की कामयाबी इसलिए भी अहम है, क्योंकि स्पेस में उसके कई बड़े मिशन चल रहे हैं. चीन अपना अलग स्पेस स्टेशन बना चुका है, जो मौजूदा स्पेस स्टेशन के नाकाम होने के बाद भी चलता रहेगा. इसके साथ चीन स्पेस में इंसानों के जन्म, खेती-बाड़ी और चांद पर बस्ती भी प्लान कर रहा है. आज हम आपको बताएंगे कि क्या है चीन का पूरा स्पेस प्लान, कैसे वो इस क्षेत्र में भी अमेरिका को पीछे छोड़ रहा है और आने वाले दिनों में वो क्या बड़ा करने वाला है?
अपनी लोक कथाओं के हवाले से चीन चंद्रमा को अपना पुश्तैनी ग्रह मानता है, तो मंगल को अपना सबसे महात्वाकांक्षी डेस्टिनेशन कहता है. ऐसे में चीन ने अपने स्पेस मिशन को ऐसे तैयार किया है कि अगले तीन से चार साल में चीन की एक मुट्ठी में चंद्रमा होगा तो दूसरे हाथ में मंगल की मिट्टी. क्योंकि चीन ने अपने महत्वाकांक्षी मिशन ऑर्बिटल रीफ्यूलिंग में बड़ी कामयाबी हासिल की है और वो इसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा रहा है.
चीन ने बीते साल बेहद सीक्रेट तरीके से अपने सर्विसिंग एयरक्राफ्ट शिजियान-25 के जरिए अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे 'बेईडू-2 G7' सैटेलाइट में ईधन भरने में कामयाबी पाई. इस सीक्रेट मिशन की रिपोर्ट करीब डेढ़ साल बाद आई है.
142 किलो ईंधन किया गया ट्रांसफर
इस रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस में चीनी नेविगेशन सैटेलाइट की 'इन-ऑर्बिट रीफ्यूलिंग' कामयाब रही. इसकी पुष्टि ‘चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज' की स्टडी रिपोर्ट में भी की गई है. फरवरी 2025 में 'बेईडू-2 G7' नाम के सैटेलाइट में 142 किलोग्राम ईंधन ट्रांसफर किया. स्पेस में हुई रिफ्यूलिंग की वजह से सैटेलाइट के काम करने की अवधि 8 साल बढ़ गई. ऑर्बिट में ही ईंधन भरने से सैटेलाइट रिप्लेसमेंट का खर्च काफी कम हो जाता है. इस टेक्नोलॉजी ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद US स्पेस कमांड के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि स्पेस में ईंधन भरने की क्षमता से ऑर्बिट में होने वाले टकराव के दौरान दुश्मन को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है.
हालांकि, अमेरिका की स्पेस फोर्स चीन की इस रिपोर्ट को खारिज कर रही है. इसका आधार यूएस स्पेस फोर्स ने पिछले डेढ़ साल का ऑर्बिटल ट्रैकिंग डेटा को बनाया है, जिसमें चीन की तरफ से स्पेस रीफ्यूलिंग जैसी कोई गतिविधि दर्ज नहीं हुई. लेकिन चीनी मीडिया अपनी रिपोर्ट पर कायम है, बल्कि कई प्लेटफॉर्म्स पर यहां तक लिखा गया है कि अमेरिका चीन की बड़ी कामयाबी को खारिज करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन अमेरिकी स्पेस फोर्स क्या-क्या खारिज करेगी? चीन का स्पेस मिशन कई योजनाओं से भरा हुआ है.
चीन ने दुनिया को चौंकाया था
बीते अगस्त महीने की बात है, चीनी वैज्ञानिकों ने चंद्रमा का पूरा भौगोलिक नक्शा बनाकर दुनिया को चौंका दिया था. इस नक्शे में ऐसी-ऐसी डिटेल थी, जहां इंसान अभी तक पहुंचा नहीं. बड़े-छोटे क्रेटर, पहाड़, मैदान और अलग-अलग इलाकों के नाम भी इस नक्शे पर चीन ने दर्ज किए हैं. अब चीनी वैज्ञानिकों का दावा है कि अगले 2 साल में वो मंगल ग्रह का पूरा भौगोलिक नक्शा तैयार कर लेगा.
यानी ड्रैगन की नजर अब चांद से आगे बढ़कर लाल ग्रह पर जम चुकी है. इसके लिए चीन 5 साल से तियानवेन मिशन चला रहा है. अब चीन इसके तीसरे वर्जन के साथ मंगल पर अपनी बादशाहत कायम कर लेगा. चीन ये नक्शा अपने अगले मार्स मिशन तियानवेन-3 के जरिए बनाएगा. ये भौगोलिक नक्शा मंगल की पूरी सतह को कवर करेगा. न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, ये दुनिया का पहला एआई आधारित जियोलॉजिकल नक्शा होगा. इसके जरिए वैज्ञानिक मंगल की जमीन की संरचना और इतिहास को गहराई से समझ सकेंगे. चीन की ये एआई मैपिंग तकनीक भविष्य में चंद्रमा, शुक्र और एस्टेरॉयड के अध्ययन में काम आएगी.
नक्शे को बनाने में अपने पहले मार्स रोवर झूरोंग से मिले डेटा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करेगा. झूरोंग ने मंगल की सतह पर लगभग एक साल तक एक्टिव रहकर रिसर्च की थी. दरअसल चीन का मार्स रोवर झूरोंग, मई 2021 में तियानवेन-1 मिशन के तहत मंगल की जमीन पर उतरा था. इस लैंडिंग के साथ चीन मंगल पर रोवर उतारने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया था.
तियानवेन-3 लॉन्च करने की तैयारी में चीन
चीन साल 2028 के अंत में अपने तियानवेन-3 मिशन को अंतरिक्ष में लॉन्च करने की फुल तैयारी कर रहा है. इस मिशन का मुख्य लक्ष्य मंगल की जमीन से कम से कम 500 ग्राम सैंपल जमा करना है. मंगल के इन नमूनों को साल 2031 तक सुरक्षित धरती पर वापस लाने का टारगेट रखा गया है. अगर चीन इस मिशन में सफल रहता है, तो वह ऐसा कारनामा करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. यानी वो अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा.
मंगल मिशन को पूरा करने के लिए चीन दो अलग-अलग रॉकेट लॉन्च करने वाला है. पहले एक स्पेसक्राफ्ट में एक लैंडर और एसेंट व्हीकल भेजेगा, जो मंगल की सतह से पत्थर और मिट्टी के टुकड़े जमा करेगा. जबकि दूसरे स्पेसक्राफ्ट में एक ऑर्बिटर और रिटर्न मॉड्यूल होगा, जो सैंपल को सुरक्षित धरती तक लाएगा.
चीन का ये मिशन अगर कामयाब होता है, तो स्पेस रेस चीन अमेरिका से कई कदम आगे खड़ा हो जाएगा. यहां दिलचस्प बात ये भी है कि चीन के स्पेस मिशन में बड़ा साझेदार है रूस. समझिए स्पेस में दोनों की जुगलबंदी कैसी है.
क्या है रूस-चीन का प्लान?
पिछली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई थी, तो उसमें एक बात खास हुई थी. वो बात थी रूस और चीन के साझे मून मिशन को लेकर.
चीन और रूस की योजना है अगले 7 से 8 साल में चंद्रमा पर परमाणु बिजली का प्लांट लगाने का. चीन ने इसका खाका रूसी स्पेस एजेंसी को 5 साल पहले ही दे दिया है. अब दोनों देशों की एजेंसियां इस मानवररहित एटमी प्लांट का थ्री-डी प्रिंट करने में जुट गई हैं.
अगर ये प्लान कामयाब हुआ, तो चीन पर धरती की तरह ही बिजली जगमगाएगी. इस प्रोजेक्ट में चीन का बनाया एक मैप भी बेहद मददगार होगा. कहां न्यूक्लियर प्लांट लगेगा, कहां रिसर्च सेंटर बनाया जा सकता है और कहां स्थायी बस्ती बसाने लायक जगह है.
चीन का मून मिशन, कितना दोहन?
- चांद पर बिजली बनाने के साथ मूल मकसद खनिजों का दोहन है.
- चांग-ई लैंडर के जरिए चीन ने चंद्रमा के खनिजों की डिटेल हासिल कर ली है.
- अगले 10 साल में चीन ‘रेयर अर्थ मटेरियल’ की खुदाई करने में सक्षम होगा.
- चांद के ‘रेयर अर्थ मटेरियल’ की कीमत अरबो डॉलर में आंकी जाती है.
- इसके अलावा चीन चंद्रमा से दूसरे ग्रहों की उड़ान सुविधा बनाने की तैयारी में है.
इस मिशन के साथ चीनी वैज्ञानिकों ने मून क्लॉक में भी संशोधन किया है. चीनी वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के विकास के टाइमलाइन यानी ‘चंद्र घड़ी’ में बड़ा संशोधन करते हुए पहले से ज्यादा सटीक बनाया है. इसमें चंद्रमा के हालिया इतिहास को पहली बार इतनी डिटेल के साथ कैटेगोराइज किया गया है.
चंद्रमा पर दबदबा बनाने की योजना के साथ चीन ने धरती पर कृत्रिम सूर्य भी तैयार कर लिया है. चीन का दावा है कि उसके आर्टिफिशियल सन प्रोजेक्ट में प्लाज्मा का तापमान 10 करोड़ डिग्री तक पहुंचा, जो असली सूर्य के तापमान से करीब 7 गुना ज्यादा है.
जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक चीनी वैज्ञानिकों के बहुत सारे सीक्रेट मिशन ऐसे हैं, जिनके बारे में बाहरी दुनिया को पता नहीं है. जैसे स्पेस वेपन और अंतरिक्ष में इंसानों की प्रजनन क्षमता पर रिसर्च. चीन अपना मिशन पूरा होने के बाद ये सबकुछ खुद बता चुका है.
ट्रंप-जिनपिंग और चीनी स्पेस स्टेशन
वैसे तो चीन जैसे देश के सीक्रेट मिशन के बारे में पता लगाना बेहद मुश्किल है, लेकिन अमेरिकी खुफिया जानकारी बताती हैं, कि चीन स्पेस में एक साथ कई मिशन पर काम कर रहा है. चीन ना सिर्फ अपना स्पेस स्टेशन तैयार कर चुका है, बल्कि ऐसी तकनीक भी विकसित कर रहा है, जिससे ना सिर्फ धरती पर निगरानी की जा सके, बल्कि जरूरत पड़े तो इस तकनीक के जरिए जमीन पर दुश्मन के मिसाइलों को हवा में ही मार गिरा सके.
अमेरिका के मन में एक डर तो चीन के हाइपरसोनिक मिसाइलों का भी है, जिसे फायर करने के बाद इसे रोकना बेहद मुश्किल है. अमेरिका का दावा है, कि चीन इसे नई स्पेस तकनीक के जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से को टारगेट कर सकता है.
स्पेस वेपन के साथ चीन जीरो ग्रेविटी में इंसानों की प्रजनन संभावना को परखने लिए भी प्रयोग शुरू कर दिए हैं. इस प्रयोग के नतीजे बेहद क्रांतिकारी हो सकते हैं. ऐसे नतीजे, जिनके सकारात्मक होने के बाद धरती सिर्फ इकलौती जगह नहीं रह जाएगी जहां पर इंसान पैदा होते और रहते हैं.
चीन के इस प्रयोग को 4 स्टेज में समझ सकते हैं:
1. मछली (सफल)
2 चूहे (सफल)
3. कृत्रिम मानव भ्रूण (प्रयोग जारी)
4. इंसान का जन्म (अंतिम लक्ष्य)
चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी के मुताबिक, चीन स्पेस में मानव प्रजनन की चीनी वैज्ञानिक एक पूरी प्रणाली तैयार कर रहे हैं, जो निचले वर्टेब्रेट यानी Zebrafish मछली स्तनधारी जीव चूहों से शुरू होकर कृत्रिम मानव भ्रूण तक पहुंच चुकी है. इसके जरिए ये देखा जा रहा है, कि माइक्रोग्रेविटी और स्पेस रेडिएशन के बीच इंसान का प्रजनन और भ्रूण की अवस्था के सामने क्या क्या चुनौतियां आती हैं और इससे कैसे निपटा जाएगा.