चीन के डिफेंस सेक्टर में काम करने वाले मिलिट्री इंजीनियर और डिजाइनर अपने स्टील्थ फाइटर जेट को और कारगर बनाने के लिए नई तकनीक पर काम कर रहे हैं. तैयारियों की बात करें तो, एक रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि चीनी शोधकर्ता J-20 के विंग्स यानी पंखों में शक्तिशाली रडार लगाना चाहते हैं. माना जा रहा है कि अगर चीन की कोशिश कामयाब हो गई तो पलक झपकने जितनी देर में हजारों फीट ऊपर उड़ रहे दुश्मन के एक-एक विमानों की सारी डिटेल पायलट और धरती पर उससे संपर्क बनाए हुए स्टाफ के स्क्रीन तक पहुंच जाएगी.
डिजाइन में प्रस्तावित बदलाव से आसमानी सरहदों की निगरानी में आसानी होने के साथ आसमान में छिपे किसी भी दुश्मन को तत्काल ढेर करने का ऑप्शन बढ़ जाएगा. आगे चलकर इस मुहिम में कई छोटे ड्रोन भी मिलकर काम करेंगे, ताकि बड़े रडार वाले विमानों पर निर्भरता कम की जा सकेगी.
आमतौर पर लड़ाकू विमानों का मुख्य रडार उनके अगले हिस्से में लगा होता है. जिसके ऊपर एक खास कवर होता है, जिसे रेडोम कहते हैं. जबकि, हवाई निगरानी और दुश्मन के लड़ाकू विमानों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बड़े टोही विमानों में रडार, विमान के धड़ के ऊपर लगा होता है.

हालांकि जे-20 के मूल ढ़ाचे यानी डिजाइन में इस तरह का क्रांतिकारी बदलाव करना आसान नहीं है. फाइटर जेट चाहे कोई भी हो, उसके पंख काफी बड़े होते हैं, लेकिन उनकी मोटाई कम होती है. इस वजह से उनके भीतर रडार के उपकरण लगाने के लिए पर्याप्त जगह तैयार करना आसान नहीं होगा.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के मिलिट्री जेट्स डिजाइनरों ने इस सवाल का नया जवाब सुझाया है. इस मुहिम के लिए डिजाइनरों की योजना पंखों में बड़े एंटीना को लगाने की है. इसके साथ ही लड़ाकू विमान को हवा में अलग-अलग तरीके से अलग-अलग दिशाओं में मोड़ने और कई मानवरहित विमानों को एक साथ उड़ाने की तकनीक का इस्तेमाल कर रडार की निगरानी का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है.

फाइटर जेट के विंग्स में रडार लगाने से निगरानी का दायरा बढ़ेगा. तैयारियों के बीच आई जानकारी के मुताबिक नई तकनीक में कई छोटे ड्रोन भी मिलकर काम करेंगे. इस कथित बदलाव को लेकर चीनी थिंक टैक्स का दावा है कि ये आसमान में मौजूद दूसरे ड्रोन्स के साथ तालमेल बिठाकर दुश्मन की निगरानी करके उसे ढेर करने में सक्षम होंगे.
प्रस्तावित डिजाइन में रडार के एंटीना, उसे नियंत्रित करने वाले उपकरण और दूसरे जरूरी हिस्सों को विमान के पंखों के भीतर लगाने की योजना है. रडार की सिग्नल भेजने वाली सतह नीचे की ओर होगी. इसके ऊपर ऐसा सुरक्षा कवर होगा, जो विमान के बाहरी आकार के अनुरूप होगा. नए अरेंजमेंट से विमान के ऊपर या बाहर बड़े रडार लगाने की जरूरत कम हो सकती है, यानी पंखों के बीच मौजूद जगह का तकनीक के जरिए बेहतर इस्तेमाल करने की तैयारी है. शोधकर्ताओं का दावा है कि इससे पायलट को विमान उड़ाने के साथ दुश्मन की निगरानी करने में भी आसानी होगी.

इस तकनीक से जुड़ा रिसर्च पेपर इसी महीने की 10 अक्टूबर को चाइनीज रिसर्च मैगजीन 'मेजरमेंट एंड कंट्रोल टेक्नोलॉजी' में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ. उस रिपोर्ट में पंखों में रडार लगाने की तकनीक को बेहतर हवाई निगरानी प्रणाली तैयार करने का नया तरीका बताया गया है.
शोधकर्ता रेन युनसोंग और उनकी टीम के मुताबिक, यह तकनीक दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता बढ़ाने का नया रास्ता खोल सकती है.
विमानों के विंग्स यानी पंखों में लगाए जाने वाले यह रडार ऐसे खास एरियल ऑपरेशंस और स्ट्राइक के लिए तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें कई विमान एक साथ काम करते हैं.
इस तकनीक का मकसद निगरानी की जिम्मेदारी कई छोटे मानवरहित विमानों में बांटना है. इससे किसी एक बड़े विमान पर निर्भरता कम हो सकती है. यह बदलाव करके चीन टोही यानी निगरानी विमानों और फाइटर जेट के फंक्शन अलग-अलग होने के झंझट को दूर करके ऐसे 'टू इन वन' जेट बनाना चाहता है, जिससे उसे एक ही मोर्चे पर अलग-अलग तरीके के विमान उतारने की जरूरत न पड़े.
चीन चाहता है कि उसके लड़ाकू विमान सिर्फ हमला करने तक सीमित न रहें, बल्कि आसमान में बहुत दूर तक नजर रखने के साथ दुश्मन की हर हलचल का पता लगाने में भी सक्षम हों.