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क्या दुनिया के सात अजूबों में शुमार चीन की महान दीवार का वजूद मिटने वाला है.क्या इंसानी सभ्यता का सबसे बड़ा सैन्य ढांचा हमेशा हमेशा के लिए ध्वस्त हो जाएगा. ये सवाल आज दुनिया भर के इतिहासकारों और आम लोगों के जहन में कौंध रहा है और वजह बनी है एक छोटी नहीं बल्कि पूरे 20 सालों से जारी भयानक लापरवाही.
जिस दीवार को कोई दुश्मन सैकड़ों सालों में नहीं तोड़ पाया. उस दीवार में दरार पड़ चुकी है. मामला है उत्तर-मध्य चीन के शानक्सी प्रांत की निंगवू काउंटी का. यहां मिंग राजवंश के दौरान बनी गुओजियायाओ दीवार का एक हिस्सा पिछले दो दशकों से तबाही झेल रहा था. 2007 से बिना लाइसेंस चल रही एक कोयला खदान कंपनी ने अपने डंपर और ट्रकों का रास्ता आसान करने के लिए इतिहास के इस पन्ने को बीच से ही काट दिया.
साल 2013 से दूसरी माइनिंग टीमों ने भी पहाड़ों के लंबे रास्ते से बचने के लिए इसी रास्ते को खनन कचरा फेंकने का शॉर्टकट बना लिया. 2015 से व्हिसलब्लोअर्स ने स्थानीय अफसरों के दरवाजे खटखटाए, शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते यह अवैध काम लगातार जारी रहा. आज प्राचीन पत्थरों से बनी दीवार में 6 मीटर यानी 19 फुट से ज्यादा बड़ा छेद हो चुका है.
ये वही चीन की दीवार है, जहां बीजिंग के करीब बाडालिंग और मुतियान्यु जैसे हिस्सों में दुनिया भर के बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष लाल कालीन पर चलते हैं. व्लादिमीर पुतिन से लेकर बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप का परिवार तक जब कूटनीतिक दौरे पर चीन पहुंचे तो इसी दीवार ने उनका स्वागत किया. बीजिंग की चमक-दमक से दूर सुदूर इलाकों में ये दीवार तिनका-तिनका होकर ढह रही है. कड़े कानूनों और बाउंड्री मार्कर्स लगाने के वादों के बावजूद भ्रष्टाचार और अनदेखी ने गहरा जख्म दे दिया है.
इस दीवार का निर्माण एक बार में नहीं हुआ बल्कि 7वीं शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक लगभग 2,000 से ज्यादा सालों तक कराया गया. इसकी शुरुआत ईसा पूर्व 221 में सम्राट किन शि हुआंग ने की जिन्होंने पुरानी छोटी दीवारों को आपस में जोड़ा. इसका निर्माण उत्तर दिशा से आने वाले घुमंतू कबीलों के हमलों और लुटेरों से बचाने के लिए किया गया था. व्यापार पर टैक्स वसूलने और प्रवासियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए किया गया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी दीवार एक झटके में गायब नहीं होगी लेकिन इसके एक-तिहाई हिस्से पहले ही प्राकृतिक आपदाओं, हवा-पानी के कटाव और इंसानी लालच की वजह से गायब हो चुके हैं. अगर शानक्सी प्रांत जैसी लापरवाहियां जारी रहीं तो चीन की दीवार का एक बड़ा हिस्सा आने वाले दशकों में सिर्फ किताबों और तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा.
मीडिया में खबर उछलने के बाद अब चीनी प्रशासन हरकत में आया है. इमरजेंसी मरम्मत और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या 20 साल के नुकसान को एक नोटिस से भरा जा सकता है.