हसीना की बांग्लादेश वापसी से पहले शिकंजा, अवामी लीग के दिग्गज नेता को फांसी की सजा का ऐलान; 3 को मिली उम्रकैद
शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले अवामी लीग के नेता महबूबुल आलम हनीफ को आईसीटी ने मौत की सजा सुनाई है. साल 2024 में हुए प्रदर्शन के मामले में न्यायाधिकरण ने हनीफ को दोषी पाया और मौत की सजा का ऐलान किया. इसके साथ ही तीन अन्य लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना की ढाका वापसी से पहले अवामी लीग के नेता महबूबुल आलम हनीफ को मौत की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा तीन अन्य लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के संयुक्त महासचिव महबूबुल आलम हनीफ को जुलाई 2024 के जनविद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी पाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में आवामी लीग के तीन अन्य नेताओं सदर उद्दीम खान, अजगर अली और अताउर रहमान अता को उम्रकैद की सजा भी मिली है. आईसीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नजरूल इस्लाम चौधरी के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया. बता दें कि इससे पहले हनीफ को छह बिंदुओं पर दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई थी.
तीन आरोपियों को उम्रकैद
2024 के जनविद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में ही अन्य तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. बांग्लादेश के समाचार पत्र 'ढाका ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, चारों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी अनुपस्थिति में उन्हें सजा सुनाई गई. आईसीटी का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब बांग्लादेश में अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ एक्शन जारी है. बता दें कि इससे पहले भी जुलाई 2024 के जनविद्रोह से जुड़े मामलों अवामी लीग से जुड़े कई नेताओं को कड़ी सजा सुनाई जा चुकी है.
अवामी लीग ने किया फैसले को खारिज
गौरतलब है कि पिछले महीने न्यायाधिकरण ने अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और पार्टी तथा उससे जुड़े संगठनों के छह अन्य वरिष्ठ नेताओं को जनविद्रोह से संबंधित मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि, उस फैसले को अवामी लीग ने खारिज किया था. आवामी लीग ने न्यायाधिकरण के फैसले को 'एकतरफा' और पक्षपातपूर्ण करार दिया था. अवामी लीग का आरोप था कि यह कथित फैसला राजनीतिक असहमति रखने वालों को खत्म करने के लिए न्यायपालिका के दुरुपयोग की ताजा मिसाल है.
हसीना की पार्टी ने खड़े किए थे सवाल
अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ हो रहे एक्शन पर पार्टी ने नाराजगी जताई थी. पार्टी ने सवाल खड़ा किया कि जिन लोगों के खिलाफ फैसला सुनाया गया, उनमें से कोई भी न्यायाधिकरण के समक्ष मौजूद नहीं था. पार्टी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के एक बुनियादी सिद्धांत के अनुसार, आरोपियों की अनुपस्थिति में चलने वाले मुकदमों में भी न्यूनतम कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.
हसीना की पार्टी अवामी लीग ने यहां तक दावा किया कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई. पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून तथा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के मौलिक एवं सर्वमान्य सिद्धांतों की घोर अवहेलना की जा रही है. अवामी लीग का आरोप है कि इस प्रक्रिया से कानून के शासन के बजाय दंडमुक्ति और राजनीतिक प्रतिशोध की संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है. (इनपुट- आईएएनएस)
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