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Azerbaijan Dress Code: पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप के बीच स्थित अजरबैजान एक मुस्लिम बहुल देश है. यहां 96-97 प्रतिशत आबादी इस्लाम धर्म को मानती है. हालांकि, इस इस्लामिक देश में बुर्के को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सरकार की ओर से स्कूल के ड्रेस कोड के नियमों में बदलाव करने के बाद से कुछ छात्राओं ने प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है.
अजरबैजान के स्कूलों में नए नियमों के तहत कुछ ऐसे कपड़ों पर पाबंदी लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध मानती है. इस फैसले के बाद से कुछ छात्राएं स्कूल हिजाब पहनकर स्कूल पहुंच गईं, जहां शिक्षकों ने उन्हें जाने से रोक दिया. छात्राओं ने इस फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया.
अजरबैजान की सरकार का कहना है कि छात्रों के लिए स्कूल में एक जैसा ही ड्रेस कोड होना चाहिए. इसी को देखते हुए इनमें बदलाव किए गए हैं. हालांकि, नए नियमों में हिजाब का नाम लेकर डायरेक्ट रोक नहीं लगाई गई, लेकिन उन कपड़ों पर बैन जरूर लगाया है, जिन्हें सरकार की ओर से धर्मनिरपेक्ष नियमों के खिलाफ माना गया है. सरकार का कहना है कि खास मौकों पर देश की संस्कृति और राष्ट्रीय परंपराओं से जुड़े कपड़े पहने जा सकते हैं. इसके लिए भी स्कूल से जुड़े समिति से मंजूरी लेना आवश्यक होगा.
अजरबैजान की मुस्लिम आबादी में अधिकतर शिया हैं. हालांकि, यहां शिया मुसलमानों की आबादी भी काफी ज्यादा है. इसके बावजूद इस देश ने खुद को धर्मनिरपेक्ष बताया है. यहां की सरकार केवल एक धर्म के आधार पर ही काम नहीं करती, बल्कि नागरिकों को अपना धर्म मानने की खुली आजादी है. इसी को देखते हुए यहां की सरकार ने सकूलों में समान रूप से ड्रेस कोड लागू किया है, जिसके चलते हिजाब को लेकर विवाद बढ़ा है. विरोध करने वालों का तर्क है कि हिजाब पहनना उनकी निजी पसंद और धार्मिक आस्था है.
अजरबैजान में ड्रेस कोड के नए नियमों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है. यहां कम से कम 2 स्कूलों में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया है. इंटरनेट पर वायरल कई वीडियो में छात्राएं स्कूल में एंट्री न मिलने पर टीचर्स से गले मिलती और रोती नजर आईं. 'अल जजीरा' की रिपोर्ट के मुताबिक, जहरा हसानोवा नाम की एक टीचर ने बताया कि उन्हें स्कूल में हिजाब पहनकर आने की परमिशन नहीं दी गई. उन्होंने ये भी कहा कि हिजाब पहनना किसी व्यक्ति का निजी फैसला है और इससे पहनना-उतारना उसकी अपनी पसंद होनी चाहिए. तुर्किये में भी अजरबैजान के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है. यहां लोगों ने इसे साल 1997 की उस घटना से जोड़ा, जिसमें हिजाब पहनने वाली लड़कियों को यूनिवर्सिटी जाने से रोका गया और कुछ महिलाओं को हिजाब के चलते अपनी सरकारी नौकरी छोड़नी पड़ी.