आसिम मुनीर को सता रहा भारत-इजरायल की दोस्ती का डर, हिंदू-यहूदी गठजोड़ को बताया मुस्लिम देशों के लिए खतरा
पाकिस्तान को अब भारत-इजरायल की दोस्ती से भी दिक्कत है. आसिम मुनीर ने हाल ही में यह चिंता ईरान, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ मीटिंग में जाहिर की है.
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भारत से इतना डरते हैं कि हर जगह अपना खौफ जाहिर करते हैं. हाल ही में पाकिस्तान, ईरान, तुर्किये और सऊदी अरब की हुई एक मीटिंग में मुनीर ने एक बार फिर भारत के खौफ का जिक्र किया है. इस बैठक में उन्होंने भारत-इजरायल की बढ़ती नजदीकियों को मुस्लिम विरोधी बताया. इस बात की जानकारी खुद मीटिंग में शामिल होने वाले रक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने दी है.
लाहौर के समाचार आउटलेट '24 न्यूज एचडी' ने ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई के ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB को दिए एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए बताया कि मुनीर ने मुसलमानों और पाकिस्तान के खिलाफ निर्देशित हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ते संबंधों पर चिंता जाहिर की.
रेजाई का बयान 26 अक्तूबर को हुई ईरान, पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये की मीटिंग पर आधारित है. इस मीटिंग में पाकिस्तान की तरफ से आसिम मुनीर, तुर्किये की तरफ से कालिन, सऊदी अरब रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और ईरान की तरफ रक्षा प्रमुख रेजाई शामिल हुए थे.
पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार भी यही कह रहे हैं
रेजाई के अलावा पाकिस्तान के कई दिग्गज पत्रकार भी ऐसा ही कुछ कह रहे हैं. सीनियर जर्नलिस्ट नजम सेठी ने भी हिंदू-यहूदी वाली टिप्पणियों के पीछे आसिम मुनीर को ही जिम्मेदार बताया है. सेठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस बारे में चर्चा करते हुए कहा,'हिंदू और यहूदियों का गठबंधन मुसलमानों और पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा खतरा है.'
इससे पहल भी भारत को लेकर अनाप-शनाप बोल चुके हैं मुनीर
यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान की टॉप लीडरशिप की तरफ से इस तरह की बयानबाजी पहले भी की जाती रही हैं. इससे पहले 2025 में पहलगाम हमले के दौरान भी उन्होंने कहा था कि हिंदू और मुसलमान अपने धर्म, रीति-रिवाजों, परंपराओं, विचारों में अलग-अलग हैं. उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का भी जिक्र किया था. मुनीर की इस तरह की बयानबाजी के चलते रेजाई की टिप्पणियां और अहम हो जाती हैं.
इजरायल के साथ रिश्तों को क्यों बनाया निशाना?
हालांकि, इससे पहले तक मुनीर इसमें सिर्फ भारत को निशाना बनाते थे, लेकिन इस बार चार देशों की इस मीटिंग में उन्होंने भारत के साथ इजरायल के रिश्तों को भी घसीट लिया. इसकी एक बड़ी वजह यह भी हो सकती है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायल एकमात्र ऐसा देश था, जिसने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का खुले तौर पर समर्थन किया था. भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा था कि आतंकवादियों के पास छिपने की कोई जगह नहीं है.