दुर्गा पूजा के जश्न के बीच सहमे हुए हैं बांग्लादेश के हिंदू, हो रहे मंदिरों पर हमले, मूर्तियां खंडित करने के अब तक 34 मामले आए सामने
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इन नवरात्रि में वहां पर मंदिरों पर हमले की 34 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे वहां के हिंदुओं में डर का माहौल है.
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान हिंदुओं के उत्पीड़न के मामले बढ़ गए हैं. पिछले कुछ दिनों में मंदिरों पर हमले, मूर्तियों को खंडित करने और हिंसा की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले सामने आए हैं. इससे वहां रहने वाले हिंदुओं में भय का माहौल बढ़ गया है. बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने हालात पर चिंता जताते हुए अधिकारियों से हिंदुओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है.
बांग्लादेश में मंदिरों पर हमले के 34 मामले सामने आए
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, दोनों संगठनों ने गुरुवार को ढाका स्थित ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर परिसर में प्रेसवार्ता करके अपनी आवाज उठाई. यह प्रेसवार्ता शारदीय दुर्गा पूजा से पहले आयोजित की गई थी. बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने कहा, इस साल मूर्तियों को खंडित करने, मंदिरों पर हमले और इस तरह की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले अब तक सामने आए हैं.
संगठनों ने बयान जारी कर कहा कि सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़ और टांगाइल सहित कई जिलों में त्योहार की तैयारियों के दौरान मूर्तियों को खंडित करने और मंदिरों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं. संगठनों के नेताओं ने जोर दिया कि धार्मिक त्योहारों को सभी समुदायों के लोगों को एकजुट करना चाहिए और बांग्लादेश की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न होगी.
हिंदू संगठनों ने साल भर सुरक्षा की उठाई मांग
दोनों संगठनों की ओर से जारी बयान में फरीदपुर के एक ऐतिहासिक काली मंदिर में चोरी की घटना का भी उल्लेख किया गया. इसके अलावा, सुनामगंज में हिंदू समुदाय के लोगों के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले तथा लूटपाट की घटनाओं का जिक्र किया गया है. नाओगांव में हुई लूट की एक घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोगों ने खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के रूप में अपनी पहचान बताई थी.
दोनों संगठनों के नेताओं ने कहा कि महज पूजा के पांच दिनों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है. अल्पसंख्यक समुदायों के लिए साल के 365 दिन सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. नेताओं ने कहा कि भेदभाव-मुक्त बांग्लादेश के निर्माण के लिए धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखना और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाना जरूरी है.
यूनुस के कार्यकाल से तेज हुआ उत्पीड़न का सिलसिला
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का सिलसिला मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में तेज हुआ. इसके बाद सरकार बदल गई और तारिक रहमान सत्ता में आ गए. इसके बावजूद अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न अब भी जारी है.
इससे पहले ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में धार्मिक- जातीय अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली 498 कथित घटनाओं का ब्योरा जारी किया था. इनमें हत्या, मारपीट, यौन हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और संपत्ति से जुड़े उल्लंघनों के मामले शामिल थे.
HRCBM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'हर घटना की जांच होनी चाहिए. हर पीड़ित सुरक्षा का हकदार है. दोषियों को दंड से बचने नहीं दिया जाना चाहिए. संगठन ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई.'
(एजेंसी आईएएनएस)