)
Al taawun tunnel project: शारजाह और दुबई के बीच रोजाना सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. इस रूट के सबसे व्यस्त चौराहे 'अल तावून स्क्वायर' पर बन रहे नए अंडरपास (सुरंग) का पहला चरण जल्द खुलने वाला है. करीब 75 करोड़ दिरहम की लागत से बन रही यह सुरंग दोनों शहरों के बीच लगने वाले ट्रैफिक जाम को 85 फीसदी तक खत्म कर देगी.
शारजाह रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (SRTA) के मुताबिक, यहां दिन-रात काम चल रहा है. इस अंडरपास का पहला हिस्सा नवंबर 2026 में गाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा, जबकि पूरा प्रोजेक्ट फरवरी 2027 तक तैयार हो जाएगा.
कैसी होगी नई टनल और क्या है इसकी खासियत?
अल तावून राउंडअबाउट (गोलचक्कर) पर बन रहे इस अंडरपास का मुख्य मकसद गाड़ियों को बिना सिग्नल या चौराहे पर रुके सीधे जमीन के नीचे से निकालना है.
यह 6 लेन की सुरंग है. टनल में दोनों तरफ 3-3 लेन होंगी. पीक ऑवर्स (व्यस्त समय) के दौरान यह टनल हर घंटे करीब 4,000 गाड़ियों का ट्रैफिक संभालने के लिए डिजाइन की गई है.
यह सुरंग अल तावून स्ट्रीट को सीधे अल नाहदा ब्रिज और दुबई की ओर जोड़ेगी. इसके अलावा आगे चलकर यह शेख मोहम्मद बिन जायद रोड और एमिरेट्स रोड से भी बेहतर संपर्क बनाएगी.
आखिर क्यों लगता है अल तावून में इतना भीषण जाम?
अल तावून चौराहा असल में शारजाह और दुबई के बीच आने-जाने का सबसे अहम रास्ता है. यहां अल नाहदा, अल खान और कॉर्निश जैसे घनी आबादी वाले इलाकों की गाड़ियां एक साथ आकर मिल जाती हैं. सुबह ऑफिस जाने के समय (7 से 9 बजे) और शाम को घर लौटते वक्त (5 से 8 बजे) सड़कों पर गाड़ियों का हुजूम उमड़ पड़ता है. नतीजा यह होता है कि चौराहे पर पहिए पूरी तरह थम जाते हैं और लोगों को घंटों लंबे जाम से जूझना पड़ता है.
मुसाफिरों को सीधे क्या राहत मिलेगी?
गाड़ियां अब चौराहे पर अटकने के बजाय सीधे अंडरपास से सरपट निकलेंगी. इससे सिग्नल पर बार-बार ब्रेक लगाने और घंटों रेंगने का झंझट खत्म हो जाएगा.अल तावून, अल नाहदा, अल खान और अल मजाज में रहने वाले लोगों के लिए दुबई आना-जाना अब बिना किसी रुकावट के बेहद आसान और तेज हो जाएगा.
गोलचक्कर से क्यों हटाया गया था ऐतिहासिक स्मारक?
टनल के काम के चलते अल तावून चौराहे पर लगी पहचान बन चुके ऐतिहासिक स्मारक (Monument) को कुछ वक्त के लिए हटाना पड़ा था. इंजीनियरों की जांच में सामने आया कि स्मारक की नींव जमीन में बहुत गहरी धंसी हुई थी. जब तक उसे हटाया न जाता, नीचे सुरंग की खुदाई मुमकिन ही नहीं थी. शारजाह के शासक डॉ. शेख सुल्तान बिन मोहम्मद अल कासिमी ने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही टनल का काम खत्म होगा, इस ऐतिहासिक स्मारक को उसी जगह पर पूरे सम्मान के साथ वापस लगा दिया जाएगा.