इमरान के गढ़ में फंस गए शहबाज-मुनीर! PTI सरकार को हटाने की हो रही साजिश, क्या हैं Article 232 और 234?
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार खैबर पख्तूनख्वा को लेकर बड़ा कदम उठा सकती है. कहा जा रहा है कि यहां जल्द ही गवर्नर राज लागू किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कि यह स्थिति क्यों और कैसे पनपी.
पाकिस्तान के 4 राज्यों में से एक खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी (PTI) की सरकार है. सोहेल आफरीदी खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री हैं, अब खबर आ रही है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर मिलकर इस राज्य का सत्ता बदलने जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर राज लगाने के लिए आज प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के घर पर एक बड़ी मीटिंग होने वाली है, जिसमें इस राज्य के हालात पर चर्चा होने वाली है. इसी दौरान Article 232 और 234 के तहत इमरजेंसी या गवर्नर राज की संभावनाओं पर चर्चा होगी, जबकि PTI के लॉन्ग मार्च ने तनाव और बढ़ा दिया है.
शहबाज-मुनीर के लिए खैबर पख्तूनख्वा क्यों बना सिरदर्द?
सबसे पहले जानते हैं कि आखिर शहबाज शरीफ की सरकार और आसिम मुनीर के लिए खैबर पख्तूनख्वा राज्य क्यों सिरदर्द बना हुआ है. खैबर पख्तूनख्वा राज्य में इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार. मुख्यमंत्री सोहेल आफरीदी लगातार केंद्र की शहबाज सरकार के खिलाफ और इमरान खान की हिमायत में प्रस्तावित लॉन्ग मार्च से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. लॉन्ग मार्च की नई तारीख 4 अक्टूबर तय की गई है.
PTI की तरफ से केंद्र की शहबाज सरकार राज्य सरकार पर सुरक्षा स्थिति खराब करने के आरोप लगा रही है. केंद्रीय मंत्रियों ने कई बार सोहेल आफरीदी की सरकार पर लगाएं है कि वो सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं. शहबाज सरकार में सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने तो यहां तक कह दिया कि KP सरकार आतंकवाद के लिए 'जगह' बनाने का काम कर रही है. हालांकि, राज्य की सोहेल सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती आ रही है. मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर है, क्योंकि हाल के दिनों राज्य के अंदर एक के बाद एक हमलों की खबरें आ रही हैं.
क्या है PTI का लॉन्ग मार्च?
बता दें कि सोहेल आफरीदी के नेतृत्व में PTI ने इस्लामाबाद मार्च का ऐलान किया है. इस मार्च का मकसद इमरान खान की रिहाई है. यह मार्च पेशावर से होकर इस्लामबाद तक जाएगा. इस मार्च की तारीख पहले 27 सितंबर 2026 थी, लेकिन बाद में इसका तारीख 4 अक्तूबर कर दी गई है. 27 सितंबर की कॉल को देखते हुए प्रशासन ने सख्त सिक्योरिटी तैनात कर दी थी, रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी थी, जिसके चलते मार्च की तारीख का आगे बढ़ा दिया गया था. हालांकि, प्रशासन की तरफ से 4 अक्टूबर को लेकर भी सख्त व्यवस्था की गई है.
शहबाज शरीफ के घर होने वाली बैठक क्या है?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आज यानी 30 सितंबर को शहबाज शरीफ के घर पर एक अहम मीटिंग होने जा रही है. जिसमें राज्य प्रांत की कानून-व्यवस्था, आतंकवाद के बढ़ते खतरे और PTI सरकार के रुख की समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही गवर्नर राज और इमरजेंसी जैसे संवैधानिक विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है. प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने साफ कहा है कि Article 232 और 234 के तहत उपलब्ध विकल्पों के साथ राजनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला है. हालांकि, अभी गवर्नर राज लागू करने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
आर्टिकल 232 और 234 क्या हैं?
पाकिस्तान के संविधान में आर्टिकल 232 और आर्टिकल 234 असाधारण परिस्थितियों से निपटने के लिए लागू किए जाते हैं. इनमें से आर्टिकल 232 राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़ा है. यह तब लागू किया जाता है, जब जंग, बाहरी हमले या अंदरूनी तौर पर क्षेत्र में अशांति फैली हुई हो. इसके अलावा यह आर्टिकल तब भी लागू किया जा सकता है जब कोई प्रांतीय सरकार राज्य की हालात पर कंट्रोल पाने में सक्षम नहीं है.
इसके अलावा आर्टिकल-234 की बात करें तो, इसमें राष्ट्रपति, उस राज्य की गवर्रनर के जरिए पेश की जाने वाली रिपोर्ट की बुनियाद पर यह फैसला लेता है कि राज्य की सरकार संविधान के मुताबिक नहीं चल पा रही है. ऐसे हालात में राष्ट्रपति खुद या गवर्नर के जरिए राज्य सरकार के कुछ या सभी कार्य और शक्तियां अपने अधीन ले सकते हैं, हालांकि प्रांतीय विधानसभा की शक्तियां अलग संवैधानिक प्रावधानों के अधीन रहती हैं.
गवर्नर राज के बाद क्या बदल जाएगा?
- राज्य सरकार की कार्यकारी शक्तियां प्रभावित होंगी: राष्ट्रपति खुद या गवर्नर के जरिए इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
- गवर्नर की भूमिका बढ़ जाएगी: वह राष्ट्रपति की तरफ से राज्य का प्रशासन चला सकते हैं.
- केंद्र का कंट्रोल बढ़ेगा: KP के प्रशासनिक फैसलों में केंद्रीय स्तर की भूमिका बढ़ सकती है.
- विधानसभा तुरंत भंग नहीं होगी: Article 234 में Provincial Assembly को अलग रखा गया है.
- गवर्नर राज हमेशा के लिए नहीं होगा: इसे जारी रखने के लिए संविधान के मुताबिक संसद की मंजूरी जरूरी होगी.