उत्तराखंड में 'ऑपरेशन कालिंदी': 19,500 फीट की ऊंचाई पर जिंदगी की जंग, 136 में से 29 ट्रेकर्स का रेस्क्यू
Kalindi Pass Trekkers Trapped News: उत्तरकाशी से बड़ी खबर है. देश के सबसे मुश्किल और खतरनाक माने जाने वाले कालिंदी पास ट्रेक पर भारी बर्फबारी के कारण 136 ट्रेकर्स फंस गए हैं. शासन ने बड़े पैमाने पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है. अब तक 29 से ज्यादा ट्रेकर्स को सुरक्षित रेस्क्यू कर हर्षिल बेस कैंप लाया जा चुका है.
Kalindi Pass Trekkers Trapped News/ सुरेंद्र डसीला: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है. देश के सबसे कठिन, दुर्गम और जोखिम भरे माने जाने वाले 'कालिंदी पास ट्रैक' पर अचानक हुई भारी बर्फबारी के कारण देश-विदेश के 136 ट्रेकर्स फंस गए हैं. गंगोत्री से बद्रीनाथ के बीच फैले इस खतरनाक रूट पर मौसम बिगड़ने के बाद शासन-प्रशासन हरकत में आ गया है. सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है.
10 कंपनियों के 136 ट्रेकर्स फंसे, माइनस 20 डिग्री तापमान बना चुनौती
मिली जानकारी के मुताबिक, कुल 10 अलग-अलग ट्रेकिंग कंपनियों के माध्यम से निकले 136 ट्रेकर्स इस समय ग्लेशियरों के बीच अलग-अलग स्थानों पर मौजूद हैं. अचानक हुए मौसम में बदलाव और बर्फबारी से पूरा ट्रैकिंग रूट पूरी तरह से ठप हो चुका है. राज्य आपदा प्रबंधन विभाग लगातार सभी 10 ऑपरेटरों के संपर्क में है और सेटेलाइट तकनीक की मदद से ट्रेकर्स की सटीक लोकेशन ट्रेस की जा रही है.
रेस्क्यू के लिए उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) के 8 हेलीकॉप्टर तुरंत मोर्चे पर तैनात कर दिए गए हैं. अब तक की मशक्कत के बाद 29 से अधिक ट्रेकर्स को सुरक्षित तरीके से निकालकर 'हर्षिल बेस कैंप' पहुंचा दिया गया है.
ग्राउंड पर NDRF, SDRF और 'निम' की टीमें
NDRF, SDRF, जिला प्रशासन, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) समेत कई एजेंसियां ग्राउंड पर जुटी हैं. केंद्र सरकार ने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया है. अगर मौसम और बिगड़ा तो एयरफोर्स की मदद भी ली जाएगी. आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि हाई एल्टीट्यूड और लगातार बर्फबारी के कारण हेलीकॉप्टर्स को लैंड करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
कितना खतरनाक है कालिंदी पास का 100 किलोमीटर का सफर?
कालिंदी पास ट्रैकिंग रूट भारत का सबसे लंबा और खतरनाक ग्लेशियर ट्रेक माना जाता है. कालिंदी पास ट्रेक की कुल दूरी 90 से 100 किलोमीटर है. ये ट्रैक गंगोत्री धाम से शुरू होकर बद्रीनाथ धाम पर खत्म होता है और इसे पूरा करने में 12 से 15 दिन लगते हैं. इसका सबसे ऊंचा पॉइंट 5,950 मीटर यानी 19,500 फीट पर है. यह ट्रेक गंगोत्री से भोजबासा, भोजबासा से गौमुख होते हुए तपोवन, तपोवन से नंदनवन, नंदनवन से वासुकी ताल, वासुकी ताल से खड़ा पत्थर और श्वेता ग्लेशियर, फिर कालिंदी बेस कैंप से 5,950 मीटर ऊंचा कालिंदी पास पार करके राज पड़ाव, अरवा ताल, घस्तौली और माना गांव होते हुए बद्रीनाथ पहुंचता है.
पूरे रास्ते में गंगोत्री, चतुरंगी और श्वेता जैसे विशाल ग्लेशियरों को पार करना पड़ता है, जहां तापमान माइनस 20 डिग्री तक चला जाता है.
19,500 फीट पर सांसों की जंग, हर मिनट अहम
गिरते तापमान और बर्फीली हवाओं के बीच यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल समय के खिलाफ एक दौड़ नहीं, बल्कि 136 ज़िंदगियों को बचाने की महा-मुहिम बन चुका है. राज्य सरकार और शासन के आला अधिकारी खुद रेस्क्यू ऑपरेशन की पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. कोशिश यही है कि सभी 136 ट्रेकर्स को जल्द से जल्द सुरक्षित नीचे लाया जा सके. उधर, परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं और वह ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनके अपने सकुशल घर लौट आएं.