Explainer: उत्तराखंड कांग्रेस में फिर 'आत्मघाती' विस्फोट! क्या हरीश रावत की जिद फिर डुबोएगी पार्टी की नैया?
Harish Rawat: उत्तराखंड चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के रवैये से लग रहा है कि कांग्रेस दो फाड़ में दिखती नजर आ रही है. कुमारी शैलजा आलाकमान को पत्र लिख रही हैं. वहीं, हरीश रावत अपनी चाल में मस्त हैं.
सतीश कुमार/काशीपुर: उत्तराखंड कांग्रेस की सालों की मेहनत से खड़ी की गई राजनीतिक इमारत एक बार फिर जमींदोज होने की कगार पर है? 2022 विधानसभा चुनावों में जो 'गुटबाजी' और 'अकेले चलो' की जिद पार्टी की हार का कारण बनी थी, वही इतिहास 2027 के चुनावों से ठीक पहले दोहराया जा रहा है. उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों घमासान मचा हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अलग-थलग दौरों और समानांतर रैलियों ने कांग्रेस के भीतर विरोध का ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी तपिश अब दिल्ली हाई कमान तक पहुंच चुकी है.
हरीश रावत ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता?
AICC महासचिव कुमारी शैलजा ने बाकायदा चिट्ठी जारी कर हरीश रावत की इस मनमानी और विवादास्पद बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया है और उनकी इस 'समानांतर यात्रा' को पार्टी हित के खिलाफ बताते हुए रोकने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद हरीश रावत अपनी ही धुन में मस्त हैं. पार्टी आलाकमान ने अंदरूनी खींचतान को खत्म करने के लिए बड़े नेताओं को उत्तराखंड भेजा है.
कुमारी शैलजा ने लिखा पत्र
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यह पुरानी फितरत फिर से पार्टी पर भारी पड़ती दिख रही है. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी यानी AICC की महासचिव कुमारी शैलजा द्वारा जारी किए गए एक सख्त पत्र ने कांग्रेस के इस अंदरूनी विस्फोट को जगजाहिर कर दिया है. शैलजा ने अपने पत्र में साफ शब्दों में लिखा है कि हरीश रावत की यह तथाकथित यात्रा न तो पार्टी नेतृत्व से पूछकर निकाली जा रही है और न ही प्रदेश अध्यक्ष की सहमति से.
अभी एकजुट दिखने की जरूरत
इतना ही नहीं, हाल के दिनों में रावत द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों पर भी आलाकमान ने गहरी नाराजगी जताई है. शैलजा ने साफ हिदायत दी थी कि चुनाव सिर पर हैं और पार्टी को एकजुट दिखने की जरूरत है, ऐसे में यह समानांतर कार्यक्रम कांग्रेस का खेल बिगाड़ रहा है, लेकिन अनुशासन की धज्जियां उड़ाने में माहिर हो चुके हरीश रावत का रवैया देखिए-हाईकमान की रेड सिग्नल के बावजूद वे बेधड़क अपने कार्यक्रमों में लगे हुए हैं.
काशीपुर में मीडिया से बोले- बड़े बदलाव का संकेत
काशीपुर पहुंचे हरीश रावत से जब मीडिया ने कुमारी शैलजा के इस रोक वाले पत्र पर तीखे सवाल पूछे, तो पहले तो वे बगलें झांकते और सवालों से बचते नजर आए, लेकिन कैमरे से भागते-भागते उन्होंने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा- "यह बड़े बदलाव का संकेत है." अब सवाल उठ रहा है कि आखिर हरीश रावत किस 'बड़े बदलाव' का संकेत दे रहे हैं? क्या यह बदलाव कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर सत्ता की दौड़ से बाहर धकेलने का संकेत है या फिर पार्टी के खिलाफ बगावत की नई पटकथा का आगाज?
समर्थक विधायक बचाव में उतरे
दूसरी तरफ हरीश रावत के इस मनमाने रवैये और आलाकमान के पत्र के बीच उनके समर्थक विधायक बचाव की मुद्रा में आ गए हैं. जसपुर से कांग्रेस विधायक आदेश चौहान मीडिया के सामने आकर पूरे मामले पर लीपापोती करते दिखे. आदेश चौहान का दावा है कि हरीश रावत कोई बड़ी रैली नहीं निकाल रहे, बल्कि बीमारी से उबरने के बाद केवल जनता का धन्यवाद करने निकले हैं. जब आदेश चौहान से कुमारी शैलजा के उस लेटर के बारे में पूछा गया, जिसमें रावत को तुरंत रोकने के निर्देश हैं, तो उन्होंने बड़ी बेफिक्री से कह दिया कि उन्हें तो ऐसा कोई पत्र मिला ही नहीं है, जब आएगा तब देखेंगे.
पिछले चुनाव में भी बिगाड़ा था खेल
सच्चाई यह है कि यह पहली बार नहीं है जब हरीश रावत की महत्वाकांक्षाओं ने पार्टी को रसातल में धकेला हो. पिछले विधानसभा चुनावों में भी हरीश रावत की इसी तरह की कार्यशैली, मनमाने टिकट बंटवारे और 'स्वयंभू' नेता बनने की होड़ ने कांग्रेस के बने-बनाये खेल को बिगाड़ दिया था. कार्यकर्ताओं ने पसीना बहाकर जो आशियाना तैयार किया था, रावत की जिद ने उसे सत्ता की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही ढा दिया. और अब जब कांग्रेस फिर से राज्य में उठने की कोशिश कर रही है, तब हरीश रावत की इस गुटबाजी वाले तूफान ने कांग्रेस की मेहनत पर पानी फेरना शुरू कर दिया है.
'समानांतर सियासत' पर नकेल कसने की जरूरत
हरीश रावत की यह कार्यशैली कई गंभीर सवाल छोड़ती है. क्या हरीश रावत खुद को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आलाकमान के अनुशासन से भी ऊपर समझने लगे हैं? जब पार्टी चुनाव में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है, तब रावत का यह अलग-थलग रवैया और "बड़े बदलाव" वाला गोलमोल बयान आखिर किसे फायदा पहुंचाने के लिए है? इतिहास गवाह है कि राजनीतिक अति-महत्वाकांक्षा और पार्टी अनुशासन को ताक पर रखने की कीमत हमेशा संगठन को चुकानी पड़ती है. अगर समय रहते कांग्रेस आलाकमान ने हरीश रावत की इस 'समानांतर सियासत' पर नकेल नहीं कसी, तो 2027 में भी उत्तराखंड में कांग्रेस का आशियाना बनने से पहले ही बिखर जाएगा.