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क्या इस मानसून कहीं जाने की सोच रहे हैं? तो अपनी लिस्ट की बाकी जगहें भूल जाइए और सीधे उत्तराखंड की इस वैली का रुख कीजिए

Valley of Flowers Uttarakhand: उत्तराखंड की 'वैली ऑफ फ्लावर्स' 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व धरोहर है. जून से अक्टूबर तक खुलने वाली यह घाटी 500 से अधिक रंग-बिरंगे फूलों से सजती है. प्राकृतिक सुंदरता और ट्रैकिंग के लिए यह पर्यटकों के लिए स्वर्ग समान है.

Written By Jyoti Kumari
Published: Sep 04, 2026, 05:44 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 05:47 PM IST
Image Credit: Valley of Flowers Uttarakhand
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Valley of Flowers: यदि आप प्रकृति प्रेमी हैं और मानसून में किसी जादुई जगह की सैर करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड की 'वैली ऑफ फ्लावर्स' आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है. समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट (3,600 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी सर्दियों में बर्फ की चादर से ढकी रहती है, लेकिन मानसून आते ही यह अनगिनत रंगों के फूलों से सज जाती है. चमोली जिले में नंदा देवी नेशनल पार्क के पास स्थित यह घाटी 87.5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है.

घाटी की खोज की दिलचस्प कहानी
इस बेहद खूबसूरत घाटी को दुनिया के सामने लाने का श्रेय ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति शास्त्री फ्रैंक सिडनी स्माइथ को जाता है. वर्ष 1931 में एक अभियान से लौटते समय वे रास्ता भटक गए थे और अचानक इस खूबसूरत घाटी में पहुंच गए. इसके बाद 1937 में वे यहां दोबारा आए और कुछ समय बिताने के बाद उन्होंने 'वैली ऑफ फ्लावर्स' नाम से एक किताब भी लिखी, जिसने इस घाटी को दुनियाभर में मशहूर कर दिया.

रंग बदलने वाली जादुई घाटी
यह घाटी अपनी एक खास खासियत के लिए जानी जाती है. यहां खिले फूलों का रंग हर 15 दिनों में बदल जाता है. इसी अद्भुत नजारे के कारण इसे 'जादुई घाटी' भी कहा जाता है. यहां 500 से भी अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल पाए जाते हैं, जिनमें कई दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं.इसकी अलौकिक सुंदरता और जैव विविधता के कारण इसे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है.

कब और कैसे जाएं?
यह घाटी साल में केवल 4 महीने के लिए खुलती है. आमतौर पर 1 जून से इसे पर्यटकों के लिए खोला जाता है और अक्टूबर के अंत तक यह खुली रहती है.

यात्रा का रास्ता: सबसे पहले हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचे. वहां से सड़क मार्ग द्वारा जोशीमठ और फिर गोविंदघाट जाएं.

ट्रेक की शुरुआत: गोविंदघाट से 3 किमी दूर पुलना गांव पहुंचे. इसके बाद पुलना से लगभग 11 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके घांघरिया पहुंचना होता है.

अंतिम पड़ाव: घांघरिया से 4 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई तय करके आप फूलों की घाटी पहुंच सकते हैं.

पर्यटकों के लिए जरूरी बातें

एंट्री फीस: घाटी में प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों को 150 रुपये और विदेशी पर्यटकों को 600 रुपये की फीस देनी होती है.

रजिस्ट्रेशन: यहां जाने के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.

खाने-पीने की व्यवस्था: घाटी के मुख्य हिस्से में कोई दुकान या रेस्तरां नहीं है. इसलिए ट्रेक पर जाते समय अपने साथ पानी और हल्का खाने-पीने का सामान जरूर ले जाएं.

अगर आप एडवेंचर और कुदरत की खूबसूरती को एक साथ महसूस करना चाहते हैं, तो इस मानसून फूलों की घाटी की यात्रा आपकी जिंदगी का एक यादगार अनुभव बन सकती है.

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About the Author

ज्योति कुमारी डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सितंबर 2025 से काम कर रही हैं. ज्योति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर तथ्य-आधारित, विश्लेषणात्मक और निष्पक्ष डिजिटल खबरें लिखती हैं. जेंडर से जुड़े संवेदनशील विषयों और जनसरोकार की खबरों को प्रमुखता से उठाना उनकी पत्रकारिता का मुख्य केंद्र रहा है.ज़ी मीडिया से जुड़ने से पहले, ज्योति ने स्वतंत्र लेखक के रूप में कार्य किया. इस दौरान उन्होंने लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकारों और जेंडर से जुड़े मुद्दों पर गहन और विश्लेषणात्मक लेख लिखे. ज्योति के पास यूपी-उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, सामाजिक घटनाक्रमों और ट्रेंडिंग मुद्दों पर दैनिक डिजिटल कवरेज, विश्लेषण और तथ्य-जांच पर पकड़ है.ज्योति ने देश के अग्रणी शिक्षण संस्थान जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. जामिया में उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि ने उनकी रिसर्च, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और मीडिया एथिक्स (पत्रकारिता के मूल्यों) को मजबूत किया. पत्रकारिता और लेखन के अलावा, ज्योति को पुस्तकें और साहित्य पढ़ने का गहरा शौक है। समसामयिक विषयों, सामाजिक इतिहास और विभिन्न विधाओं की किताबें पढ़ना उनकी विश्लेषणात्मक सोच और लेखन शैली को और अधिक समृद्ध बनाता है.ज्योति कुमारी से आप jktiwari1998@gmail.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप ज्योति कुमारी से एक्स (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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