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'हनुमान अंश' में दिखे नीम करौली बाबा, जानिए उस संत की कहानी, जिसके आगे नतमस्तक हुए स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग!

Kainchi Dham History: उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में जन्मे लक्ष्मण नारायण शर्मा का बचपन तो साधारण ही बीता, लेकिन उनके अंदर छुपा अध्यात्म का दीप बेहद प्रज्ज्वलित था. आगे चलकर यही बालक दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए 'महाराज जी' और 'नीम करौली बाबा' के नाम से जाना गया. आइए, जानते हैं उनके जीवन से जुड़े खास और अद्भुत तथ्य...

'हनुमान अंश' में दिखे नीम करौली बाबा, जानिए उस संत की कहानी, जिसके आगे नतमस्तक हुए स्टीव जॉब्स और जुकरबर्ग!

Kainchi Dham History: जब-जब 20वीं सदी के महान संतों की बात होती है, तो उत्तराखंड की पावन भूमि पर बसे नीम करौली बाबा का नाम सबसे ऊपर आता है. एक साधारण कंबल ओढ़े शांत बैठने वाले इस संत ने बिना कोई बड़ा उपदेश दिए, केवल प्रेम और सेवा के बल पर पूरी दुनिया को अपना भक्त बना लिया. भगवान हनुमान के परम भक्त माने जाने वाले बाबा का जीवन जितना सहज था, उससे जुड़ी गाथाएं उतनी ही अलौकिक और रहस्यमयी हैं. आइए, जानते हैं उनके जीवन से जुड़े वे खास और अद्भुत तथ्य, जिन्होंने देश ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार सिलिकॉन वैली तक के लोगों को अध्यात्म से जोड़ दिया.

ट्रेन की वो घटना, जिसने दिया 'नीम करौली' नाम
कहते हैं कि एक बार बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे. टीटीई ने नियम का हवाला देते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव 'नीम करौली' के स्टेशन पर उतार दिया. बाबा शांति से उतरे और अपनी लकड़ी टेककर वहीं बैठ गए, लेकिन इसके बाद एक चमत्कार हुआ. इंजन चालू होने के बावजूद ट्रेन टस से मस नहीं हुई. तकनीकी विशेषज्ञों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं. आखिरकार स्थानीय लोगों के कहने पर जब बाबा को ससम्मान वापस ट्रेन में बैठाया गया, तो ट्रेन बिना किसी बाधा के चल पड़ी. इसी घटना के बाद भक्तों के बीच यह पावन नाम 'नीम करौली बाबा' हमेशा के लिए अमर हो गया.

एक साधारण कंबल और अटूट हनुमान भक्ति
बाबा नीम करौली का व्यक्तित्व आडंबर से कोसों दूर था. न तो कोई भड़कीला वस्त्र और न ही बड़े-बड़े दावे, उनकी एकमात्र पहचान थी उनका साधारण सा सुती कंबल. भक्त भले ही इसे उनकी सादगी का प्रतीक मानें या कोई रहस्य, पर इस कंबल में छिपा संत हमेशा भगवान हनुमान की भक्ति में लीन रहता था. उन्हें हनुमान जी का अवतार माना जाता था, पर वे स्वयं को सदैव एक तुच्छ भक्त ही कहते रहे.

दो मोड़ों के बीच रचा गया 'कैंची धाम'
नैनीताल और अल्मोड़ा के बीच पहाड़ों के दो तीखे 'हेयरपिन मोड़' बिलकुल कैंची की आकृति जैसे दिखाई देते थे. इसी दुर्गम स्थान पर जब बाबा ने वर्ष 1961 में कदम रखा, तो वहां की शांत वादियों में एक नया आध्यात्मिक केंद्र अंकुरित हुआ. 15 जून 1964 को यहां हनुमान जी की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और यह पावन भूमि 'कैंची धाम' के नाम से मशहूर हो गई. हर साल 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस मनाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

हार्वर्ड के प्रोफेसर से लेकर सिलिकॉन वैली तक का सफर
बाबा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा. 1967 में हार्वर्ड के मनोविज्ञान प्रोफेसर रिचर्ड अल्पर्ट जब भारत आए, तो बाबा के सानिध्य में उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और वे 'बाबा राम दास' बन गए. कहा जाता है जब Apple के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में दिशा की तलाश में कैंची धाम पहुंचे, तो उन्हें यहां एक नई ऊर्जा मिली. सालों बाद, जब Meta (Facebook) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग अपनी कंपनी के शुरुआती संकट से जूझ रहे थे, तब स्टीव जॉब्स ने ही उन्हें कैंची धाम जाने की सलाह दी थी.

आज भी भक्तों के दिलों में हैं जीवंत
मार्क जुकरबर्ग खुद स्वीकार करते हैं कि इस यात्रा ने उनकी दृष्टि बदल दी. 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में बाबा नीम करौली महाराज ने अपना देह त्याग दिया था. देह त्याग के पांच दशक बीत जाने के बाद आज भी बाबा अपने भक्तों के दिलों में उतने ही जीवंत हैं, जितने वे अपने जीवनकाल में थे. उनका जीवन इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि अध्यात्म का असली सौंदर्य बड़े-बड़े उपदेशों में नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम, सादगी और सेवा भाव में छिपा होता है.

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About the Author

Pooja Singh

Pooja Singh

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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